कल बड़ी सूचना मिलेगी…. दिल्‍ली आकर सिद्धू ने गरमा दी सियासत, रावत की बात से लगने लगीं अटकलें

कल बड़ी सूचना मिलेगी…. दिल्‍ली आकर सिद्धू ने गरमा दी सियासत, रावत की बात से लगने लगीं अटकलें

photo 87023308

नई दिल्‍ली
के कांग्रेस ज्‍वाइन करने के बाद से पंजाब की राजनीति गरम रही है। उन्‍होंने पार्टी के कद्दावर नेता कैप्‍टन अमरिंदर सिंह तक का विकेट गिरा दिया। पंजाब कांग्रेस चीफ बनने के कुछ महीने के भीतर वह अमरिंदर का सीएम पद खा गए। फिर कांग्रेस ने पंजाब में चरणजीत सिंह चन्‍नी की तोजपोशी की। उनके साथ भी सिद्धू की अनबन हो गई। यह इस हद तक पहुंच गई कि क्रिकेटर से नेता बने सिद्धू ने पद से इस्‍तीफा तक दे दिया। यह और बात है कि कांग्रेस ने उनका इस्‍तीफा मंजूर नहीं किया।

सिद्धू ने गुरुवार को दिल्‍ली पहुंचकर फिर हलचल पैदा कर दी। वह दिल्‍ली में पंजाब कांग्रेस से जुड़े संगठनात्मक मामलों पर चर्चा करने के लिए पार्टी कार्यालय पहुंचे। मामला पंजाब के नए सीएम चन्‍नी के साथ ट्यूनिंग न हो पाने का ही है। इसके संकेत पंजाब के कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने दिए भी। उन्‍होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू और चरणजीत सिंह चन्नी ने कुछ मुद्दों पर बात की है। समाधान निकलेगा। कुछ चीजें हैं जिनमें समय लगता है।

सिद्धू बने रहेंगे पीसीसी चीफ
मीटिंग के बाद हरीश रावत ने बताया कि सिद्धू ने साफ तौर पर कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का आदेश उनको सर्वमान्य होगा। आदेश बिल्कुल साफ है कि वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी पंजाब के अध्यक्ष के रूप में अपना काम पूरी शक्ति से करें।

रावत ने शुक्रवार को इससे बड़ी सूचना विधिवत तरीके से देने के लिए कहा है। उन्‍होंने ने कहा, ‘कल आपको इससे बड़ी सूचना विधिवत तरीके से मिलेगी।’ कांग्रेस क्‍या ऐलान करने वाली है अब इसका इंतजार होने लगा है। यानी अभी पंजाब कांग्रेस में ऐक्‍शन बना रहने वाला है।

इस बैठक के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘मैंने पंजाब के प्रति, पंजाब कांग्रेस के प्रति जो भी मेरी चिंताएं थीं वो पार्टी हाईकमांड को बताई हैं। मुझे कांग्रेस अध्यक्ष पर, प्रियंका गांधी पर और राहुल गांधी पर पूरा भरोसा है। वो जो भी निर्णय लेंगे कांग्रेस और पंजाब के हित में होगा। उनके हर आदेश का पालन करूंगा।’

क्‍यों सिद्धू से पल्‍ला नहीं झाड़ पा रही कांग्रेस?
पिछले काफी समय से पंजाब कांग्रेस में लगातार खलबली रही है। इन सबके पीछे सिद्धू रहे हैं। यह और बात है कि पार्टी उनसे पल्‍ला नहीं झाड़ पा रही है। वो गुड़ का हसिया बन गए हैं जिसे पार्टी न लील पा रही है न उगल।

आखिर ऐसा क्‍या है कि सिद्धू को लेकर कांग्रेस बैकफुट में आ जाती है? कांग्रेस के लिए इतनी समस्‍याएं पैदा करने वाले सिद्धू को पार्टी बाहर का रास्‍ता क्‍यों नहीं दिखा पा रही है? इस तरह के सवाल उठने लाजिमी हैं। खासतौर से तब जब अगले साल पंजाब में चुनाव होने हैं। वहीं, इन सभी मसलों से पार्टी को नुकसान पहुंचने के आसार हैं।

सिद्धू और कैप्‍टन की जंग परवान चढ़ने से पहले तक जहां इस बात के पूरे आसार थे कि कांग्रेस राज्‍य में वापसी करेगी। वहीं, अब यही बात दावे से नहीं की जा सकती है। कांग्रेस सिद्धू के सामने इतनी लाचार क्‍यों दिख रही है?

जानकार कहते हैं कि इसके पीछे वजह है। पहली बात तो यह है कि उनका मास बेस बहुत ज्‍यादा है। यानी वो पॉपुलर लीडर हैं। विपक्षी दल उन पर तरह-तरह का आरोप भी इसलिए लगाते हैं ताकि सिद्धू कांग्रेस छोड़ दें। सिद्धू बार-बार कहते हैं कि उनका राजनीति में आने का मकसद ही पंजाब के मुद्दों को प्राथमिकता देना है। वह इसके साथ समझौता नहीं करेंगे। इसके लिए वो कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। लोगों को यह बात अपील करती है।