जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी की प्रेस वार्ता में पीड़ितों ने बयान की दर्दनाक आपबीती

-पुलिस ने लड़कियों और छात्रों पर किया कम्युनल, हिंसक, क्रूर, अटैक

-सोची समझी रणनीति बनाकर पुरुष वर्दीधारियो ने किए संवेदनशील अंगों पर हमले

नई दिल्ली, 12 फरवरी (अनवार अहमद नूर)। जामिया में पुलिस और सुरक्षा बल ऐसी घिनौनी और क्रूर हरकत कर सकते हैं इसका विश्वास किसी को नहीं हो रहा था लेकिन जब आज पीड़ितों ने अपनी दर्द भरी आपबीती सुनाई तो सबको यह आश्चर्य हुआ कि यह पुलिस और सुरक्षाबलों का कौन सा रूप है कि उन्होंने छात्र-छात्राओं विशेषकर महिलाओं को कुछ इस तरह से मारा की लाठियां चलती हुई भी नहीं दिखाई दीं और एक के बाद एक दर्जनों प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएं घायल हुए जिनमें कुछ बेहोश हो गए और कुछ इतनी अधिक गंभीर स्थिति में आ गए कि उनको तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल में भर्ती कराया गया कई आईसीयू में भर्ती हुए। अधिकतर पीड़ितों को निकट के अंसारी हेल्थ सेंटर और अल शिफा अस्पताल में ले जाया गया।

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ज्ञात रहे कि 10 फरवरी की देर शाम को जब जामिया के प्रदर्शनकारी छात्र संविधान की रक्षा के लिए संसद भवन तक अपना मार्च निकालना चाहते थे उस समय पुलिस और सैनिक बलों ने आगे के भाग में बैरिकेट्स के आगे कई लाइनों में पुलिस सुरक्षा बल खड़े किए थे अचानक छात्रों पर धक्का-मुक्की बढ़ा दी गई। और पुलिस बल ने इस धक्का-मुक्की के अंदर ही कुछ इस तरह अपना काम शुरू कर दिया कि उसने प्रदर्शनकारियों पर इस तरीके का क्रूर हमला किया कि नीचे के भाग में लाठियां और लातों से हमला किया गया। साथ ही महिला प्रदर्शनकारियों पर पुलिस वर्दी धारियों ने कुछ इस तरह हमले किए कि उनके संवेदनशील अंगों प्राइवेट पार्ट्स पर चोट पहुंचाई गई। जिससे वह तिलमिला गई। बेहोश हो गई। इसके अलावा कई पीड़ितों ने बताया कि उन पर हिरासत में ले जाते समय मारपीट के साथ साथ अभद्र टिप्पणियां की गई। महिलाओं पर पुरुष वर्दी धारियों ने अभद्र टिप्पणियों के साथ-साथ प्राइवेट पार्ट और छातियो पर हमले किए।

Jamia Coordination Committee

जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी की ओर से बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगभग डेढ़ दर्जन ऐसे पीड़ित मौजूद रहे। जिन्होंने उस समय स्वयं वर्दीधारियों की क्रूर हिंसा झेली। और वह अभी किसी न किसी तरह दर्द से पीड़ित हैं । लेकिन पत्रकारों को अपनी आपबीती सुनाने के लिए मौजूद रहे। जिकरा नाम की पीड़िता ने बताया कि किस तरह पुलिस वाले ने उसको गिरा कर और उस पर वह पूरी तरह से खड़ा हो गया और उसने अपने पांव से उसको खूब मारा। पीड़ितों में कुछ के नाम इजहार, कासिम, सुरेश त्रिपाठी, श्रीजग चावला, शाहीन मोहम्मद जुबेर तहसीन मोहम्मद इरफान मीरान, मुनव्वर आदि हैं।

एक पीड़ित ने बताया कि उसको इस तरीके से मारा गया कि वह गिरने को था लेकिन तभी उसको कुछ ऐसा लगा कि जैसे किसी ने कोई केमिकल छोड़ा हो और उसके बाद वह बेहोश होकर गिर गया। एक पीड़ित ने बताया कि डीसीपी ने उसे कहा तुझे बीच में से चीर दूंगा। यहां कई छात्र-छात्राओं ने बताया कि पुलिस उनको हर तरीके से प्रताड़ित कर रही है और एक मार्च निकालने की परमिशन नहीं दे रही है। जबकि वह 15 दिसंबर से लगातार परमिशन मांग रहे हैं और उनका अभी यह कहना है कि हमें अगले 5-10 दिन में आप परमिशन दें। ताकि हम लोग संसद भवन तक अपना शांतिपूर्ण मार्च निकाल सकें।

यहां आपको बता दें कि 10 फरवरी की देर शाम को तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। जिस वक्त जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्र अपना मार्च संसद भवन की ओर ले जाने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने उनको रोकने के लिए जहां भारी अर्धसैनिक बलों और सख्त सुरक्षा प्रबंधों को किया था वही पुलिस द्वारा अप्रत्यक्ष हिंसक रवैया अपनाने की वजह से दर्जनों छात्र घायल हुए थे। अपने ऊपर हुई हिंसा की आपबीती आज बताई गई जिसमें पुलिस की बड़ी घिनौनी हरकत और क्रूरता, कम्युनल टिप्पणियों वाली बात सामने आई।

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