Lost At Sea : बीच समंदर बोट में आई खराबी, 29 दिनों तक भटकते रहे 2 दोस्त, आखिरकार ऐसे बची जान?

Lost At Sea : बीच समंदर बोट में आई खराबी, 29 दिनों तक भटकते रहे 2 दोस्त, आखिरकार ऐसे बची जान?

हाइलाइट्स

  • प्रशांत महासागर में आए तूफान से खराब हुआ था बोट का जीपीएस
  • सोलोमन द्वीपसमूह के पास गहरे समुद्र में भटके दो दोस्त
  • नाव पर रखे संतरे और बारिश के पानी से बचाई जान

सोलोमन
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से कुछ सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है सोलोमन द्वीपसमूह। छोटे-छोटे टापूओं और हरी-भरी वादियों वाले इस देश में हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट भी आते हैं। यहां की अछूती समुद्री वाइल्ड लाइफ को देखने का क्रेज लोगों को बरबस खींच लाता है। जमीन की कमी के कारण लोग दूर-दूर तक फैले द्वीपों पर अपना आसरा बनाए हुए हैं। ऐसे में एक द्वीप से दूसरे द्वीप तक जाने के लिए ये मोटरबोट का इस्तेमाल करते हैं। पर, पिछले महीने दो दोस्तों को ऐसी ही एक द्वीप पर जाने के लिए मोटरबोट का इस्तेमाल करना महंगा पड़ गया।

बोट का ट्रैकर खराब होने से भटके रास्ता
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे ही एक मोटर बोट के ट्रैकर के बंद होने के कारण दो दोस्त समुद्र में 29 दिन तक भटकते रहे। बड़ी बात यह थी कि चंद घंटों में खत्म होने वाले के इस सफर के लिए उन्होंने अपने पास संतरे की एक बोरी के अलावा कोई दूसरा खाना या पानी तक नहीं रखा था। इस दौरान उनका ट्रैकर काम करना बंद कर दिया और वे प्रशांत महासागर के अथाह पानी में भटकने लगे। यात्रा शुरू करने के ठीक 29 दिन बाद उन्हें एक मछुआरे ने देखा और वहां से सुरक्षित निकालकर वापस घर लाया।

अस्तित्व की लड़ाई लड़ बचाई जान
रिपोर्ट में बताया गया है कि लिवे नानजिकाना अपने दोस्त जूनियर कोलोनी के साथ 3 सितंबर को मोनो द्वीप से 60-हॉर्सपावर की एक छोटी मोटरबोट पर न्यू जॉर्जिया द्वीप के लिए निकले थे। लेकिन जब उनके ट्रैकर ने काम करना बंद कर दिया तो उनका छोटा सा रोमांच अस्तित्व की लड़ाई में बदल गया। ये दोनों दोस्त सोलोमन द्वीप के नाविक हैं। इसके बावजूद जब ट्रैकर ने काम करना बंद कर दिया तो वे चारों तरफ फैले पानी में अपना रास्ता भूल गए। उनके पास खाने के लिए सिर्फ संतरे की एक बोरी थी।

बारिश और तूफान ने जीपीएस को किया तबाह
इन दोनों लोगों ने बताया कि उन्होंने पहले भी समुद्री यात्राएं की हैं। लेकिन, इस बार भारी बारिश और हवा ने उनके जहाज को झकझोर कर रख दिया। इससे उनके बोट का जीपीएस ट्रैकर खराब हो गया। नतीजन वे 29 दिनों तक पानी में तैरते रहे और मोनो द्वीप से 400 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में पहुंच गए।

ऐसे जिंदा बचे दोनों नाविक
इस दौरान इन दोनों नाविकों ने संतरे, समुद्र से इकट्ठा किए गए नारियल और एक छोटे से कैनवास के जरिए बचाए गए बारिश के पानी का इस्तेमाल किया। सौभाग्य से उन्हें 2 अक्टूबर को एक मछुआरे ने देख लिया और पोमियो शहर लेकर आया। ये दोनों नाविक इतने कमजोर हो गए थे कि इन्हें नाव से घर तक सहारा देकर लाना पड़ा। घर वापसी के बाद नंजिकाना ने कहा, “मुझे नहीं पता था कि जब मैं वहां था तो क्या चल रहा था। मैंने कोविड या कुछ और के बारे में नहीं सुना। मैं घर वापस जाने के लिए उत्सुक हूं, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब कुछ से एक अच्छा ब्रेक था।

Boat

सांकेतिक तस्वीर