Constitution Day 2020: संविधान निर्माता डॉ अंबेडकर ने ऐसे किया था भारतीय संविधान का निर्माण

New Delhi: भारत 26 नवंबर 2020 को अपना 71वां संविधान दिवस (Constitution Day) मनाने जा रहा है। आज से 71 साल पहले सरकार ने 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया था। जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr Bhim Rao Ambedkar) को भारत का संविधान निर्माता कहा जाता है। वे संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे और उन्हें संविधान का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 17 दिन लगे। पूरे देश में 26 नवंबर को संविधान दिवस (Constitution Day) के तौर पर मनाया जाता है। जानें भारत के आम नागरिक के लिए कितना महत्वपूर्ण है संविधान।

संविधान की खास बात ये है कि अधिकार और कर्तव्य यानी ‘Rights and Duites’ के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे।

जवाहरलाल नेहर, डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। हमारा संविधान विश्‍व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। मसौदा लिखने वाली समिति ने संविधान हिंदी, अंग्रेजी में हाथ से लिखकर कैलिग्राफ किया था और इसमें कोई टाइपिंग या प्रिंटिंग शामिल नहीं थी। बता दें, संविधान के लागू के होते ही समाज को निष्पक्ष न्याय प्रणाली मिली। नागरिकों को मौलिक अधिकारों की आजादी मिली और कर्तव्यों की जिम्मेदारी भी।

भारतीय संविधान में ये महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं
  • यह लिखित और विस्तृत है
  • मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता, यात्रा, रहने, भाषण, धर्म, शिक्षा आदि की स्वतंत्रता,
  • एकल राष्ट्रीयता,
  • भारतीय संविधान लचीला और गैर लचीला दोनों है
  • राष्ट्रीय स्तर पर जाति व्यवस्था का उन्मूलन
  • समान नागरिक संहिता और आधिकारिक भाषाएं
  • केंद्र एक बौद्ध ‘गणराज्य’ के समान है।
  • बुद्ध और बौद्ध अनुष्ठान का प्रभाव
  • भारतीय संविधान अधिनियम में आने के बाद, भारत में महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला है।
  • दुनिया भर में विभिन्न देशों ने भारतीय संविधान को अपनाया है।
अंबेडकर को किया जाता है याद

भारत में राष्ट्रीय संविधान दिवस 26 नवंबर को हर साल सरकारी तौर पर मनाया जाता है। इस संविधान के पितामाह डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर को याद किया है। बता दें, संविधान दिवस को नेशनल लॉ डे के नाम से भी जाना जाता है।

संविधान तैयार करने के दौरान क्या थे भीमराव अंबेडकर के विचार

डॉ. भीमराव अंबेडकर को 29 अगस्त, 1947 को संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका मानना ​​था कि विभिन्न वर्गों के बीच अंतर को बराबर करना महत्वपूर्ण था, अन्यथा देश की एकता को बनाए रखना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने धार्मिक, लिंग और जाति समानता पर जोर दिया था।

अंबेडकर ने वर्गों के बीच सामाजिक संतुलन बनाने के लिए आरक्षण प्रणाली की शुरुआत की थी। 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूची, 5 परिशिष्ट और 98 संसोधनों के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है।

आइए इस मौके पर आपको हम अपने संविधान से जुड़ीं खास बातें बताते हैं
  • हमारे संविधान को हिंदी और अंग्रेजी में हाथ से लिखा गया था। उसके बाद कैलिग्राफ किया था। इसमें कोई टाइपिंग या प्रिंटिंग नहीं की गई थी।
  • संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन भारत के राज्यों की सभाओं द्वारा किया गया था। जवाहरलाल नेहरू, डॉ. भीमराव आंबेडकर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे।
  • 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को इसका स्थायी अध्यक्ष चुना गया था। वह अंत तक इस पद पर बने रहे थे।
  • डॉ.भीमराव आंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारत के संविधान को तैयार करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। इसलिए उनको भारतीय संविधान का निर्माता भी माना जाता है।
  • भारतीय संविधान में अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में बंटे थे और इसमें सिर्फ 8 अनुसूचियां थीं।
  • भारतीय संविधान 26 जनवरी, 1950 से प्रभाव में आया। इसलिए ही 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं।
  • संविधान को हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में संविधान की मूल प्रति को प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था। रायजादा का खानदानी पेशा कैलिग्राफी का था। उन्होंने नंबर 303 के 254 पेन होल्डर निब का इस्तेमाल कर संविधान के हर पेज को बेहद खूबसूरत इटैलिक लिखावट में लिखा है। इसे लिखने में उन्हें 6 महीने लगे थे।
  • भारतीय संविधान के हर पेज को चित्रों से आचार्य नंदलाल बोस ने सजाया है। इसके अलावा इसके प्रस्तावना पेज को सजाने का काम राममनोहर सिन्हा ने किया है। वह नंदलाल बोस के ही शिष्य थे। संविधान की मूल प्रति भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में रखी गई है।