Sonia Modi

सोनिया ने लिखा- यह BJP बनाम कांग्रेस की लड़ाई नहीं, मोदी सरकार MNREGA से करे गरीबों की मदद

New Delhi: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने एक लेख के जरिए भाजपा सरकार पर व्यंगात्मक निशाना साधा है।

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि कोरोना वायरस के कारण गरीब वर्ग आर्थिक रूप से टूट गया है और सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून 2005 (MNREGA) के तहत लोगों की मदद करे। उन्होंने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस की लड़ाई नहीं है। भारत की जनता के लिए मनरेगा का इस्तेमाल करिए।

यह वक्त राजनीति करने का नहीं है- सोनिया

लॉकडाउन के बाद प्रवासी मजदूरों के घर लौटने के बारे में सोनिया (Sonia Gandhi) ने लिखा कि आज निराश मजदूर और कामगार विभिन्न शहरों से लौट रहे हैं। ऐसे में अब मनरेगा की जरूरत ज्यादा है। सबसे पहले उन्हें जॉब कार्ड दिया जाए। जिस पंचायती राज को सशक्त बनाने के लिए राजीव गांधी (पूर्व प्रधानमंत्री) ने संघर्ष किया, आज मनरेगा को लागू करने में मुख्य भूमिका उन्हीं पंचायतों की होनी चाहिए।’

आगे सोनिया ने लिखा, ‘बिना इच्छा के ही लेकिन मोदी सरकार मनरेगा की जरूरत को समझ चुकी है। मेरा अनुरोध है कि इस वक्त देश पर छाए संकट का सामना करने का समय है, यह वक्त राजनीति करने का नहीं है। आपके पास एक ताकतवर तंत्र है> इसका इस्तेमाल कर आपदा के समय भारत के नागरिकों की मदद करें।’

मनरेगा की उपलब्धियां गिनाई

सोनिया गांधी ने एक लेख में लिखा, ‘मनरेगा के तहत इस कानून ने गरीब से गरीब शख्स को हाथों का काम और आर्थिक ताकत देकर भूख और गरीबी को मिटाने का काम किया है। सोनिया ने कहा कि यह तार्किक इसलिए है कि यह पैसा सीधा उन लोगों के हाथ में जाता है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। मोदी सरकार ने मनरेगा की आलोचना की और इसे कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन आखिर में इसके लाभ, सार्थकता और तर्क को स्वीकार करना पड़ा। मौजूदा केंद्र सरकार और उससे पहले 6 साल भी सरकार के लिए मनरेगा उपयोगी साबित हुई।’

मनरेगा से किया लाखों लोगों का उद्धार- सोनिया

उन्होंने अपने लेख में लिखा, ‘भारत के गांवों में रहने वाले किसी भी नागरिक को इस कानून के तहत कम से कम 100 दिन का काम मांगने का अधिकार है और इससे जरिये सरकार उसे न्यूनतम मजदूरी के साथ कम से कम 100 दिन काम दिये जाने की गारंटी देती है। इसकी उपयोगिता बहुत जल्दी साबित भी हुई। यह जमीनी स्तर पर मांग द्वारा संचालित, काम का अधिकार देने वाली योजना है जो अद्भुत है और इसका उद्देश्य है कि गरीबी मिटाई जा सके। मनरेगा की शुरुआत के बाद 15 साल के भीतर इस योजना से लाखों लोग भूख और गरीबी से बाहर निकाला है।

सोनिया ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को कोट करते हुए लिखा है – जब आलोचना किसी आंदोलन को दबाने में असफल हो जाती है तो उसको स्वीकृति और सम्मान मिलने लगता है।’ आजाद भारत में राष्ट्रपिता की इस बात को साबित करने के लिए मनरेगा से अच्छा कोई उदाहरण नहीं है।

मोदी सरकार पर हमला

लेख में सोनियां गांधी ने पीएम मोदी पर भी हमला किया। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा मनरेगा को कांग्रेस के विफलता का स्मारक कहे जाने को याद करते हुए सोनिया ने लिखा कि पद संभालने के बाद पीएम मोदी को भी यह एहसास हुआ कि मनरेगा बंद किया जाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए उन्होंने इस योजना को कांग्रेस पार्टी की विफलता का जीवित उदाहरण तक कह दिया। बीते सालों में मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म करने, इसे कमजोर बनाने की पूरी कोशिश की लेकिन मनरेगा के प्रहरियों और विपक्ष के दबाव ने इसे जिन्दा रखा।

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