विशेषज्ञों ने भी माना, चीन का सबसे जहरीला हथियार है ‘ग्लोबल टाइम्‍स’

New Delhi: Global Times China most toxic Weapon: भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन का सबसे जहरीला हथियार ग्लोबल टाइम्‍स रहा। चीन सरकार के प्रोपेगैंडा अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने भारत के खिलाफ कई जहरीले लेख लिखे।

ग्लोबल टाइम्‍स (Global Times China most toxic Weapon) ने न केवल चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के समर्थन में लेख ल‍िखे बल्कि चीनी सेना के युद्धाभ्‍यास के वीडियो भी जारी किए। साथ ही ग्लोबल टाइम्‍स ने कई मौकों पर भारत को धमकाने की कोशिश की।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल टाइम्‍स (Global Times China most toxic Weapon) ने हर उस मौके पर कब्‍जा करने प्रयास किया जिसके जरिए कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के रुख हवा दी जा सके और पूरे मामले को हाइजैक कर लिया जाए।

ग्‍लोबल टाइम्‍स का 20 लाख सर्कुलेशन, 3 करोड़ विजिटर

अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों के जानकार हर्ष वी पंत और अनंत सिंह मान के मुताबिक चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्‍स डेली के स्‍वामित्‍व वाले ग्लोबल टाइम्‍स ने वर्ष 2009 में अपना पहला अंग्रेजी संस्‍करण निकाला था। इसके बाद ग्लोबल टाइम्‍स को वर्ष 2013 में अमेरिका, वर्ष 2014 में दक्षिण अफ्रीका और वर्ष 2016 में यूरोपीय यूनियन में इसका प्रकाशन शुरू हुआ। इसके बाद से ग्लोबल टाइम्‍स का 20 लाख अखबार बेचा जाता है।

वहीं वेबसाइट पर हर महीने 3 करोड़ यूनिक विजिटर आते हैं। वर्तमान समय में ग्‍लोबल टाइम्‍स ने अपनी वेबसाइट पर ‘चीन-भारत’ संबंधों पर प्रोपेगैंडा का प्रसार करने के लिए एक पेज बना द‍िया है जिसमें बड़ी संख्‍या में खबरें और ‘व‍िशेषज्ञों’ की राय है।

चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की विदेश नीति का प्रसार

पिछले कुछ वर्षो में ग्लोबल टाइम्‍स चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के विभिन्‍न मुद्दों पर विदेश नीति को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। ग्लोबल टाइम्‍स ऑ‍स्‍ट्रेलिया को ‘कागजी बिल्‍ली’ बता रहा है, ताइवान और हॉन्‍ग कॉन्‍ग की निंदा कर रहा है, अई वेईवेई जैसे आंतरिक विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चला रहा है और अमेरिका को धमकी दे रहा है।

यही नहीं अपने विचारों और गलत सूचनाओं के प्रसार के लिए ग्लोबल टाइम्‍स फेसबुक और ट्विटर पर व‍िज्ञापन के नाम पर जमकर पैसा खर्च कर रहा है। मजेदार बात यह है कि ये दोनों ही वेबसाइटें चीन में बैन हैं।

घर में ही घिरा ग्‍लोबल टाइम्‍स, हो रही आलोचना

दुनियाभर के लोगों के विचारों को प्रभावित करने में लगे ग्लोबल टाइम्‍स की अब अपने घर में ही तीखी आलोचना होने लगी है। वू जिआनमिन जैसे राजनयिक ने ग्लोबल टाइम्‍स के एडिटर हू शिजिन की कड़ी आलोचना की है। वू ने कहा कि हूं शिजिन ‘बहुत ज्‍यादा भड़काऊ और संकीर्ण सोच से भरे’ लेख प्रकाशित कर रहे हैं। एक और रोचक बात यह है कि हाल ही में हू शिजिन ने कहा था कि ग्लोबल टाइम्‍स में जो छपता है, वह कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का विचार होता है।

ग्लोबल टाइम्‍स का यह रुख ऐसे समय में बदल रहा है जब चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी तानाशाही को और बढ़ा दिया है। चीन में न केवल सूचनाओं के प्रवाह को रोका जा रहा है, बल्कि समय-समय पर झूठे विचारों को थोपा जा रहा है।

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को मजबूत करने की कोशिश

ग्लोबल टाइम्‍स अपनी इस मुहिम के जरिए कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की वैधता और शक्ति को समर्थन देने में लगा हुआ है ताकि देश में तानाशाही बनी रहे। अंतर्राष्‍ट्रीय परिदृश्‍य में कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की बढ़ती भूमिका से उसकी अपने घरेलू मामलों को कंट्रोल करने की शक्ति कमजोर हो रही है। अंतर्राष्‍ट्रीय मामलों को प्रभावित करने के लिए ग्‍लोबल टाइम्‍स सबसे आगे चल रहा है। यह कुछ उसी तरह से है जैसे कोल्‍ड वॉर के समय में सोवियन संघ कर रहा था।

ग्लोबल टाइम्‍स के जरिए चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी वैश्विक समुदाय के लिए सूचनाएं और प्रोपेगैंडा तैयार कर रही है लेकिन खुद अपने ही देश में इसे नहीं आने दे रही है। ग्लोबल टाइम्‍स यह सुनिश्चित करता है कि कम्‍युनिस्‍ट पार्टी अंतर्राष्‍ट्रीय सोच, सूचनाओं और विचारों को प्रभावित कर सके। हालांकि वह खुद चीन में ऐसा नहीं कर पा रहा है।

वुल्‍फ वॉरियर डिप्‍लोमेसी को बढ़ा रहा ग्‍लोबल टाइम्‍स

चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की ओर से किए जा रहे इस सुनियोजित प्रयास को वुल्‍फ वॉरियर डिप्‍लोमेसी कहा जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि चीन अपने इस नई रणनीति के जरिए अपनी शांतिप्रिय पांडा की छवि को ‘ड्रैगन’ की तरह से आक्रामक बनाना चाह रहा है।

चीन का यह अभ‍ियान उसके लिए उल्‍टा साबित हो रहा है। वह भी तब जब उसने दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में जनता के बीच बहस, राजनीति और मीडिया को सफलतापूर्वक प्रभावित करने में सक्षम रहा है।