US Deploys Aircraft Carrier

साउथ चाइना सी में चीन की दादागिरी, तो अमेरिका ने तैनात किए 3 एयरक्राफ्ट कैरियर

New Delhi: दक्षिण चीन सागर (south china sea) में चीनी ड्रैगन की बढ़ती दादागिरी पर नकेल कसने के लिए सुपर पावर अमेरिका ने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर (US Deploys Aircraft Carriers) हिंद और प्रशांत महासागर में तैनात किए हैं।

करीब तीन साल में ऐसा पहली बार है जब इस क्षेत्र में तीन अमेरिकी विमानवाहक (US Deploys Aircraft Carriers) पोत गश्त कर रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका नौसेना के क्रूजर, विध्‍वंसक पोत, लड़ाकू विमान और निगरानी ड्रोन विमान भी लगातार गश्‍त लगा रहे हैं।

अमेरिकी नौसेना का जोरदार शक्ति प्रदर्शन

विश्‍लेषकों का मानना है कि यह अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव से प्रभावित हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के बड़े शक्ति प्रदर्शन को दर्शाता है। साथ ही इस बात का संकेत भी है कि नौसेना कोरोना वायरस के प्रकोप के बुरे दिनों से उबर गयी है।

नौसेना के क्रूजर, विध्वंसक पोतों, लड़ाकू विमानों और अन्य विमानों के साथ असामान्य तरीके से तीन विमानवाहक पोत ऐसे समय में एक साथ नजर आए हैं जब अमेरिका ने कोरोना वायरस से निपटने के चीन के तौर तरीकों की आलोचना तेज कर दी है।

‘चीन को दिया संदेश, हमें कमजोर न समझे’

अमेरिका ने हांगकांग पर व्यापक नियंत्रण करने के कदमों और दक्षिण चीन सागर में मानव निर्मित द्वीपों पर सैन्य मौजूदगी के चीन के अभियान की भी आलोचना की है।

सेंटर फॉर स्ट्रटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में चाइना पॉवर प्रॉजेक्ट के निदेशक, बोनी ग्लेजर ने कहा, ‘चीनी लेखों में कुछ इस तरह के संकेत मिले हैं कि अमेरिका कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित है, उसकी सैन्य तैयारियां कम हैं, शायद इसलिए अमेरिका ने चीन को यह संदेश देने के लिए प्रयास किया है कि उसे गलत आकलन नहीं करना चाहिए।’

कोरोना को लेकर ट्रंप के निशाने पर चीन

ग्‍लेजर ने कहा, ‘चीनी पक्ष इसे निश्चित रूप से अमेरिका की ओर से उकसावे वाली कार्रवाई तथा क्षेत्र में अमेरिका के अस्थिरता के स्रोत होने के प्रमाण के तौर पर प्रदर्शित करेगा।’

अमेरिका में कोरोना वायरस के प्रकोप से निपटने के तरीकों को लेकर खुद आलोचनाओं का सामना कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में चीन को लगातार आड़े हाथ लिया है। वह मानते हैं कि चीन ने कोविड-19 के खतरे के बारे में दुनिया को सही से आगाह नहीं किया।

तीन विमानवाहक पोतों का दिखना असामान्य

ऐसे में क्षेत्र में तीन विमानवाहक हमलावर पोतों का एक साथ दिखना इसलिए भी असामान्य है, क्योंकि इनकी संख्या सीमित है। इसके अलावा ये अक्सर मरम्मत में, बंदरगाहों के निरीक्षण में, प्रशिक्षण में लगे होते हैं या दुनिया के दूसरे हिस्सों में तैनात होते हैं।

हालांकि अमेरिकी नौसेना के कमांडरों ने इस सप्ताह कहा था कि वे खासकर चीन के साथ इस बड़ी स्पर्धा के दौर में समय का लाभ उठा पा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में चीन को सुरक्षा संबंधी प्रमुख चिंता बताया गया है, वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के नेता और अधिक संसाधनों तथा सैन्य परिसपंत्तियों को क्षेत्र में पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।

दक्षिण चीन सागर में सैन्‍य अड्डे बना रहा चीन

हिंद-प्रशांत कमान में परिचालन निदेशक, रियर एडमिरल स्टीफन कोहलर ने कहा, ‘मजबूत तरीके से मौजूदगी की क्षमता स्पर्धा का ही हिस्सा है। और जैसा कि मैं यहां अपने साथियों से हमेशा कहता हूं, जब आप स्पर्धा में हैं तो आपको जीतने के लिए मौजूद रहना होगा।’

उन्होंने कहा, ‘विमानवाहक पोत और हमलावर समूह अमेरिकी नौसैनिक शक्ति के प्रतीक हैं। हमें इस समय तीन विमानवाहक पोत मिल गये, इससे मैं बहुत उत्साहित हूं।’

कोहलर ने हवाई में अपने दफ्तर से बातचीत में कहा कि चीन धीरे-धीरे और लगातार दक्षिण चीन सागर में सैन्य अड्डे बना रहा है, वहां मिसाइलें और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तैनात कर रहा है। वहीं, अमेरिका और अन्य सहयोगी तथा साझेदारों ने क्षेत्र में परिचालन बढ़ा दिये हैं। कोहलर ने कहा कि चीन ने हाल ही में स्प्रेटली द्वीप समूह में फियरी क्रॉस रीफ पर विमान तैनात किया था।

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