नहीं रहे मशहूर शायर और गीतकार राहत इंदौरी.. कोरोना और दिल के दौरे ने खत्म कर दिया अदब का दौर

New Delhi: मशहूर शायर और गीतकार राहत इंदौरी (Rahat Indori) का कोरोना से नि’धन हो गया है। राहत इंदौरी कोरोना से संक्रमित होने के बाद इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में भर्ती हुए थे। अगले ही दिन उनका नि’धन हो गया है। इसके बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। प्रदेश के सभी नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।

दरअसल, राहत इंदौरी (Rahat Indori) पॉजिटिव आने के बाद सोमवार को अस्पताल में भर्ती हुए थे। मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद को पॉजिटिव होने की जानकारी दी थी। साथ ही कहा था कि मुझे और मेरे परिवार को कोई फोन नहीं करेगा। राहत इंदौरी को पहले से भी कई तरह की बीमारी थी। उन्होंने शुगर और हार्ट की भी दिक्कत थी।

वहीं, अरबिंदो अस्पताल के डॉक्टर विनोद भंडारी ने कहा है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें 2 बार दिल का दौरा पड़ा था। उसके बाद उनकी स्थिति बिगड़ती गई है। हम लोग उन्हें बचा नहीं सके। उन्हें 60 फीसदी निमोनिया था। डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें पहले से निमोनिया था।

आज ही दी थी जानकारी

डॉ राहत इंदौरी (Rahat Indori) रविवार को ही अस्पताल में भर्ती हुए थे। मंगलवार की सुबह उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि कोविड के शरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है। ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूं, दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।

फिल्मों में लिखे 22 गीत

राहत इंदौरी (Rahat Indori) का जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। उन्होंने बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से उर्दू में एमए किया था। भोज यूनिवर्सिटी ने उन्हें उर्दू साहित्य में पीएचडी से सम्मानित किया था।

राहत इंदौरी (Rahat Indori) उर्दू के मशहूर शायर होने के साथ ही बॉलीवुड के चर्चित संगीतकार थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में रफतुल्लाह कुरैशी के घर पर हुआ था। वे एक कपड़ा मिल में काम करते थे। उनकी मां का नाम मकबूल उन निसा बेगम था। उन्होंने इंदौर के नूतन स्कूल से 10वीं की परीक्षा पूरी की। इसके बाद इंदौर के ही इस्लामिया करीमिया कॉलेज से उन्होंने स्नातक और भोपाल की बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से उर्दू में स्नातकोत्तर किया।

उन्होंने मध्य प्रदेश की भोज यूनिवर्सिटी से उर्दू साहित्य में पीएचडी की। वे एक अच्छे पेंटर भी थे। वे पिछले करीब 45 सालों से मुशायरे और कवि सम्मेलनों की जान बने हुए थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उन्हें भारत ही नहीं दुनिया के अन्य हिस्सों से भी निमंत्रण मिलते रहते थे। वे मुशायरे और कवि सम्मेलनों के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मॉरीशस, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल समेत कई देशों में जा चुके थे।

राहत इंदौरी हरफनमौला व्यक्ति थे। अपने इसी खुशमिजाज की वजह से वे पुरानी पीढ़ी के साथ ही नई जनरेशन में भी लोकप्रिय थे। उनकी लोकप्रियता की वजह से कपिल शर्मा उन्हें अपने शो में दो बार आमंत्रित कर चुके थे। वे सब टीवी पर प्रसारित होने कार्यक्रम वाह वाह क्या बात है पर भी शो प्रस्तुत कर चुके थे। उनकी एक कविता ‘बुलाती है मगर जाने का नहीं’ टिकटॉक पर बहुत वायरल हुई थी और फेसबुक, ट्वीटर व इंस्टाग्राम पर ट्रेंड हुई थी।

राहत इंदौरी ने फिल्मों में 22 गीत लिखे इनमें मुन्ना भाई एमबीबीएस, मीनाक्षी, खुद्दार, नाराज, मर्डर, मिशन कश्मीर जैसी फिल्में शामिल हैं।