कांग्रेस पर ही भारी पड़ रही राहुल गांधी की पार्ट टाइम पॉलिटिक्स, अपने ही क्षत्रपों से सीखें ‘युवराज’

Webvarta Desk: Assembly Elections: केरल दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) सोमवार को एक कॉलेज में छात्राओं को सेल्फ डिफेंस (Self Defense) के टिप्स दिए। कांग्रेस (Congress) के पूर्व अध्‍यक्ष से सेंट थेरेसा कॉलेज की स्‍टूडेंट्स ने पूछा कि उन्हें आइकीडो आता है, क्या वे उन्हें सेल्फ डिफेंस के कुछ टिप्स दे सकते हैं। इस पर राहुल ने मंच पर लड़कियों को बुलाकर सेल्फ डिफेंस के टिप्स दिए। साथ ही कहा कि कांग्रेस भी इसी तरह मजबूत है।

हालांकि चुनावी राज्यों (Assembly Elections) में कांग्रेस (Congress) की मजबूती दिख नहीं रही। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) असम में पार्टी के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। असम में कांग्रेस की वापसी के लिए बघेल ने पूरा जोर लगाया है। चुनावी मौसम में इन दो घटनाओं का जिक्र क्यों ?

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के केरल दौरे के दौरान ही प्रदेश कांग्रेस समिति में उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पार्टी नेता केसी रोसाकुट्टी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पांच चुनावी राज्यों में राहुल गांधी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह सवाल दबी जुबान पार्टी के भीतर से भी है। इन सभी राज्यों में बीजेपी की ओर से पूरी ताकत लगाई जा रही है।

पार्टी के सभी बड़े नेता चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं कांग्रेस के भीतर देखा जाए तो अलग- अलग राज्यों में वहां के नेता और दूसरे राज्यों के सीएम ने कमान संभाली है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे है कि राहुल गांधी इन चुनावों को लेकर कितने गंभीर हैं।

राहुल गांधी को लेकर सवाल अब भी वही

राहुल गांधी पर आरोप लगते रहे हैं कि वो पार्ट टाइम पॉलिटिक्स करते हैं, हालांकि यह आरोप विपक्ष की ओर से लगाए जाते हैं। इसके पीछे जो तर्क दिए जाते हैं उसमें चुनाव बाद राहुल गांधी का छुट्टियों के लिए कहीं निकल जाना, चुनावी माहौल में देर से एंट्री ये सब शामिल है।

हार- जीत अपनी जगह है लेकिन आप जीत के लिए कितना दम लगाते हैं यह काफी मायने रखता है। कार्यकर्ताओं का मनोबल तो अपने नेता को देखकर ही बढ़ा रहता है। चुनावी राज्यों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी की सक्रिय भूमिका का इंतजार है।

पहले चरण की वोटिंग में कुछ दिन बाकी है और कांग्रेस कई राज्यों में सीन से गायब है। पिछले कई मौकों पर देखा गया है कि चुनावी राज्यों में राहुल गांधी की एंट्री देर से हुई। कई बार यह हार- जीत का माहौल बन जाने के बाद हुई। साथ ही यह भी देखा गया है कि चुनाव बाद वो छुट्टी मनाने निकल जाते हैं।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर ही कई नेता ऐसे भी हैं जो ग्रास रूट पॉलिटिक्स पर फोकस करते रहे हैं। पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर, छ्त्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसके सबसे बढ़िया उदाहरण हैं।

ग्रास रूट पॉलिटिक्स के दम पर बनाई एक अलग पहचान

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर, छ्त्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस शासित राज्यों के ये वो सीएम हैं जिन्होंने ग्रास रूट पॉलिटिक्स के दम अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

कैप्टन अमरिंदर के लिए तो यह खासतौर पर कहा जाता है कि पंजाब में कांग्रेस सत्ता में है तो उसके पीछे बड़ी वजह कैप्टन हैं। इन नेताओं के बारे में कहा जाता है कि ये सभी ग्रास रूट लेवल पर जाकर लगातार पार्टी के लिए काम करते रहते हैं। यही वजह है कि जनता के बीच भी इनकी एक खास इमेज है।

असम में कांग्रेस की वापसी के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूरा जोर लगाया हुआ है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहते और उससे पहले भूपेश बघेल की जो मेहनत रही उसको लोगों ने देखा। यही वजह रही कि जिस राज्य में कांग्रेस की वापसी को सबसे कम यकीन था वहीं पार्टी ने अच्छी खासी जीत हासिल की।

अब उसी अनुभव का पूरा प्रयोग असम के चुनाव में वो कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इन नेताओं के लिए राहुल गांधी रोल मॉडल कैसे हो सकते हैं। हां ये जरूर है कि इन नेताओं से राहुल गांधी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

न उठे सवाल तो लगाना होगा फुल टाइम पॉलिटिक्स पर जोर

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते रहते हैं। विपक्षी दल के नेता के रूप में यह बात ठीक भी है लेकिन सिर्फ क्या इससे काम चल जाएगा। पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने के लिए क्या कुछ और करने की जरूरत नहीं है। राहुल गांधी को क्या अपने ही पार्टी के नेताओं से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है जिन्होंने ग्रास रूट पॉलिटिक्स पर जोर लगाया। यही वजह है कि उनके राज्यों में उनकी जड़ें अब तक मजबूत हैं।

अगले साल जीवन के 80 वर्ष पूरे करने जा रहे कैप्टन ने एक बार फिर से चुनावी मैदान में उतरने की बात की है। कैप्टन ने कहा है कि पंजाब को संकट की स्थिति से निकालने के लिए वह चुनाव मैदान में उतरेंगे। राहुल गांधी पर पार्ट टाइम पॉलिटिक्स के आरोप न लगे और फुल टाइम पॉलिटिक्स करनी है तो उन्हें अपने ही नेताओं से सीखने की क्या जरूरत नहीं।