नेपाल के विवादित नक्शे का विरोध करने वाली सांसद सरिता गिरि को पार्टी ने दिखाया बाहर का रास्ता

New Delhi: भारत से सीमा विवाद के बाद जारी किए गए नक्शे का विरोध करने पर नेपाल की जनता समाजबादी पार्टी (JSP) ने अपनी नेता सरिता गिरि (Sarita Giri) को हटाने का फैसला किया है।

सरिता (Sarita Giri) ने पार्टी विप का उल्लंघन करते हुए संसद में नक्शे को पारित करने के प्रस्ताव का विरोध किया था और एक दूसरा प्रस्ताव पेश कर दिया था। इसके साथ ही पार्टी ने उन्हें पार्टी के जनरल सदस्य के पद से भी हटा दिया है। पार्टी के नेता मोहम्मद इश्तियाक राय ने यह जानकारी दी है। भारत के साथ हुए सीमा विवाद के बाद बातचीत से पहले ही नेपाल ने नया नक्शा जारी किया था।

गिरि ने कहा था, नेपाल के पास नहीं सबूत

नेपाल के राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शे में संवैधानिक संशोधन के लिए सदन में प्रस्ताव दिया गया था जिसे 18 जून को पारित कर दिया गया था। सरिता (Sarita Giri) की पार्टी नए नक्शे के समर्थन में थी जबकि गिरि ने अलग से प्रस्ताव दिया था कि पुराने नक्शे को ही मान्य रखा जाए। उनका मानना था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल का हिस्सा हैं। हालांकि, गिरि के इस प्रस्ताव को सदन के स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा ने खारिज कर दिया।

जांच के बाद किया गया फैसला

आलोचनाओं के बीच JSP ने तीन सदस्यों की टास्क फोर्स बनाकर गिरि के इस कदम की जांच का फैसला किया। इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें सदन की सदस्यता और पार्टी से हटाने की सिफारिश की। जब गिरि ने सदन में अलग से प्रस्ताव दिया था, तब भी पार्टी ने कहा था, ‘सरिता गिरी अपना संशोधन वापस लें नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर सरिता संशोधन प्रस्‍ताव को वापस नहीं लेंगी तो वह न केवल अपना सांसद का दर्जा खो देंगी, बल्कि वह पार्टी की सदस्‍य भी नहीं रहेंगी।’

‘महिला का अपमान किया गया’

प्रतिनिधि सभा में जब शनिवार को इस विधेयक पर चर्चा हुई त‍ब सरिता गिरी को बोलने तक नहीं दिया गया था। सदन से निकलने के बाद उन्‍होंने कहा था कि संसद के अंदर एक महिला का अपमान किया गया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई। सांसद सरिता गिरी ने केपी शर्मा ओली सरकार को चेतावनी दी थी कि नेपाल में जो बर्ताव उनके साथ हो रहा है, उससे देश की हालत बांग्‍लादेश जैसी हो सकती है। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं के अपमान के कारण ही बांग्‍लादेश का गठन हुआ था।

नेपाल ने जारी किया नक्शा

बता दें कि भारत के लिपुलेख से होकर मानसरोवर लिंक बनाने के बाद से नेपाल ने सीमा विवाद बढ़ा दिया था। नेपाल का दावा था कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र हैं। इस विवाद पर बातचीत से पहले ही नेपाल की सरकार ने पहले नया नक्शा जारी कर दिया और फिर संसद में संवैधानिक संशोधन पेश कर दिया।

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