दिल्ली पुलिस ने लक्जरी कार चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश, 6 गिरफ्तार

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नई दिल्ली, रिज़वान खान (वेब वार्ता)। दिल्ली पुलिस के एंटी नार्कोटिक्स स्क्वाड ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लक्जरी कार चोरी करने वाले अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस ऑपरेशन का नेतृत्व ACP संजय सिंह के निर्देशन में इंस्पेक्टर अरुण कुमार ने किया। पुलिस ने हिंडन नहर रोड पर एक अपराधी को पीछा करके दबोचा, जिसके बाद पूछताछ के आधार पर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और बिहार के मोतिहारी से अन्य अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।

ऑपरेशन का विवरण: हिंडन नहर रोड पर शुरू हुई कार्रवाई

ईस्ट दिल्ली पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक संगठित गिरोह दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में लक्जरी कार चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा है। इस सूचना के आधार पर ACP संजय सिंह ने इंस्पेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। 27 अगस्त को पुलिस ने गाजीपुर इलाके में हिंडन नहर रोड पर एक संदिग्ध को चोरी की काली कार के साथ पकड़ा। इस अपराधी की पहचान कासिम हुसैन, जामिया नगर निवासी, के रूप में हुई, जो गिरोह का सरगना था। पूछताछ में कासिम ने अपने आपराधिक इतिहास और गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

अलीगढ़ और मोतिहारी तक पहुंची जांच

कासिम की निशानदेही पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ओखला विहार निवासी खुशनवाज और ताज मोहम्मद को गिरफ्तार किया। इसके बाद, बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) से अबुजर उर्फ सोनू को चोरी की एक कार के साथ दबोचा गया। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से दो रिसीवर, आमिर मालिक और आसिफ खान, को गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से एक और चोरी की कार बरामद हुई। इस तरह, पुलिस ने कुल छह अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया।

बरामद सामान: लक्जरी कारें, फर्जी नंबर प्लेट और मास्टर चाबियां

पुलिस ने इस ऑपरेशन में तीन लक्जरी कारें बरामद कीं, जिनकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इसके अलावा, फर्जी नंबर प्लेट, नकली रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RCs), और कार चोरी में इस्तेमाल होने वाली मास्टर चाबियां भी जब्त की गईं। जांच में पता चला कि यह गिरोह दिल्ली से लक्जरी कारें चुराकर मेरठ और अलीगढ़ के रास्ते पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचाता था। कारों की पहचान छिपाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट और नकली RCs का इस्तेमाल किया जाता था।

गिरोह का कार्यप्रणाली और संगठित अपराध

ईस्ट दिल्ली पुलिस के उपायुक्त अभिषेक धानिया ने बताया कि यह गिरोह अत्यंत संगठित तरीके से काम करता था। अपराधी मास्टर चाबियों की मदद से मिनटों में कारें चुरा लेते थे और फिर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। कासिम हुसैन पहले भी कई बार वाहन चोरी के मामलों में जेल जा चुका है, और इस बार उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों और उनके नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

पुलिस की सख्ती और भविष्य की योजनाएं

ACP संजय सिंह ने इस सफलता पर अपनी टीम की सराहना की और कहा कि दिल्ली में वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे ऑपरेशन लगातार जारी रहेंगे। इंस्पेक्टर अरुण कुमार ने बताया कि गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है। यह कार्रवाई न केवल दिल्ली, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी अपराध नियंत्रण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

समाज के लिए संदेश

यह ऑपरेशन दर्शाता है कि दिल्ली पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ कितनी सतर्क और सक्रिय है। नागरिकों से अपील है कि वे अपनी गाड़ियों की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करें, जैसे कि सुरक्षित पार्किंग और एंटी-थेफ्ट डिवाइस का उपयोग। यदि आपके पास वाहन चोरी से संबंधित कोई जानकारी है, तो तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

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