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नेपाल में सेना, RAW चीफ, श्रीलंका में अजित डोभाल, बौखलाया चीन बोला- छोटे देशों को डरा रहा भारत

New Delhi: पिछले कुछ हफ्तों में भारत के टॉप अधिकारी नेपाल और श्रीलंका के दौरों (Indian Officials visit Nepal and Sri Lanka) पर गए हैं। सीमा विवाद के बीच नेपाल पहुंचे भारतीय सेना के चीफ जनरल एमएम नरवणे, भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला और RAW चीफ सामंत गोयल के दौरों के बाद चीन ने भी ऐलान किया कि उसके रक्षा मंत्री वेई फेंघे भी नेपाल जाएंगे।

वहीं, भारत के सुरक्षा सलाहकर अजित डोभाल भी तीनपक्षीय वार्ता के लिए श्रीलंका पहुंचे (Indian Officials visit Nepal and Sri Lanka) हैं। इन गतिविधियों पर चीन ने निगाहें टिका रखी हैं और दावा कर रहा है कि भारत चीन के साथ नेपाल और श्रीलंका की बढ़ती नजदीकी से परेशान होकर सक्रियता दिखा रहा है।

चीन के प्रॉपगैंडा अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीनी रक्षा मंत्री के नेपाल दौरे के ऐलान के बाद से भारत में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि इसके मायने क्या हैं। चीन और नेपाल के बीच सैन्य सहयोग को आम बात करार देते हुए ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि इसके बावजूद इनके संबंधों को स्पॉटलाइट में रखा जाता है। अखबार ने खुद पर लगे विस्तारवाद के आरोपों का खंडन करते हुए यहां तक आरोप लगा डाला कि भारत छोटे देशों को डरा रहा है।

भारत को चीन-नेपाल संबंधों से परेशानी

भारत के सेना चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे तीन दिन के दौरे पर नेपाल गए थे। चीन का कहना है कि नेपाली पक्ष से दबाव कम करने के लिए यह दौरा किया गया था। उसका दावा है कि नई दिल्ली को चीन-नेपाल के बीच रक्षा सहयोग से परेशानी हो रही है क्योंकि नेपाल की ज्यादातर हथियारों की डील भारत से होती थीं। 1980 के बाद से यह जगह पेइचिंग ने ले ली तो दिल्ली को गुस्सा आ गया।

अखबार का कहना है कि सैन्य सहयोग में विकास चीन और नेपाल के लिए अहम है। नेपाल की भूगोलिक स्थिति की वजह से वहां जाकर बसने वाले तिब्बत से निर्वासित अलगगाववादियों से चीनी सीमाओं को सुरक्षा दी जा सकती है। इसके जरिए तिब्बत ऑटोनॉमस क्षेत्र में स्थिरता लाई जा सकती है। वहीं, चीन के साथ सैन्य सहयोग से नेपाल में भी स्थिरता रह सकती है।

भारत ने बाद में तय किए दौरे

अखबार ने आरोप लगाया है कि नेपाल ने भारत पर सैन्य मुद्दों और दक्षिणी क्षेत्रों के लिए भारत का सहारा किया है। नेपाल के सैनिकों को भारत में ट्रेनिंग मिलती है और भारत नेपाल के घरेलू मुद्दों में दखल भी देता रहा है। चीन का आरोप है कि ये सभी फैक्टर नेपाल की राष्ट्रीय स्थिरता के लिए अनुकूल नहीं रहे हैं। वेई का दौरा हर्षवर्धन श्रृंगला और नरावे के दौरे के बाद किया जाना इत्तेफाक बताते हुए ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया गया है कि ऐसे दौरे काफी पहले से तय किए जाते हैं। यहां तक दावा कर दिया कि भारत ने चीन के दौरे के बारे में जानकारी मिलने के बाद पहले ही अपने अधिकारी नेपाल भेज दिए।

श्रीलंका में चीन की भूमिका से परेशान भारत

दूसरी ओर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के श्रीलंका दौरे पर भी ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर आरोप लगाया है। अखबार का कहना है कि भारत को चीन का श्रीलंका से सहयोग परेशान करता है और वह चाहता है कि श्रीलंका को रोका जा सके। अखबार ने आरोप लगाया कि भारत चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को रोकना चाहता है ताकि दक्षिण एशिया में उसकी स्थिति मजबूत हो।

अखबार के मुताबिक डिप्लोमैट मैगजीन ने शनिवार को कहा कि भले ही श्रीलंका ‘भारत पहले’ की नीति के प्रति समर्पण का दावा करता हो, उसने साफ किया है कि वह दूसरी बड़ी शक्तियों के साथ आर्थिक व्यवहार के लिए काम करेगा। उसने लिखा है कि चीन और श्रीलंका एक-दूसरे के अच्छे दोस्त हैं और दोनों के आर्थिक सहयोग के लिए BRI फ्रेमवर्क गहराएगा।

‘कर्ज के जाल में नहीं फंसा रहा चीन’

ग्लोबल टाइम्स का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ मलक्का और पारस की खाड़ी को जोड़ता है। श्रीलंका इंडोपैसिफिक क्षेत्र में आता है जिस पर दुनियाभर की निगाहें रही हैं। श्रीलंका ने इस आरोप से इनकार किया है कि चीन कर्ज के जाल में देशों को फंसा रहा है। वहीं, अखबार ने आरोप लगाया है कि अमेरिका के साथ मिलकर भारत जियोपॉलिटिकल दबाव बढ़ा रहा है और इसका श्रीलंका के साथ उसके संबंधों पर असर हो सकता है।

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