Donald Trump

अमेरिका को बुरा-भला कह रहे थे कासिम सुलेमानी, कब तक बर्दाश्त करता, मार डाला : डॉनल्ड ट्रंप

Washington : अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के कुद्स फोर्स के जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या की नई वजह बताई है। रिपब्लिकन पार्टी को दान देनेवालों के एक समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के टॉप जनरल हमले से पहले ‘देश (अमेरिका) के बारे में बड़ी खराब बातें कर रहे थे।’ इसी वजह से उन्हें मारने का आदेश देना पड़ा। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन ने ट्रंप की पार्टी के लिए फंड जुटाने वाले एक शख्स के बयान के हवाले से कहा कि ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, ‘हम उन्हें और कितना बर्दाश्त करते?’

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ट्रंप ने दिया सुलेमानी पर हमले का विस्तृत ब्योरा

ट्रंप ने वॉइट हाउस सिचुएशन रूम से सुलेमानी पर हमले का पूरा दृश्य देखा था। उन्होंने फ्लोरिडा के पाम बिच पर एक क्लब में आयोजित समारोह में उस दृश्य का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि हमें सैन्य अधिकारी बता रहे थे कि वे (सुलेमानी और अन्य) साथ हैं। सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप से कहा, ‘सर, उनके पास 2 मिनट 11 सेकंड हैं। कोई भावना नहीं। 2 मिनट 11 सेकंड की जिंदगी बची है, सर। वे कार में हैं, वे हथियारों से लैस वाहन में हैं। सर, उनकी करीब 1 मिनट की जिंदगी बची है। 30 सेकंड, दस, 9, 8…’ ट्रंप ने कहा, ‘और अचानक बड़ाम।’ अधिकारियों ने बताया, ‘वे गए, सर।’ ट्रंप ने बताया, ‘मैंने टोकते हुए पूछा वह (सुलेमानी) कहां हैं?’

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सुलेमानी की हत्या पर ट्रंप की आलोचना

ट्रंप ने जनरल सुलेमानी पर MQ-9 रीपर ड्रोन से हमले का इतना विस्तृत ब्योरा पहली बार दिया। ट्रंप ने इस बयान से एक दिन पहले ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई को चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका के लिए शब्दों का चयन करते वक्त सावधानी बरतें। ट्रंप के मुताबिक, खामनेई का शुक्रवार का भाषण सही नहीं था जिसमें उन्होंने अमेरिका को दुष्ट बताते हुए यूके, फ्रांस और जर्मनी को उसका प्यादा बताया। सुलेमानी की हत्या का आदेश देने पर ट्रंप की जबर्दस्त आलोचना हुई थी। कुछ अमेरिकी सांसदों ने कहा कि राष्ट्रपति ने ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया कि सुलेमानी अमेरिका के लिए खतरा कैसे थे।

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3 जनवरी को हुआ था ड्रोन हमला

ईरानी रिवॉल्युशनरी गार्ड के कुद्स फोर्स के कमांडर को अमेरिका ने 3 जनवरी ड्रोन हमले में मारा था जब वह अपने काफिले के साथ बगदाद में थे। ईरान ने इसका जवाब इराक के अल-असद और इबरिल स्थित दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर 22 मिसाइलें दाग कर दिया। उसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ने की आशंका गहरी हो गई थी। हालांकि, बाद में अमेरिका ने संयम दिखाया और अब यह आशंका कमजोर हो गई।

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