PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का किसानों ने किया विरोध… ये है वजह

New Delhi: दिल्ली-मेरठ हाईवे (Delhi Meerut Highway) का काम किसानों के विरोध के चलते प्रभावित हो रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (Delhi Meerut Expressway) के पहले चरण का उद्घाटन 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) कर चुके हैं।

इस एक्सप्रेस-वे (Delhi Meerut Expressway) का काम पूरा होने से दिल्ली से मेरठ का सफर केवल 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा, लेकिन अब इसका विरोध हो रहा है। इसी के चलते शनिवार को तमाम किसानों ने इकट्ठा होकर एक्सप्रेस-वे के काम को बंद करवा दिया।

यह निर्माण कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के द्वारा किया जा रहा है। जैसे ही कार्य में बाधा डालने की यह सूचना मिली तो सूचना के आधार पर स्थानीय पुलिस और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद लोगों को समझाने के बाद उन्हें सड़क से हटाया।

क्या है मामला

विरोध करने वाले किसानों का कहना है कि सन 1971 में PWD ने इस जमीन का अधिग्रहण किया था। लेकिन गाजियाबाद के खसरा नंबर 63 ,64 ,65 का मुआवजा किसानों को अभी तक नहीं मिल पाया है। यह पूरा मामला अभी जांच के दायरे में भी है। अभी तक इसकी जांच पूरी नहीं हुई है।

लेकिन उसके बावजूद भी यहां पर जबरन किसानों का हक मारते हुए सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। जिसके चलते सड़क निर्माण के कार्य को रोका गया है । उनका कहना है कि अभी तक यहां के 3 किसान परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है। जिसके कारण इन परिवार के करीब 40 लोग पूरी तरह प्रभावित है।

PWD ने किया था अधिग्रहण

वहीं दूसरी तरफ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी अरविंद कुमार ने बताया कि इस जमीन का अधिग्रहण पीडब्ल्यूडी के द्वारा 1971 में किया गया था और बाद में यह नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को ट्रांसफर कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि यह प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है ।जो दिल्ली से हरिद्वार देहरादून वाले रास्ते पर जाने वाले लोगों के लिए 14 लाइन का सुगम सड़क निर्माण किया जा रहा है ।उन्होंने बताया कि इस हाईवे के निकलने के बाद इसके आसपास के गांव के अलावा गाजियाबाद जनपद में भी चार चांद लग गए हैं।

उन्होंने बताया कि इस सड़क का निर्माण पीछे से पूरा हो चुका है ।कुछ हिस्सा इसका बाकी है ।क्योंकि इस जमीन के किसानों के द्वारा बताया गया कि खसरा नंबर 63, 64, 65 की जमीन का मुआवजा नहीं उठा है और इसकी जांच एडीएमई के द्वारा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला सरकारी स्तर पर चल रहा है। किसानों की जो भी मांग है। उसे प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने का उनका पूरा अधिकार है। लेकिन कार्य में बाधा डालना उचित नहीं है। किसानों के द्वारा कार्य को रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन अब फिलहाल उन्हें समझाया गया है और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसकी पूरी गहनता से जांच की जा रही है।

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