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चीनी सेना ने शुरू किया ताइवान पर कब्‍जे का ‘महाभ्‍यास’, अमेरिका ने भेजे जंगी जहाज

बीजिंग। कोरोना महासंकट के बीच ताइवान दक्षिण चीन सागर में चीन और अमेरिका के बीच तनाव का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। चीन की सेना ने ताइवान पर ‘कब्‍जे’ के लिए ‘महाभ्‍यास’ शुरू किया है जो अगले 70 दिनों तक चलेगा। चीन यह अभ्‍यास बोहाई सागर में कर रहा है और इसको देखते हुए उसने पूरे समुद्री इलाके के एक बड़े हिस्‍से को 70 दिनों तक के लिए बंद कर दिया है। चीन के सैन्‍यभ्‍यास से ताइवान की टेंशन काफी बढ़ गई है। इस बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अपने युद्धक जहाजों को भेजा है।

ताइवान पर जबरन ‘कब्‍जा’ करने का होगा अभ्‍यास!

चीन की सेना ने गत गुरुवार से 31 जुलाई तक के लिए युद्धाभ्‍यास शुरू कर दिया है। 70 दिनों तक चलने वाले इस महाभ्‍यास के दौरान चीन की सेना लाइव फायर ड्रिल करेगी। इसके अलावा जमीन और पानी दोनों जगहों पर सेना को लैंड कराने का अभ्‍यास किया जाएगा। सैन्‍य व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि चीन की सेना अगले 70 दिनों तक ताइवान पर कब्‍जा करने का अभ्‍यास करने जा रही है। बोहाई समुद्र ताइवान पर कब्‍जे का अभ्‍यास करने के लिए सबसे आदर्श जगह माना जाता है। यहां की समुद्री परिस्थितियां लगभग वैसे ही हैं, जैसे ताइवान की खाड़ी में हैं।

चीन ने 2 हजार किलोमीटर के एरिया में लगाया बैन

एशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सेना द्वीपों पर कब्‍जा करने, वहां सैन्‍य चौकियां स्‍थापित करने और एंटी एयर और एंटी मिसाइल अभ्‍यास करेगी। चीन की सेना ने बोहाई सागर के 2000 किलोमीटर के इलाके में किसी के भी जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। माना जा रहा है कि 20 मई को ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन भाषण देने जा रही हैं और चीन के इस महाभ्‍यास को उनको चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। चीन को डर सता रहा है कि ताइवान की राष्‍ट्रपति पूर्ण आजादी का ऐलान कर सकती हैं।

‘वन चाइना पॉलिसी’ के खिलाफ हैं ताइवानी राष्‍ट्रपति

ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई वर्ष 2016 में जब से सत्‍ता में आई हैं, तब से उन्‍होंने ‘वन चाइना पॉलिसी’ का विरोध किया है। इसके जवाब में चीन ने सैन्‍य हस्‍तक्षेप की धमकी दी है और यहां तक कि अगर ताइवान के समुद्र और आकाश में अपने जहाज और फाइटर जेट भेजता रहता है। गुरुवार को शुरू हुए सैन्‍यभ्‍यास में चीन अपने विनाश फैलाने वाले जंगी जहाजों और एयरक्राफ्ट कैरियर को शामिल करेगा या नहीं, यह अभी देखना है। चीन ने ताइवान पर कब्‍जे के लिए विशेष जहाज भी बनाए हैं।

मिसाइल हमले से बचाव का तरीका टेस्‍ट करेगा चीन

अभी पिछले दिनों ही चीनी नेवी की ताकत का प्रतीक एयरक्राफ्ट कैरियर लियानिंग ताइवान के पास से गुजरा था। चीनी सेना पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षक वांग यूनफेई कहते हैं कि इस महाभ्‍यास का ताइवान केवल एक हिस्‍सा है। युद्धाभ्‍यास के दौरान बीजिंग पर अचानक हवाई और मिसाइल हमले से बचाव को भी परखा जाएगा। चीन ताइवान के इस उत्‍तरी इलाके में होने वाले अभ्‍यास के साथ दक्षिण इलाके में स्थित प्रतास या दोंगशा द्वीप समूह के पास भी अभ्‍यास करने जा रहा है। इस द्वीप पर ताइवान का कब्‍जा है।

ताइवान ने भी की युद्धाभ्‍यास की घोषणा

इस बीच ताइवान ने घोषणा की है कि वह जून महीने में फायरिंग का अभ्‍यास करेगा। ताइवान ने कहा है कि इस अभ्‍यास के दौरान दोंगशा द्वीप समूह पर मोर्टार और मशीनगन पोजिशन की परख की जाएगी। दोंगशा द्वीप समूह में एक द्वीप और दो कोरल रीफ हैं। इसके दो किनारे हैं। ताइवान ने इसे नैशनल पार्क घोषित कर रखा है। ताइवान ने चीन के किसी भी दुस्‍साहस का जवाब देने के लिए दोंगशा द्वीप समूह पर कोस्‍ट गार्ड की दो स्‍क्‍वाड्रन तैनात कर दी है। इसके अलावा 20, 40, 81 और 120 एमएम के मोर्टार भी द्वीप समूह पर तैनात किए गए हैं।

ताइवान की मदद को आगे आया अमेरिका

चीन की नापाक हरकतों को देखते हुए अमेरिका ने भी इलाके में अपने तीन युद्ध पोत भेजे हैं। यही नहीं अमेरिका ने प्रशांत महासागर में अपने कई एयरक्राफ्ट कैरियर भेजे हैं। अमेरिका के इस कदम के बाद से ही इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। माना जा रहा है कि चीन अब ताइवान पर कब्‍जे के साथ-साथ साउथ चाइना सी से पेट्रोकेमिकल्स व अन्य मिनरल निकालना चाहता है। उसकी इलाके में एक न्यूक्लियर रिएक्टर भी बनानी की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि साउथ चाइना सी पर युद्ध के हालात पैदा हो सकते हैं जिस युद्ध में चीन, अमेरिका और रूस शामिल हो सकते हैं। उधर, चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेइ फंगे ने कहा कि अगर अमेरिका की तरफ से युद्ध के हालत पैदा किए गए तो पेइचिंग हर कीमत पर लड़ने को तैयार है।

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