डीयू कॉलेजों में दाखिले के लिए Philosophy (Hons) में बढ़ी स्‍टूडेंट्स की दिलचस्‍पी, आखिर क्‍या है वजह?

डीयू कॉलेजों में दाखिले के लिए Philosophy (Hons) में बढ़ी स्‍टूडेंट्स की दिलचस्‍पी, आखिर क्‍या है वजह?

नई दिल्ली
दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) से संबद्ध कॉलेजों में इस साल प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों ने दर्शनशास्त्र से बीए (ऑनर्स) करने में पिछले सालों की तुलना में ज्‍यादा दिलचस्‍पी दिखाई है। इसका नतीजा है कि इस विषय में पाठ्यक्रम की पेशकश करने वाले करीब आधे कॉलेजों में पहली लिस्‍ट से ही अनारक्षित कोटे की सीटें भर गई हैं। वहीं, गत सालों में ऐसा नहीं होता था।

कॉलेज के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने इस कोर्स के प्रति बढ़ी रुचि को स्वीकार किया है। उनका मानना है कि इसकी वजह दर्शनशास्त्र (Philosophy) में कम कट-ऑफ और कोविड-19 महामारी की वजह से पैदा अनिश्चितता की स्थिति है। इसके साथ ही संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा और कानून के क्षेत्र के लिए इस कोर्स को आधार माना जाना भी कारण है।

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डीयू के 15 कॉलेज दर्शनशास्त्र में बीए (ऑनर्स) पाठ्यक्रम की पेशकश करते हैं। इनमें से सात कॉलेजों की अनारक्षित श्रेणी की सीटें पहले ही कट-ऑफ में भर गई हैं। इनमें मिरिंडा हाउस जैसे प्रतिष्ठित महाविद्यालय ही शामिल नहीं हैं जिसमें कश्मीरी प्रवासी, अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सीटें भी भर चुकी हैं, बल्कि लक्ष्मी बाई कॉलेज और श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज भी हैं। प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज और लेडी श्रीराम कॉलेज की भी इस विषय में सीटें भर चुकी हैं।

मिरिंडा हाउस की प्रधानाचार्य डॉ. बिजयलक्ष्मी नंदा ने कहा, ‘राजनीति शास्त्र (ऑनर्स) जैसे विषयों की सीटें हाई परसेंटेज के साथ तेजी से भर जाती हैं। दर्शनशास्त्र में बीए (ऑनर्स) उन विद्यार्थियों की पसंद होता है जिनके अंक थोड़े कम यानी 95 से 98 फीसदी के बीच होते हैं। उन्हें इससे अच्छे कॉलेज मिल जाते हैं। इस विषय का चुनाव विद्यार्थी इसलिए भी करते हैं क्योंकि पहले इसकी पढ़ाई नहीं करने के बावजूद इसका चयन कर सकते हैं।’

मिरिंडा कॉलेज में दर्शनशास्त्र विषय में प्रवेश के लिए पहली सूची में 97.5 फीसदी का कट-ऑफ तय किया गया था। इस विषय में प्रवेश समाप्त हो गया है।

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दर्शनशास्त्र विभाग में प्रोफेसर डॉ. बालागणपति देवरेकोंडा ने बताया कि वो गत चार-पांच साल से इस विषय को लोकप्रिय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई महाविद्यालयों ने दर्शनशास्त्र के महत्व को रेखांकित करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इस पाठ्यक्रम की 60 फीसदी सीटें भर चुकी हैं। दूसरी कटऑफ सूची में भी सभी सीटें भरे जाने की संभावना है। महाविद्यालय पहली ही सूची के बाद इस विषय में अनारक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश बंद कर चुका है।

डीयू के मुताबिक, दयाल सिंह कॉलेज, गार्गी कॉलेज, हंसराज कॉलेज, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज, माता सुंदरी कॉलेज, रामनुजन कॉलेज और जाकिर हुसैन कॉलेज में अब भी दर्शनशास्त्र विषय में बीए (ऑनर्स) की सीटें बची हैं। इन्हें दूसरी कट-ऑफ सूची के जरिये भरा जाएगा।