Thursday, March 4, 2021
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Farmers Protest: डेढ़-2 साल के लिए कृषि कानून पर रोक! किसान संग बैठक में सरकार ने दिया प्रस्ताव

Webvarta Desk: Farmers Protest: किसान संगठनों की सरकार के साथ बुधवार को 10वें दौर की बैठक (Govt Farmers Meeting) हुई। बताया जा रहा है कि सरकार ने किसान संगठनों को दोनों पक्षों की सहमति से एक निश्चित समय के लिए तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को निलंबित करने का प्रस्ताव दिया है। सरकार की ओर से एक समिति के गठन के लिए उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में हलफनामा दायर का भी प्रस्ताव रखा गया है।

वहीं किसान संगठनों ने कहा है कि वे कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लेने की अपनी मांग पर अडिग हैं, लेकिन कानूनों को निलंबित करने के सरकार के प्रस्ताव पर गुरुवार को चर्चा करेंगे। बैठक (Govt Farmers Meeting) की जानकारी देते हुए किसानों संगठन के एक नेता ने कहा, ‘सरकार ने कहा है कि हम कोर्ट में एफिडेविट देकर क़ानून को 1.5-2 साल तक होल्ड पर रख सकते हैं। कमिटी बनाकर चर्चा करके, कमिटी जो रिपोर्ट देगी, हम उसको लागू करेंगे’

सरकार का कृषि कानूनों (Farm Laws) में संशोधन का प्रस्ताव, किसान संगठन अपनी मांग पर अड़े नयी दिल्ली, 20 जनवरी केंद्र सरकार ने बुधवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से 10वें दौर की वार्ता में तीनों कृषि कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव रखा लेकिन प्रदर्शनकारी किसान इन कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे।

किसानों ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने पर चर्चा टाल रही है। किसान नेताओं ने कहा कि 10वें दौर की वार्ता के पहले सत्र में कोई समाधान नहीं निकला क्योंकि दोनों ही पक्ष अपने रुख पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि आज की वार्ता में 11वें दौर की वार्ता की तारीख तय करने के अलावा कोई नतीजा नहीं निकलना है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को एक वर्ष या उससे अधिक समय के लिए निलंबित रखने और किसान संगठनों व सरकार के प्रतिनिधियों की एक समिति गठित करने भी प्रस्ताव रखा। सूत्रों ने बताया कि मंत्रियों ने प्रस्ताव दिया कि जब तक समिति की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक कृषि कानून निलंबित रहेंगे।

उन्होंने तब तक किसानों को अपना आंदोलन स्थगित करने का आग्रह किया। हालांकि इस प्रस्ताव का किसान संगठनों ने समर्थन नहीं किया। ज्ञात हो कि कृषि कानूनों के अमल पर उच्चतम न्यायालय ने अगले आदेश तक पहले ही रोक लगा रखी है। शीर्ष अदालत ने भी एक समिति गठित की है।

बैठक के दौरान किसान नेताओं ने कुछ किसानों को एनआईए की ओर से जारी नोटिस का मामला भी उठाया और आरोप लगाया कि किसानों को आंदोलन का समर्थन करने के लिए प्रताड़ित करने के मकसद से ऐसा किया जा रहा है। सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस मामले को देंखेंगे। भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने कहा, ‘तीन कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है और मुझे नहीं लगता है कि आज की बैठक में कोई नतीजा निकलेगा। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।’

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