बिना चीरा लगाए आंख के कैंसर का इलाज: आर्मी हॉस्पिटल में 38 वर्षीय अधिकारी पर गामा नाइफ थेरेपी सफल

नई दिल्ली (वेब वार्ता)। नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यहां पहली बार गामा नाइफ रेडियोसर्जरी का उपयोग कर 38 वर्षीय एक सेवारत अधिकारी के ऑक्यूलर कोराइडल मेलानोमा (आंख के कैंसर) का सफल इलाज किया गया है। यह सशस्त्र बलों में पहला ऐसा मामला है, जो सर्जरी के बिना कैंसर को लक्षित करने वाली अत्याधुनिक तकनीक का प्रमाण है।

यह थेरेपी विट्रियो-रेटिना सर्जन, न्यूरोसर्जन और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट की टीम ने की, जो सशस्त्र बल मेडिकल सर्विसेज (AFMS) की कटिंग-एज तकनीक और नवाचार को दर्शाती है।

ऑक्यूलर कोराइडल मेलानोमा: आंख का दुर्लभ कैंसर

ऑक्यूलर कोराइडल मेलानोमा आंख के कोरॉइड (रेटिना के पीछे की परत) में होने वाला दुर्लभ कैंसर है, जो वयस्कों में प्राथमिक आंख कैंसर का 85% मामला है। यह धीमी गति से फैलता है, लेकिन उपचार में देरी से दृष्टि हानि या मेटास्टेसिस हो सकता है। पारंपरिक उपचार में सर्जरी, ब्रैकीथेरेपी या प्रोटॉन थेरेपी शामिल है, लेकिन गामा नाइफ एक गैर-आक्रामक विकल्प है।

गामा नाइफ थेरेपी: सर्जरी के बिना सटीक इलाज

गामा नाइफ रेडियोसर्जरी (GKRS) 192 गामा किरणों का उपयोग कर ट्यूमर को सटीक लक्षित करती है, बिना चीरा लगाए। यह स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी का रूप है, जो ब्रेन ट्यूमर के लिए जाना जाता है, लेकिन आंख के कैंसर के लिए नया है।

AFMS ने इसे सैनिकों के लिए सुलभ बनाया, जो सर्जरी के जोखिमों से बचाता है।

AFMS की उपलब्धि: सैनिकों के लिए कटिंग-एज हेल्थकेयर

रक्षा मंत्रालय ने कहा, “यह थेरेपी AFMS की नवाचार और सैनिकों को विश्व-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा देने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।” आर्मी हॉस्पिटल ने पहले भी दुर्लभ सर्जरी की हैं, जैसे 1.8 वर्षीय बच्ची का इम्प्लांट।

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