Sambit Farooq

फारूक अब्दुल्ला के विवा’दित बोल पर भड़की BJP, संबित बोले- चीन में हीरो बनना चाहते हैं अब्दुल्ला

New Delhi: नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने रविवार को कहा कि चीन की मदद से जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में फिर से अनुच्छेद 370 (Article 370) को बहाल किया जाएगा। फारूक अब्दुल्ला के इस बयान से देश की सियासत में उबाल आ गया है।

BJP ने प्रेसवार्ता कर फारूक के बयान को देशद्रोही करार दिया है। बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा (Sambit Patra) ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ऐसा कहते हैं। यदि आप इतिहास में जाएंगे और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के हाल फिलहाल के बयानों को सुनेंगे तो आप पाएंगे कि ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

पात्रा (Sambit Patra) ने कहा कि यह वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने एक हफ्ते पहले कहा था कि प्रधानमंत्री कायर हैं, प्रधानमंत्री छुपा हुआ है, डरा हुआ है। असल में पाकिस्तान और चीन को लेकर जिस प्रकार की नरमी और भारत को लेकर जिस प्रकार की बेशर्मी इनके मन में है, ये बातें अपने आप में बहुत सारे सवाल खड़े करती है। दूसरे देशों की तारीफ और अपने देश, प्रधानमंत्री और आर्मी के लिए इस प्रकार के वचन कहां तक सही है, यह सब आप समझते हैं। देश की संप्रभुता पर सवाल उठाना, देश की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना क्या एक सांसद को शोभा देता है?

संबित पात्रा ने कहा कि 24 सितंबर को फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि आप अगर जम्मू-कश्मीर में जाकर लोगों से पूछेंगे कि क्या वह भारतीय हैं, तो लोग कहेंगे कि नहीं हम भारतीय नहीं है।

उसी स्टेटमेंट में उन्होंने ये भी कहा था कि अच्छा होगा अगर हम चीन के साथ मिल जाएं। एक तरह से फारूक अब्दुल्ला अपने इंटरव्यू में चीन की विस्तारवादी मानसिकता को न्यायोचित ठहराते हैं। वहीं दूसरी और एक देशद्रोही कमेंट करते हैं कि भविष्य में हमें अगर मौका मिला तो हम चीन के साथ मिलकर अनुच्छेद 370 वापस लाएंगे।

पढ़िए, फारूक के जिस बयान पर मचा है बवाल

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन के समर्थन से जम्मू-कश्मीर में फिर से अनुच्छेद 370 को लागू किया जाएगा। फारूक अब्दुल्ला कहते रहे हैं कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को दोबारा लागू करवाने और जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलवाने के लिए वह प्रतिबद्ध हैं।

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त 2019 से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की थी। फारूक अब्दुल्ला का कहना था कि कश्मीर में जो हालात हैं, उस पर बोलने के लिए हमने संसद भवन में समय मांगा, लेकिन हमको समय नहीं दिया गया है। देश की जनता को पता चले कि वास्तव में लोग कैसे रह रहे हैं और वहां की स्थिति क्या है? क्या वह बाकी मुल्क के साथ आगे बढ़े हैं या पीछे गए हैं?

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