इस्लामाबाद | वेब वार्ता
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद ने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। 11 अक्टूबर 2025 से तोरखम बॉर्डर बंद होने के बाद व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है, और पाकिस्तान में रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं। खासकर टमाटर और सेब जैसे आयातित फलों-सब्जियों की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं। काबुल के पाक-अफगान चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख खान जान अलोकोजाय के अनुसार, इस विवाद से दोनों देशों को प्रतिदिन 10 लाख डॉलर का नुकसान हो रहा है। पाकिस्तान में टमाटर की कीमत 120 रुपये/किलो से बढ़कर 600 रुपये/किलो हो गई है, जो आम परिवारों के लिए संकट का कारण बनी है। आइए, इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं—कारण, प्रभाव, आंकड़े, और संभावित समाधान।
पाक-अफगान सीमा विवाद: कारण और तनाव का इतिहास
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव नया नहीं है। 1947 में भारत के विभाजन के बाद से ही ‘ड्यूरंड लाइन’ (सीमा रेखा) विवाद चला आ रहा है। लेकिन हालिया तनाव 2021 में तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद से तेज हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान TTP जैसे आतंकवादी गुटों को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान के खिलाफ हमले करते हैं। 11 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर ड्रोन हमले किए, जिसमें 8 अफगान सैनिक मारे गए। अफगानिस्तान ने इसका जवाब सीमा पर गोलाबारी से दिया, जिससे झड़पें भड़कीं।
- पाकिस्तान का दावा: “अफगान धरती से आतंकवादी हमले हो रहे हैं। तालिबान को कार्रवाई करनी चाहिए।”
- अफगानिस्तान का खंडन: “पाकिस्तान झूठ बोल रहा है। हम शांति चाहते हैं।”
- मध्यस्थता: कतर और तुर्की ने 20 अक्टूबर को युद्धविराम कराया, लेकिन व्यापार अभी भी बंद है। अगली वार्ता 25 अक्टूबर को इस्तांबुल में होगी।
यह विवाद 2021 के बाद सबसे घातक है। ACLED रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 50+ सीमा झड़पें हुईं, जो 2024 के 30 से दोगुनी हैं।
व्यापार पर नुकसान: प्रतिदिन 10 लाख डॉलर का घाटा
अफगानिस्तान-पाकिस्तान व्यापार 2024 में 20 अशरफिया था, लेकिन सीमा बंद होने से यह रुक गया। अलोकोजाय ने कहा, “हर दिन 500 कंटेनर सब्जियां, फल, खनिज, दवाइयां, गेहूं, चावल, चीनी, मांस, डेयरी उत्पाद अटके हैं। दैनिक नुकसान 10 लाख डॉलर।”
- अटके कंटेनर: तोरखम बॉर्डर पर 5,000 कंटेनर अटके। इनमें 70% सब्जियां-फल।
- पाकिस्तान का आयात: 70% टमाटर, 50% सेब-अंगूर अफगानिस्तान से।
- अफगानिस्तान का नुकसान: निर्यात बंद होने से किसानों को 30% फसल बर्बाद हुई।
पाकिस्तान का चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा, “यह विवाद अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर रहा है। तुरंत बातचीत जरूरी।”
टमाटर-सेब के दाम आसमान पर: आम परिवार पर बोझ
पाकिस्तान में खाने-पीने की चीजों पर सबसे बुरा असर पड़ा है। टमाटर 120 रुपये/किलो से 600 रुपये/किलो हो गया। सेब और अंगूर भी 2-3 गुना महंगे।
शहर-वार कीमतें (अक्टूबर 2025)
| शहर | टमाटर (₹/किलो) | सेब (₹/किलो) | अंगूर (₹/किलो) |
|---|---|---|---|
| लाहौर | 500 | 450 | 400 |
| कराची | 550 | 500 | 450 |
| इस्लामाबाद | 600 | 550 | 500 |
| पेशावर | 650 | 600 | 550 |
अलोकोजाय ने कहा, “पाकिस्तान में 500 कंटेनर सब्जियां रोज आती थीं। अब रुक गईं।”
अफगानिस्तान का दर्द: 30% फसल बर्बाद
अफगानिस्तान में 30% फसल बर्बाद हुई। काबुल ने कहा, “पाकिस्तान का हमला व्यापार को प्रभावित कर रहा है।” किसानों ने कहा, “हमारी सब्जियां सड़ रही हैं।”
भविष्य की राह: 25 अक्टूबर को वार्ता
25 अक्टूबर को इस्तांबुल में कतर-तुर्की मध्यस्थता में वार्ता होगी। उम्मीद है कि सीमा खुलेगी। पाकिस्तान ने कहा, “शांति के लिए TTP पर कार्रवाई जरूरी।”
यह विवाद दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है।








