बेरूत में हिजबुल्लाह के विरोध प्रदर्शन के दौरान अंधाधुंध फायरिंग, ईरान-सऊदी में क्या बढ़ेगा तनाव?

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बेरूत
लेबनान की राजधानी बेरूत में 2020 में हुए भीषण बम विस्फोट की आग अभी तक ठंडी नहीं हुई है। इस विस्फोट की जांच कर रहे जज को हटाने की मांग को लेकर बेरूत में आयोजित प्रदर्शन में छह लोगों की मौत हुई है। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई और उसकी एक सहयोगी लेबनानी पार्टी कर रही थी। प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों की पहचान नहीं हो सकी है। ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने आरोप लगाया है कि इस हमले के पीछे सऊदी अरब से करीबी संगठनों का हाथ है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ सकता है।

6 लोगों की मौत, कई घायल
स्थानीय मीडिया ने लेबनानी सेना के सूत्रों के हवाले से बताया कि बेरूत में गुरुवार को हुई गोलीबारी में कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए। बताया जा रहा है कि यह गोलीबारी ऐन अल-रेमनेह में शुरू हुई। उस दौरान विरोध करने जा रहे लोग पास के ट्रैफिक सर्कल से गुजर रहे थे। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग लोग गली में दौड़ते हुए और पास के इलाकों में छिपने की कोशिश करते हुए दिख रहे हैं।

सऊदी समर्थित गुटों पर हमले का आरोप
इसके अलावा बेरूत में दो विस्फोट होने की भी सूचना है। लेबनानी सेना ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों की तलाश कर रहे हैं। ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और उसके सहयोगी, शिया अमल मूवमेंट ने इस हमले का आरोप सऊदी अरब के करीबी लेबनानी फोर्सेज (LF) और एक क्रिस्चियन पार्टी पर लगाया है।

लेबनानी राष्ट्रपति ने दोषियों को पकड़ने की कसम खाई
गृह मंत्री बासम मौलवी ने कहा कि स्नाइपर्स ने गोलियां चलाईं और लोगों के सिर पर निशाना साधा। लेबनानी फोर्सेज ने ऐसी किसी भी घटना में शामिल होने से इनकार किया है। उसने इस हमले की बाकायदा निंदा की है। उसने हिजबुल्लाह पर लोगों को उकसाने का आरोप भी लगाया। वहीं, राष्ट्रपति मिशेल औन ने कसम खाई है कि गुरुवार की गोलियों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

लेबनान में राजनीति शुरू
पूर्व प्रधान मंत्री साद अल-हरीरी ने कहा कि हिंसा गृहयुद्ध की याद दिलाती है। उन्होंने ऐसे हमलों को समाज के लिए खतरा बताया। वामपंथी नेता समीर गेगिया ने कहा कि यह गोलीबारी लेबनान में हथियारों की खुलेआम मौजूदगी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार को अवैध हथियारों पर रोक लगाना चाहिए। बता दें कि लेबनान युद्ध के दौरान समीर गेगिया का संगठन एक मिलिशिया भी चलाता था।

सऊदी-ईरान में क्यों है तनाव
पूरी दुनिया में मुस्लिम देशों के दो नेता हैं, सऊदी अरब और ईरान। सऊदी सुन्नी मुस्लिमों के रहनुमा होने का दावा करता है, जबकि ईरान शिया मुस्लिमों का। लेबनान में शिया मुस्लिमों की तादाद काफी ज्यादा है। हिजबुल्लाह भी शिया मुस्लिमों का हथियाबंद संगठन है जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है। लेबनान में ईरान की बढ़त को रोकने के लिए सऊदी अरब लेबनानी फोर्सेज (LF) को मदद करता है।