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Sunday, January 29, 2023

क्या खरगे ने किया सभापति धनखड़ का अपमान? जानें संसद में ऐसा क्या हुआ, BJP है गुस्से से लाल

New Delhi: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ का अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इन दलों (विपक्षी दलों) ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के आदेश का उल्लंघन करने का फैसला कर लिया है और यह उनकी मानसिकता बन गई है। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के व्यवहार की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज राज्यसभा में जो कुछ हुआ, उसे सारे देश और मीडिया ने देखा है। विपक्षी सांसद भारत-चीन पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा करते हुए वेल में आ गए।

जोशी ने कहा, ‘सभापति ने बार-बार हाथ जोड़कर, खड़े होकर उनसे अपनी सीट पर जाने का अनुरोध किया, लेकिन ये अपनी सीट पर नहीं गए। इसके बाद सभापति ने सदन के नेता और विपक्ष के नेता को अपने चैंबर में बात करने के लिए आने को कहा, तब अहंकार से सभापति के निर्देश को ठुकराते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने आने से इनकार कर दिया।’ खरगे ने कहा कि यह रूम में चर्चा का विषय नहीं है, इसलिए वे चैंबर में नहीं आएंगे।

जोशी ने खरगे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपनी पार्टी के नेता को संतुष्ट करने के लिए यह सब करना पड़ रहा है, जो देश में कहीं घूम रहे हैं। लेकिन खरगे साहब को संवैधानिक पद पर बैठे लोगों की गरिमा और आदर देने की परंपरा का पालन करना चाहिए। प्रल्हाद जोशी ने आगे कहा कि आज ही लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति दोनों ने ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए सभी सांसदों को कहा था लेकिन इन लोगों (विपक्षी सदस्यों) ने इस निर्देश को भी नहीं माना और वेल में इनके एक भी व्यक्ति ने मास्क नहीं पहना था। जोशी ने दोनों निर्देश की अवहेलना करने की घोर निंदा की।

धनखड़ की किस बात पर भड़के विपक्षी सदस्य?

दरअसल, अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी दुस्साहस पर चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस सहित कई विपक्षी सदस्यों ने आज राज्यसभा में जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। इसके बाद भी सभापति जगदीप धनखड़ ने जब उनकी एक ना सुनी तो उन्होंने सदन से वॉकआउट किया। सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति ने आवश्यक दस्तावेज और विभिन्न संसदीय समितियों की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखवाईं। इसके बाद उन्होंने बताया कि नियम 267 के तहत 12 नोटिस प्राप्त हुए हैं लेकिन एक भी नोटिस नियमों के पैमाने पर खरा नहीं उतरता। धनखड़ ने कहा कि उन्होंने सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए हैं। इसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर खड़े होकर सीमा पर चीनी अतिक्रमण के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करने लगे।

राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य मनोज झा, जनता दल (यूनाइटेड) के रामनाथ ठाकुर और कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह ने इसी बीच सदन के नेता पीयूष गोयल द्वारा बिहार के खिलाफ की गई एक टिप्पणी का मामला उठाया और इसे बिहार का अपमान बताते हुए उनसे माफी की मांग की। हंगामा बढ़ता देख, सभापति ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी बात रखने के लिए कहा। खरगे ने कहा कि सत्र के पहले दिन से ही विपक्ष के सदस्य चीनी अतिक्रमण के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘चीन पुल बना रहा है…मकान बना रहा है…हम इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं ताकि हम जान सकें कि वास्तव में कहां पुलों का निर्माण हो हो रहा है… देश को पता चले कि सीमा पर क्या हो रहा है।’

उन्होंने गोयल के बिहार पर दिए बयान का मुद्दा भी उठाया और कहा कि उन्होंने बिहार और बिहार की जनता का अपमान किया है। गोयल आज हंगामे के बाद जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए विपक्षी सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। उनकी नारेबाजी के बीच ही गोयल ने कहा कि उनका इरादा बिहार और बिहार की जतना का अपमान करना कतई नहीं था। उन्होंने कहा, ‘मेरा बिहार या बिहार की जनता का अपमान करने का कतई इरादा नहीं था। अगर इससे किसी को ठेस पहुंची है तो मैं तत्काल अपना बयान वापस लेता हूं। यह किसी के प्रति द्वेष की भावना नहीं थी।’ गोयल के बयान के बाद भी विपक्षी दलों का हंगामा जारी रहा।

उच्च सदन में वेल में आ गए सदस्य

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सभापति धनखड़ ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत रहने और कार्यवाही चलने देने की अपील की। हालांकि विपक्षी सदस्यों पर इसका कोई असर नहीं हुआ और वे चर्चा की मांग पर अड़े रहे। इस बीच, विपक्षी सदस्य आसन के निकट आ गए और चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। धनखड़ ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपने-अपने स्थानों पर लौट जाने का आग्रह किया। उन्होंने विपक्ष के नेता खरगे से भी आग्रह किया कि वे अपने सदस्यों को शांत कराएं और उन्हें उनके स्थानों पर लौटने को कहें। उन्होंने कहा कि यदि सदस्य अपने स्थान पर लौट जाएंगे तो वह विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर देंगे।

उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों को आगाह किया कि वे उन्हें कार्रवाई जैसे कठोर कदम भी उठाने को मजबूर कर रहे हैं। धनखड़ ने इसके बाद सदन के नेता और विपक्ष के नेता को एक बजे अपने कक्ष में आने को कहा था। आसन के बार-बार के अनुरोध के बाद विपक्षी सदस्य अपने स्थान की और लौट गए और फिर खरगे बोलने के लिए खड़े हुए। खरगे ने कहा, ‘हम चीनी अतिक्रमण के मुद्दे पर चचा चाहते हैं लेकिन सरकार अडिग है। हम चाहते हैं कि सीमा के मुद्दे पर चर्चा हो।’ इस पर, धनखड़ ने खरगे को याद दिलाया कि इस संबंध में नोटिस अस्वीकार कर दिए गए हैं।

आपको गुस्सा आ रहा है…

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खरगे ने आगे कहा, ‘सदन में नियम एक तरफ रहते हैं और दूसरी तरफ सदन की परंपराएं, प्रथाएं और परिपाटियां होती हैं। ऐसी घटनाएं जब होती हैं तो सदन कैसे चलाया जाता है, यह भी सदन का ही काम है और आपका काम है।’ उन्होंने कहा, ‘सिर्फ नियम पुस्तिकाएं ही नहीं हैं। परिपाटियां लिखी नहीं जातीं। परंपराएं हैं और इनके तहत ही हम मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन आपको गुस्सा आ रहा है और हमें तो उनके (सरकार) ऊपर (गुस्सा) आ रहा है।’

हाथ जोड़कर धनखड़ ने कहा…

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खरगे की इस टिप्पणी का जवाब देते हुए धनखड़ ने कहा कि उन्हें कभी गुस्सा नहीं आता है। उन्होंने कहा कि वह सदस्यों के आचरण से हैरान और परेशान जरूर हैं क्योंकि बार-बार नियम 267 की ओर ध्यान दिलाए जाने के बावजूद सदस्य नोटिस के संबंध में उनके द्वारा दी गई व्याख्या का अनुसरण नहीं कर रहे हैं। कुछ देर बाद सभी विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए।

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