जो अपना लेता है भगवान शिव के ये 6 गुण, उनके जीवन में नहीं रहता कोई दुःख

Shiv
Webvarta Desk: धर्मग्रन्थों में भगवान शिव (Lord Shiva) के स्वरूपों का वर्णन मिलता है। उनका मूल स्वरूप भी अन्य देवताओं से बहुत भिन्न है। शिवजी के स्वरूप को देखते हुए हमें उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है, क्योंकि भोलेनाथ के रूप में जीवन के कई गुण सूत्र छुपे हैं।

महादेव (Lord Shiva) की 3 नेत्र, शीश पर विराजमान चंद्रमा और नीला कंठ होना हमें नए तरह से जीवन की प्रेरणा देते हैं। अगर शिवजी से प्रेरणा ली जाए तो जीवन में परेशानियां दूर हो जाएंगी। आज भगवान शिव से सीखें जीवन के ये गुण सूत्र…

एकजुटता

आदिदेव शिव ने जिस तरह से अपनी जटाओंब में गंगा धारण की हुई है इससे एकजुटता की सीख मिलती है। बिखरे हुए केशों को एकत्र करके शिव ने गंगा के विकराल रूप को शांत स्वरूप में परिवर्तित कर दिया।

दूरगामी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव त्रिनेत्रधारी हैं। मष्तक पर स्थित उनका तीसरा नेत्र बताता है कि दूरगामी परिस्थितियों में सिर्फ बाहरी नेत्रों का प्रयोग न करें, बल्कि सोच-समझकर निर्णय लें। सदैव दूरगामी परिणामों पर अपनी नजर बनाए रखें।

धीरज

चंद्रमा को अपने मस्तक पर विराजमान करने वाले भगवान शिव को शशि शेखर भी कहा जाता है। चंद्रमा शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में महादेव से सीख मिलती है कि किसी भी परिस्थिति में अपना धीरज नहीं खोना चाहिए। साथ ही मन पर नियंत्रण बनाए रखना चाहिए।

धैर्य

विषपान करने के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था इसलिए शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है। महादेवा का यह स्वरूप मनुष्य को क्रोध सहने की सीख देता है। क्रोध, बुद्धि को भ्रमित कर खुद को और अन्य लोगों को परेशानी में डालने का काम करता है। ऐसे में विष रूपी क्रोध को पीकर अपने धैर्य से खत्म करें।

पर्यावरण

प्राकृति और पर्यावरण को समर्पित शिवजी अपने गले में सांप लपेटे रखते हैं और नंदी (बैल) की सवारी करते हैं। वह हिमालय पर्वत पर रहते हैं और कंदमूल खाते हैं। उनके भक्तों और गणों में सभी पशु-पक्षी, देव-दानव शामिल हैं।

कल्पना

भोलेनाथ जटाजूट और कपाल धारण करने वाले भी हैं। अपने शरीर पर भभूत धारण करते हैं। जो यह बताती है कि संपूर्ण होने के बाद भी खुद को किसी भ्रम में न रखें। जीवन में जुनून और प्रतिबद्धता हो, किंतु किसी कल्पना में न जिएं।