विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर मौसम स्टेशन स्थापित

नई दिल्ली/काठमांडू, 15 जून (वेबवार्ता)। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने पहली बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से महत्वपूर्ण और जैव विविधता से संबंधित जानकारी हासिल की है। जिससे पता चलेगा कि कैसे जलवायु परिवर्तन से माउंट एवरेस्ट प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिकों को मिली इस जानकारी से दक्षिण-पश्चिम मानसून के दीर्घकालिक प्रभाव की जांच करने में भी मदद मिलेगी।

Mount-Everest

नेशनल जियॉग्रफिक सोसाइटी (एनजीएस) के वैज्ञानिकों की टीम ने माउंट एवरेस्ट के बालकनी एरिया में मौसम स्टेशन स्थापित किया है। समुद्र तल से 27,658 फीट की ऊंचाई पर स्थापित यह स्टेशन पूरी तरह से ऑटोमेटेड है। इसका उद्देश्य पर्वतारोहियों, आम जनता और शोध करने वालों को मौसम की सटीक जानकारी और वहां की परिस्थितियों के बारे में बताना है। सभी मौसम स्टेशन अपने क्षेत्र के तापमान, आद्रता, हवा का दबाव, हवा की गति, और हवा की दिशा आदि की जानकारी देंगे।

मौसम स्टेशन से 1 अरब की आबादी को लाभ

इसके अलावा 4 और मौसम स्टेशन भी बनाए जा रहे हैं। साउथ कोल (7,945 m), फोरतसी (3,810 m), एवरेस्ट बेस कैंप (5,315 m) और कैंप II (6,464 m) पर भी मौसम स्टेशन बनाए हैं। सभी मौसम स्टेशन अपने क्षेत्र के तापमान, आद्रता, हवा का दबाव, हवा की गति, और हवा की दिशा आदि की जानकारी साझा करेंगे। जिससे करीब 1 अरब लोगों को फायदा मिलेगा।

Mount-Everest

मौसम के हर बदलाव को सूक्ष्मता से देखने में सक्षम

एनजीएस की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘बालकनी मौसम स्टेशन अपनी तरह का पहला ऐसा स्टेशन है जिसे 8,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया। इसके साथ ही यह पहला मौसम स्टेशन होगा जो प्रकृति में होनेवाले शुरुआती परिवर्तनों को भी महसूस कर सकने में सक्षम होगा और वक्त के साथ मौसम परिस्थितियों के बदलावों को सूक्ष्मता से देखा जा सकेगा।’

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती जाती है तो मौसम वैज्ञानिकों के लिए भी वहां की परिस्थितियों को समझ पाना मुश्किल है। ऊंचाई पर मौसम स्टेशनों के नहीं होने के कारण मौसम परिस्थितियों पर नजर रखना और उसके अनुसार पूर्वानुमान जारी करने में भी काफी मुश्किल होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई में कई पर्वतारोहियों की मौत हुई है। ऊंचाई पर स्थापित मौसम स्टेशनों की ओर से पूर्वानुमान जारी होते तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता था।

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