Bijli Sankat In Delhi: जानिए बिजली संकट के बीच अरविंद केजरीवाल क्यों हैं परेशान, प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी

Bijli Sankat In Delhi: जानिए बिजली संकट के बीच अरविंद केजरीवाल क्यों हैं परेशान, प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी

हाइलाइट्स

  • दिल्ली के कई ऐसे प्लांट हैं, जिनके पास महज 1 ही दिन का कोयला बचा है
  • ऐसे में कोयले से बिजली बनाने के काम में दिक्कत हो रही है
  • सरकार को मजबूरी में पावर एक्सचेंज से महंगे दाम पर बिजली खरीदनी पड़ रही है ताकि आपका घर रोशन हो सके
  • दिल्ली के लोगों को जो बिजली महज 4-5 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिल रही है, सरकार उसे 20 रुपये प्रति यूनिट की दर से पावर एक्सचेंज से खरीद रही है

नई दिल्ली
Bijli Sankat In Delhi: इस वक्त देश कोयला संकट से जूझ रहा है। इसकी वजह से बहुत सारे पावर प्लांट के पास बिजली बनाने के लिए सिर्फ चंद दिनों का ही कोयला बचा है। दिल्ली के तो कई ऐसे प्लांट हैं, जिनके पास महज 1 ही दिन का कोयला बचा है। ऐसे में सरकार को मजबूरी में पावर एक्सचेंज से महंगे दाम पर बिजली खरीदनी पड़ रही है ताकि आपका घर रोशन हो सके। हालांकि, सरकार इसके लिए जनता से अतिरिक्त पैसे नहीं ले रही है, लेकिन ये कब तक चल पाएगा? यहां एक बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या दिल्ली में भारी बिजली कटौती होगी या सरकार अपनी जेब से खर्च कर के लोगों को बिजली देगी?

कितना खर्च हो रहा है सरकार का?

दिल्ली सरकार ने पीएम मोदी को एक लेटर लिखा है और मदद की अपील की है। उस लेटर में अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उन्हें पावर एक्सचेंज से 20 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदनी पड़ रही है। यानी दिल्ली के लोगों को जो बिजली महज 4-5 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिल रही है, सरकार उसे 20 रुपये प्रति यूनिट की दर से पावर एक्सचेंज से खरीदती है। केजरीवाल सरकार को बिजली की परेशानी इतनी अधिक हो रही है कि उन्हें गैस स्टेशनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। वहीं दिक्कत इस बात की है कि गैस स्टेशन के पास पर्याप्ट एपीएम गैस नहीं है, जिससे वह पूरी क्षमता के साथ चल सकें।

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सस्ती बिजली क्यों देगी सरकार?
अभी एक बड़ा सवाल ये उठ रहा है आखिर सरकार सस्ती बिजली क्यों देगी? बेशक बिजली का संकट है, लेकिन यूपी-उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में इन राज्यों में सरकार पर दबाव बनेगा कि वह महंगी बिजली खरीदकर भी जनता को सस्ती बिजली मुहैया कराए। हालांकि, दिल्ली में अभी चुनाव नहीं है, लेकिन अरविंद केजरीवाल विपक्षी पार्टियों को कोई मौका नहीं देना चाहती हैं, जिससे उन्हें राजनीतिक रूप से कोई नुकसान हो। अब ये देखना दिलचस्प रहेगा कि अगर ये बिजली संकट लंबा चलता है तो चुनावी राज्यों में सरकारें इससे कैसे निपटती हैं और मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के पत्र पर क्या जवाब देती है।

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