अकाली दल ने दिया BJP को झटका, कांग्रेस बोली- यह किसानों की जीत, छोड़ना पड़ा सरकार का साथ

New Delhi: कृषि बिल (Farm Bill or Agriculture Bill) के मुद्दे पर NDA की 24 साल से सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने गठबंधन से नाता तोड़ लिया। शनिवार को पार्टी ने एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया। अकाली दल के इस फैसले को लेकर कांग्रेस (Congress) ने चुटकी ली है।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला (Congress Leader Randeep Surjewala) ने शनिवार को कहा कि यह किसानों की जीत है क्योंकि अकाली दल को अन्नदाताओं की चौखट पर झुकना पड़ा और सत्तारूढ़ गठबंधन से संबंध तोड़ना पड़ा।

सुरजेवाला (Congress Leader Randeep Surjewala) ने कहा कि काले कानून के समर्थक अकाली दल को NDA छोड़ना पड़ा और मोदी सरकार से संबंध तोड़ने पड़े। उन्हें (अकाली) किसानों-श्रमिकों की चौखट पर झुकना पड़ा। वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने एनडीए से अलग होने के अकाली दल के फैसले को बादल परिवार के लिए राजनीतिक मजबूरी बताया।

मुख्यमंत्री (Captain Amarinder Singh) ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के फैसले के पीछे कोई नैतिक आधार नहीं है। बीजेपी ने कृषि विधेयकों को लेकर किसानों को नहीं मना पाने के लिए अकाली दल को जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद उनके पास और कोई विकल्प नहीं रह गया था।

मुश्किल में अकाली दलः कैप्टन

कैप्टन (Captain Amarinder Singh) ने कहा कि चेहरा बचाने की इस कवायद में अकाली दल और भी बड़ी राजनीतिक मुश्किल में फंस गया है जिसमें अब उनके लिए पंजाब के साथ-साथ केंद्र में भी कोई जगह नहीं बची। गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कृषि विधेयकों के विरोध में शनिवार रात को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने की घोषणा की। पार्टी की कोर समिति की बैठक के बाद उन्होंने यह घोषणा की।

बादल ने कहा कि एनडीए से अलग होने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि केंद्र ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी सुनिश्चित करने से इनकार कर दिया है। वह पंजाबी, खासकर सिखों से जुड़े मुद्दों पर लगातार असंवेदनशीलता दिखा रही है, जिसका एक उदाहरण है जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक भाषा श्रेणी से पंजाबी भाषा को बाहर करना।

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