अफगानिस्तान को 8.5 हजार करोड़ रुपये देगा EU, पर तालिबान के हाथ नहीं आएगी एक चवन्नी

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ब्रसेल्स
यूरोपीय यूनियन ने अफगानिस्तान को एक बिलियन यूरो की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। यह पैसा तालिबान सरकार को न देकर वहां काम कर रही अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों को दिया जाएगा। ये एजेंसिया अपने कार्यक्रमों के जरिए अफगान लोगों की मदद करेंगी। भारतीय रुपये में यह राशि 8699 करोड़ बैठती है। इस सहायता राशि का ऐलान जी-20 के अफगान शिखर सम्मेलन से पहले किया गया है।

अफगानिस्तान के पतन को रोकने के लिए दी जाएगी सहायता
यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हमें अफगानिस्तान में एक बड़े मानवीय और सामाजिक-आर्थिक पतन को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की रक्षा समेत अफगान अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की जुड़ाव के लिए हमारी शर्तें स्पष्ट हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन तालिबान की हरकतों की कीमत अफगानों को नहीं चुकानी चाहिए।

तालिबान सरकार को नहीं मिलेगी फूटी कौड़ी
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ की सहायता राशि अफगानिस्तान को सीधे मदद के तौर पर वहां काम कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से दिए जाएंगे। इनमें से एक भी रुपया अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को नहीं दिया जाएगा। दरअसल, दुनिया को अभी भी डर है कि तालिबान अपने किए गए वादों को शायद ही पूरा करे। कई विशेषज्ञ भी चेतावनी दे चुके हैं कि तालिबान विदेशों से मिली सहायता राशि का उपयोग खुद को मजबूत बनाने के लिए करेगा।

कुल 1 बिलियन यूरो की सहायता दे रहा ईयू
रॉयटर्स के अनुसार, यूरोपीय संघ अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों को 700 मिलियन यूरो (809.2 मिलियन डॉलर) की आपातकालीन सहायता देगा। यूरोपीय यूनियन ने पहले से ही अफगानिस्तान में बुनियादी सेवाओं को ढहने और भोजन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 300 मिलियन यूरो की सहायता करने का वादा किया है। ऐसे में यह कुल राशि 1 बिलियन यूरो तक पहुंच जाती है।

यूएन महासचिव ने भी मदद की गुहार लगाई
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने भी मंगलवार को ट्वीट कर अफगानिस्तान को मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। बैंक बंद हो रहे हैं और कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवा जैसी आवश्यक सेवाओं को रोक दिया गया है। मैं दुनिया से अपील करता हूं कि वह कार्रवाई करे और अफगान अर्थव्यवस्था में पैसा डाले ताकि पतन से बचा जा सके।