Babri Case: स्पेशल जज ने मुरली मनोहर जोशी से पूछे 1050 सवाल, बार-बार खुद को बताते रहे बेकसूर

New Delhi: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) ने बाबरी का विवादित ढांचा विध्वंस (Babri Demolition Case) करने के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत में ऑनलाइन कार्यवाही के दौरान कहा कि वे इस केस में पूरी तरह से निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक दुर्भावना से फंसाया गया है।

विशेष जज एसके यादव के सामने दिल्ली से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) ने अपने बयान में कहा कि उन्हें गलत साक्ष्य संकलित कर गलत रूप से केस में आरोपी बनाया गया है।

सुनवाई के दौरान जोशी (Murli Manohar Joshi) को सीबीआई के गवाहों द्वारा घटना से जुड़े विडियो दिखाए जाने पर पूर्व सांसद ने कहा कि विडियो को काट-छांट कर अदालत में दाखिल किया गया है। जब जज ने उन्हें बताया कि गवाह के मुताबिक 25 जून 1991 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कल्याण सिंह अयोध्या में विवादित स्थल पर गए थे और उन्होंने वहां मंदिर बनवाने की प्रतिबद्वता दोहराई थी तो जोशी ने कहा कि कल्याण का अयोध्या जाना सत्य है जबकि शेष कथन असत्य है।

कोर्ट ने पूछे एक हजार से ज्यादा सवाल

कोर्ट ने जोशी से ऑनलाइन 1,050 सवाल पूछे। उन्होंने हर सवाल का इनकार में जवाब दिया। कोर्ट पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी का बयान शुक्रवार को ऑनलाइन ही दर्ज करेगी।

जोशी के बयान के बाद अदालत ने अपने कार्यालय से कहा कि वह बयान की एक प्रति दिल्ली स्थित सीबीआई दफ्तर में भेजेगी। जज ने 26 जून 1991 को राम जन्म भूमि परिसर की वे तस्वीरें दिखाईं, जिसमें जोशी उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह तथा अन्य नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं।

इस बारे में पूछने पर जोशी ने कहा कि वह फोटो फर्जी है और उस तस्वीर का कोई भी नेगेटिव रेकॉर्ड पर दर्ज नहीं है। वह तस्वीर इस मामले की जांच के दौरान स्वप्नदास गुप्ता ने सीबीआई को सौंपी थी।

जज ने कई अखबारों का भी संदर्भ दिया, जिनमें रामजन्म भूमि के बारे में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और शिवसेना नेता बाला साहब ठाकरे के कथित बयान छपे थे। इस बारे में पूछे जाने पर जोशी ने कहा कि वे खबरें गलत हैं और राजनीतिक छवि धूमिल करने और विचारधारा में भेद होने के कारण उन खबरों को जांच का हिस्सा बनाया गया।

विशेष न्यायाधीश एसके यादव ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए एक गवाह के बयान का जिक्र करते हुए जोशी से कहा कि 25 जून 1991 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कल्याण सिंह अगले ही दिन अपने मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों के साथ अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि/बाबरी मस्जिद स्थल पर पहुंचे और ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर यहीं बनाएंगे’ का नारा लगाया था। अदालत द्वारा इस बारे में जोशी से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सच है कि कल्याण सिंह अयोध्या गए थे लेकिन बाकी की बातें गलत हैं।

स्पेशल कोर्ट रोजाना कर रही है कार्यवाही

जोशी का बयान उनके वकीलों विमल श्रीवास्तव, केके मिश्रा और रंजन की मौजूदगी में दर्ज किया गया। इसके अलावा सीबीआई की तरफ से ललित सिंह, आरके यादव और पी. चक्रवर्ती अदालत में मौजूद थे। विशेष सीबीआई अदालत बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत 32 आरोपियों के बयान दर्ज कर रही है। विशेष अदालत इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त तक पूरी करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में प्रकरण में रोजाना कार्यवाही कर रही है।

गौरतलब है कि अयोध्या में 6 दिसम्बर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढांचे को गिरा दिया था। उनकी आस्था थी कि किसी प्राचीन मंदिर को ढहाकर वह मस्जिद बनाई गई थी। आडवाणी और जोशी उस वक्त राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता थे।

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