राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है बीआरओ : राजनाथ सिंह

Rajnath Singh

नई दिल्ली, 11 जून (वेबवार्ता)। सड़क सुरक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने और सड़कों, पुलों, हवाई क्षेत्रों और सुरंगों के क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए स्थापित दो उत्कृष्टता केन्द्रों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज राष्ट्र को समर्पित किया। सीमा सड़क संगठन के यहां स्थित कार्यायल में शुक्रवार को आयोजित इस समारोह में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, रक्षा सचिव अजय कुमार, संगठन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल राजीव चौधरी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री ने उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र की स्थापना में संगठन के महानिदेशालय के प्रयासों और विजन की सराहना करते हुए कहा कि ये केन्द्र देश की बेहतर सुरक्षा की दिशा में काम करेंगे और प्रधान मंत्री के ”आत्मनिर्भर भारत” के सपने को उचित प्रोत्साहन प्रदान करेंगे। संगठन ने स्वयं के संसाधनों के माध्यम से ये दो उत्कृष्टता केन्‍द्र बनाए हैं। सड़क सुरक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में जो गहन संस्थागत ज्ञान और अनुभव हासिल किया है उसके माध्यम से दोनों उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र बहुआयामी शोधों का पता लगाकर उन पर ध्यान केंद्रित करेंगे और इन्हें आगे बढ़ाएंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए के ‘कर्मयोगियों’ को संबोधित करते हुए कहा, आज लॉन्च किए जा रहे चार सॉफ्टवेयर संगठन के काम में दक्षता लाएंगे और उनके समय की भी बचत करेंगे। उनका निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियानों की सफलता का भी प्रतीक है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘सड़कों पर दुर्घटनाएं आज हमारे लिए बड़ी चिंता का विषय हैं। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि हमारे देश में दुनिया के कुल 3 फीसदी से भी कम वाहन हैं लेकिन दुर्घटनाएं 11 फीसदी के करीब हैं।

यह किसी साइलेंट पेंडमिक से कम नहीं

देश में हर साल लगभग 4.5-5 लाख दुर्घटनाएं और 1.5 लाख दुर्भाग्यपूर्ण मौतें होती हैं। यह किसी मूक महामारी से कम नहीं है। इन सब से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने जैसे ‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति’ को मंजूरी देना, ‘मोटर वाहन अधिनियम 2020’ लाना, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट की पहचान करना जैसे कदम उठाए हैं। अपनी स्थापना के समय से ही बीआरओ दूरदराज के क्षेत्रों में सड़कों, सुरंगों और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करके राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट कनेक्टिविटी है।

बीआरओ के जवान अथक परिश्रम कर रहे

कनेक्टिविटी के लिए हमारे बीआरओ के जवान कड़ाके की सर्दी, गर्मी, बारिश, बर्फबारी जैसी मुश्किलों के बीच भी अथक परिश्रम कर रहे हैं। पिछले 5-7 वर्षों में, बीआरओ ने और भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले पांच-सात वर्षों के दौरान बीआरओ के बजट में तीन से चार गुना वृद्धि कोई मामूली बात नहीं है। इसके अलावा, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि सावधानी हैती दुर्घटना घटी जैसे नारे भी सड़क पर लोगों को जागरूक करने में मदद करते हैं।

राजनाथ ने आगे कहा कि इसी तरह ‘सड़क सुरक्षा’, और ‘सड़कों, पुलों, सुरंगो, एयर-फील्ड्स’ की अध्ययन पर आधारित, दो-दो ‘सेंटर ऑफ एक्सिलेंस’ का प्रारंभ होना भी बड़े गर्व की बात है। यह दोनों ही सेंटर अपने उद्देश्यों में एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाएं आज हमारे लिए बड़ी चिंता का कारण हैं। हर व्यक्ति मानो यह मानकर चलता है, कि दुर्घटना तो दूसरों के लिए बनी है; मेरे साथ थोड़े कोई दुर्घटना होगी! और इसलिए वह उतनी सावधानी नहीं रखता है, जितनी रखनी चाहिए।

राजनाथ ने कहा कि बड़े आश्चर्य का विषय है कि हमारे देश में दुनिया के कुल 3% से भी कम वाहन हैं, पर दुर्घटनाएं 11% के करीब होती हैं। हर साल लगभग साढे चार-पांच लाख दुर्घटनाएं, और डेढ़ लाख दुर्भाग्यपूर्ण मौतें। यह किसी साइलेंट पैंडेमिक से कम हैं क्या ? इन सब से निज़ात पाने के लिए सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं, जैसे ‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति’ को मंजूरी देना, ‘मोटर व्हीकल एक्ट 2020’ लाना, नेशनल हाइवे पर ब्लैक स्पॉट की पहचान करना आदि, उनमें भी यह सेंटर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात है लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता लाना; जिसके प्रति बीआरओ आज से नहीं, बहुत लंबे समय से जागरूक है। बीआरओ की सड़कें जहां जहां भी बनी हैं, वह खुद अपने आप में आकर्षण का विषय होती हैं। बीआरओ की सड़कों पर चलने से पहले, रोड सेफ्टी के नाम पर अक्सर लोगों को एक स्लोगन का पता होता है, ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।’ रोडवेज की बसों में यह लाइन जब पहली बार कोई बच्चा देखता है, तो उसे समझने के लिए भी दिमागी कसरत करनी पड़ जाती है।

राजनाथ ने कहा कि राहें भी बनाता है, और राहें चलना भी सिखाता है। रोड सेफ्टी एंड अवेयरनेस पर आधारित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हमेशा नए-नए तरीकों से लोगों को रोड सेफ्टी के प्रति जागरूक करेगा, उनकी सुरक्षा करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है। पिछले 5-7 वर्षों के दौरान, बीआरओ के बजट में 3 से 4 गुना की बढ़ोत्तरी होना कोई मामूली बात नहीं है। इस अवसर पर मैं, उन सभी कर्मयोगियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने देश की सेवा में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए अपना समस्त दांव पर लगा दिया।

संगठन का मानना है कि जैसे-जैसे राष्ट्र आगे बढ़ रहा है और सड़क नेटवर्क में तेजी से वृद्धि हो रही है, सड़क दुर्घटनाएं भी चिंता का विषय बन गई हैं। अभी देश में कोई भी संस्था या संगठन अकेले सड़क सुरक्षा और जागरूकता पर ध्यान केंद्रित नहीं करता है। इस उद्देश्य के साथ, बीआरओ ने सुरक्षित सड़क नेटवर्क के लिए एक नोडल उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र की स्थापना की है जो सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण को दूसरों के साथ साझा करके जागरूकता पैदा करेगा और कीमती मानव जीवन की सुरक्षा के लिए महत्‍वपूर्ण सुझाव देगा।

देश के पूर्वी और पश्चिमोत्‍तर क्षेत्रों में लगभग 60000 किलोमीटर सड़कों, 56000 मीटर पुलों, 19 हवाई पट्टियों और चार सुरंगों के विकास में विगत वर्षों में प्राप्त ज्ञान को संस्थागत बनाने के लिए सड़कों, पुलों, हवाई क्षेत्रों और सुरंगों के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की गई है। बीआरओ में निहित विभागीय विशेषज्ञता है और यह नवाचारों और नई प्रौद्योगिकियों और उपकरणों की शुरूआत करने में अग्रणी है और अब इसे अन्य सरकारी संगठनों और संस्थानों के साथ साझा किया जाएगा।

उद्घाटन के दौरान रक्षा सचिव ने इन प्रतिष्ठानों के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ये उत्‍कृष्‍टता केन्‍द्र तकनीकी प्रगति के एक नए युग की नींव को मजबूत करने में लंबा सफर तय करेंगे। समारोह के दौरान, रक्षा मंत्री ने बीआरओ कर्मयोगियों की सेवा में चार डिजिटल सॉफ्टवेयरों का उद्घाटन कर राष्ट्र को समर्पित किया, जो संगठन की कार्य कुशलता, मानव संसाधन प्रबंधन, भर्ती प्रबंधन और उनके नामांकन और कार्य प्रबंधन प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे तथा आगे देश में ढांचागत विकास में वृद्धि करेंगे।

तत्कालीन सेनाअध्‍यक्ष जनरल विपिन रावत, द्वारा परिकल्पित पहले एचआरएमएस सॉफ्टवेयर का वर्तमान सेनाअध्‍यक्ष जनरल एमएम नरावणे द्वारा उद्घाटन किया गया था। बीआरओ ने भी इसी तरह का सॉफ्टवेयर बनाया है जो कागजी काम को काफी कम कर देगा और इस तरह यह कार्बन फुट प्रिंट को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

इस अवसर पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने संगठन में एक गतिशील परिवर्तन की शुरुआत करने के लिए महानिदेशक सीमा सड़क के नेतृत्व और दूरदृष्टि की सराहना की, जिससे रणनीतिक परियोजनाओं को उचित प्रोत्साहन एवं दिशा मिलेगी। उन्होंने सबसे कठिन महामारी के दौरान सीमाओं के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए बीआरओ के प्रयासों की भी प्रशंसा की। संगठन के महानिदेशक ने सूचित किया कि सीमा सड़क संगठन राष्ट्र की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और संगठन की दक्षता को और अधिक तेजी से बढ़ाने के लिए वह सभी आवश्यक परिवर्तन लाएगा। बीआरओ ‘”हम या तो रास्ता खोज लेंगे या एक बना लेगे’” के प्रेरक दर्शन के साथ नई ऊंचाइयों को छू रहा है।