चंद्रमा पर मौजूद थे सक्रिय ज्वालामुखी! 40 साल बाद धरती पर सैंपल लेकर आया चीन

चंद्रमा पर मौजूद थे सक्रिय ज्वालामुखी! 40 साल बाद धरती पर सैंपल लेकर आया चीन

पेइचिंग
लंबे समय से चंद्रमा का कोई नमूना धरती पर नहीं आया था। अब 40 से अधिक सालों में पहली बार चंद्रमा का सैंपल चीन के Chang’e-5 की मदद से धरती पर लाया गया है। इसमें करीब दो अरब साल पुराना लावा भी शामिल है, जो चंद्रमा पर ज्वालामुखी गतिविधियों की जानकारी देता है। दिसंबर 2020 में, चांग’ए-5 लैंडर चंद्रमा से लगभग 1,731 ग्राम सैंपल्स को लेकर वापस आया था।

Nature की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी वैज्ञानिकों की टीम के इस पहले मिशन ने ओशनस प्रोसेलरम क्षेत्र के बारे में भविष्यवाणियों की पुष्टि करने के लिए सिर्फ एक छोटे क्षेत्र का इस्तेमाल किया, जहां अंतरिक्ष यान उतरा था। दो बिलियन साल पुराने ये नमूने ज्वालामुखी के संकेत देते हैं। जो नासा के अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों या सोवियत संघ के मानव रहित लूना मिशनों के नमूनों से कम से कम एक अरब साल नए हैं।
navbharat timesसंभव है भविष्य की यात्रा! आइंस्टीन के हवाले से वैज्ञानिक ने किया बड़ा दावा
लावा का सबसे नया सैंपल
ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के एक ग्रह वैज्ञानिक कैथरीन जॉय ने कहा, ‘यह चंद्रमा से अब तक का सबसे कम उम्र का लावा प्रवाह है।’ रिपोर्ट में कहा गया है कि ये नमूने चंद्रमा के भूविज्ञान में एक महत्वपूर्ण अंतर को पूरा करते हैं और वैज्ञानिकों को अन्य सौर मंडल निकायों के इतिहास को समझने में भी मदद करेंगे। 1 दिसंबर 2020 को चांग’ए-5 लैंडर ओशनस प्रोसेलरम में ज्वालामुखी मॉन्स रूमकर क्षेत्र में उतरा था।

सतह पर 100 डिग्री सेल्सियस का तापमान
इसने चंद्रमा की सतह पर 100 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान का भी सामना किया। ओशनस प्रोसेलरम, एक लैटिन शब्द जिसका अर्थ है ‘तूफान का महासागर’। यह क्षेत्र चंद्रमा के निकट उत्तर से दक्षिण तक 2,500 किलोमीटर तक फैला है। ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत नया लावा मौजूद है जो चंद्रमा पर हाल के ज्वालामुखी होने का संकेत देता है।