जापान में US के ऐंटी-मिसाइल सिस्टम से छटपटाए चीन ने दी चेतावनी- ‘खाली नहीं बैठेंगे’

New Delhi: सुपरपावर बनने का सपना देख रहा चीन दूसरे देशों की सैन्य ताकत और गतिविधियों को लेकर छटपटा रहा है। एक ओर भारत के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा पर तनाव के बीच वह रूस से अपील कर रहा है कि भारत को हथियार न दिए जाएं, तो दूसरी ओर अमेरिका (US China Military Conflict) को चेतावनी दे रहा है कि जापान जैसे देशों में अपनी सैन्य तैनाती न करे।

चीन ने यहां तक दावा किया है कि अगर अमेरिका (US China Military Conflict) इस दिशा में आगे बढ़ता है तो चीन भी हर जवाब के लिए तैयार रहेगा। दरअसल, हाल ही में जापान और अमेरिका ने साउथ चाइना सी में संयुक्त ड्रिल भी की है। हालांकि, जापान अमेरिका के ऐंटी-मिसाइल सिस्टम को तैनात करने से फिलहाल रोक चुका है।

जापान जैसे देश US के लिए न दें बलिदान’

चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू चियान ने अपने हालिया बयान में कहा है कि चीन अमेरिका के एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में मध्य-रेंज की मिसाइल तैनाती के बिलकुल खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इस दिशा में आगे बढ़ता है तो चीन खाली नहीं बैठेगा और जवाब देने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने जापान समेत दूसरे देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अपने क्षेत्र में अमेरिका को मिसाल तैनाती की इजाजत देकर उसके जियोपॉलिटिकल अजेंडा के लिए अपना बलिदान न दें।

जापान ने रोका था Aegis Ashore सिस्टम

बता दें कि जापान ने कुछ दिन पहले ही अमेरिका के अरबों डॉलर के मिसाइल डिफेंस सिस्टम Aegis Ashore को नहीं लेने का फैसला किया था। रक्षा मंत्री तारो कोनो ने बताया था कि उसके डिजाइन को सही करने की जरूरत थी क्योंकि रॉकेट के मलबे से आसपास के लोगों को खतरा हो सकता था। यह काम काफी महंगा, बड़ा और गैरजरूरी समझकर Aegis का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया गया। जापान के अकीता और यमागुची में तैनात किए जाने वाले Aegis की मदद से बैलिस्टिक मिसाइल्स पर नजर रखी जा सकती थी।

US ने जापान को डिफेंस का मॉडल पार्टनर बताया

एशिया टाइम्स ने अमेरिका में इंडो-पैसिफिक सिक्यॉरिटी अफेयर्स के कार्यकारी सहायक रक्षा सचिव डिवेड हेल्वी के हवाले से लिखा है, ‘जापान की सरकार कुछ टेक्निकल बातों की समीक्षा कर रही है और हम सरकार से संपर्क जारी रखना चाहते हैं और आगे सही दिशा में काम करना चाहते हैं ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि हम उनके साथ मिसाइल डिफेंस पर काम करते रहें।’ हेल्वी ने कहा कि जापान अमेरिका के लिए मिसाइल डिफेंस में एक मॉडल पार्टनर है।

‘कोई संकट हुआ, तो नतीजे भयावह होंगे’

वहीं, चीन के एक सीनियर अधिकारी ने चिंता जताई है कि अमेरिका की मिलिट्री एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में तैनाती कर रही है जिससे चीन की नेवी के साथ टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है। अमेरिका साउथ चाइना सी में अमेरिका नैविगेशन की आजादी का हवाला देकर ऑपरेशन जारी रखे है जहां चीन और उसके पड़ोसी देश अपना दावा ठोंकते हैं। इससे नाराज चीन अमेरिकी जहाजों को खदेड़ा करता है।

नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ साउथ चाइना सी स्टडीज के प्रेजिडेंट वू शिचुन का कहना है कि अगर कोई संकट पैदा होता है तो द्विपक्षीय संबंधों पर नतीजे भयावह होंगे। वू ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका ने 3 लाख 75 हजार सैनिक और अपने 60% जंगी जहाज इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तैनात कर रहे हैं। 3 अमरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर भी क्षेत्र में तैनात हैं।

ट्रंप के कार्यकाल में सक्रिय हुआ अमेरिका

खास बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में फ्रीडम ऑफ नैविगेशन के लिए सिर्फ 4 बार अमेरिका ने ऑपरेशन्स किए लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से 22 बार ऐसा किया जा चुका है। रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि दोनों देशों की सेनाओं को संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि गलतफहमी से बचा जा सके। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सैन्य संबंध खराब होने से खतरानक घटना, विवाद या संकट की आशंका बढ़ सकती है।

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