स्पा सेंटर के मालिकों ने जताया विरोध, कहा- ‘यह तो जेंडर डिस्क्रिमिनेशन है, पूरी दुनिया में होता है क्रॉस जेंडर मसाज’

स्पा सेंटर के मालिकों ने जताया विरोध, कहा- ‘यह तो जेंडर डिस्क्रिमिनेशन है, पूरी दुनिया में होता है क्रॉस जेंडर मसाज’

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प्रियंका सिंह, नई दिल्ली
साउथ एमसीडी और ईस्ट एमसीडी ने अपने-अपने इलाकों में क्रॉस जेंडर मसाज पर रोक लगा दी है। लेकिन, एमसीडी के इस नए नियम का स्पा और मसाज सेंटर ओनर विरोध जता रहे हैं। स्पा ओनर्स का कहना है कि संविधान का आर्टिकल-14 समानता अधिकार देता है, लेकिन इस नियम से लैंगिक भेदभाव किया जा रहा है।

स्पा और मसाज सेंटर्स संचालकों का कहना है कि नई लाइसेंस पॉलिसी के अनुसार महिला स्पा-मसाज सेंटर में पुरुष नहीं जा सकता और पुरुष वाले में महिला नहीं जा सकती। ऐसे नियम बनाकर एमसीडी क्या करना चाहती है? इस कानून की जरूरत क्यों है, यह समझ नहीं आ रहा। रोहिणी में एक स्पा के ओनर हितेश का कहना था कि कोविड की मार तो स्पा मालिक झेल ही रहे हैं, अब नए लाइसेंस नियम से और दिक्कत सामने आने वाली है। पहले की तुलना में ग्राहक भी कम हैं, इस नए नियम से कई लोगों की नौकरी चली जाएगी। साथ ही, कई कारोबारी घर बैठ जाएंगे। अब कहां से हम अलग-अलग जेंडर के लिए जगह ढूंढें? पहले ही एक सेंटर चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि अभी इस मामले पर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

वहीं, द्वारका में एक स्पा के मालिक रवि कहते हैं कि दुनिया भर में क्रॉस-जेंडर मसाज की अनुमति है, तो भारत में क्यों नहीं? एक तरफ रात के 3 बजे तक बार खोलने की अनुमति देकर टूरिज्म को बढ़ाने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ हमारी इंडस्ट्री के साथ नाइंसाफी की जा रही है। देह व्यापार के नाम पर पूरी इंडस्ट्री को बर्बाद किया जा रहा है। जबकि, बॉलिवुड से लेकर कई इंडस्ट्री में इस तरह की तमाम घटनाएं होती हैं। कास्टिंग काउच और मी टू जैसे मुहिम के जरिये महिलाओं ने अपनी बात रखी थी। लेकिन, कभी अन्य इंडस्ट्री के साथ इस तरह की सख्ती तो अपनाई नहीं गई।

रवि का कहना था कि हाल ही में मिलिट्री में भी महिलाओं को नौकरी करने की अनुमति दी गई है जिससे कि जेंडर डिस्क्रिमिनेशन पर रोक लगाई जा सके। रही देह व्यापार की बात तो अब तक सबसे ज्यादा मामले बिना लाइसेंस वाले स्पा में देखे गए हैं, जोकि किसी भी नियम का पालन नहीं करते हैं। हमारा मानना है कि जो लोग गलत काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। पूरी इंडस्ट्री को टारगेट नहीं किया जाना चाहिए।

एक अन्य स्पा मालिक प्रिंस का कहना है कि हाई कोर्ट की आखिरी सुनवाई में दिल्ली सरकार के वकील ने कहा था कि क्रॉस-जेंडर मसाज को प्रतिबंधित करने वाले दिशानिर्देशों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि जब तक इस कानून को अधिसूचित नहीं किया जाएगा, तब यह कानून लागू नहीं हो सकता है। ना ही हम पर कोई कार्रवाई होगी। 9 नवंबर को हाई कोर्ट में फिर सुनवाई है। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही हम किसी नए नियम को मानेंगे।