sonu-sood-helps-migrants

समय पर जो सहायता न करे वो कैसा हीरो : सोनू सूद

पिछले कई दिनो से लगातार बॉलीवुड का यह एक्टर लॉकडाउन में मजदूरों और जरूरतमंदों की भरपूर मदद कर रहा हैं। इन्होंने अब तक कई मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में काफी मदद की है। इतना ही नहीं  मजदूरों के खाने-पीने का भी बखूबी इंतजाम किया है। जहां एक ओर सरकारें व नेता बस और रेलों के इंतजाम की बात करते हुए राजनीति कर रही है वहीं दूसरी ओर यह कलाकार हजारों मजदूरों को भेजने का काम कर चुका है। जरुरतमंदो के मसीहा बने इस कलाकार की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। हर कोई फोटो शेयर करके अपने ही अंदाज में प्रशंसा कर रहा है। इस तरह की मदद करने का विचार कैसे मन में आया व अन्य कई मुद्दों पर सोनू सूद से योगेश कुमार सोनी की विशेष बातचीत के मुख्य अंश…

मदद करने के कई तरीके के हो सकते थे? मजदूरों को उनके घर पहुंचाने का विचार कैसे आया?

आपने ही कहा कि मदद कई तरह से होती है मैंने लोगों को अपनो तक पहुंचाने के रुप में यह काम किया। लॉकडाउन की वजह से काम न मिलने पर हमारे मजदूर भाइयों पर संकट आ गया और वो बहुत परेशान हो रहे हैं और उन्होनें किसी भी हाल में घर जाने की ठान रखी है। और जिसको जो चाहिए वो उसको दे दिया जाए तो उससे बेहतर क्या होगा। हमें हीरो बनाने वाले यही लोग होते हैं और हीरो का मतलब सिर्फ एक्टर नही हीरो का मतलब दुनिया का भला करने वाला होता है। मौजूदा हाल देखकर मुझे लगा कि जो लोग अपने घर-गांव जाने के लिए परेशान है तो उनको उनके गंतव्य पर पहुचांया चाहिए।

Sonu-Sood

मजदूरों से प्यार करने का कोई विशेष कारण या आपकी यह मुहिम मानवता पर आधारित है?

एक कलाकर को सबसे प्यार होता है। हम से जब भी कोई मिलता है तो वो अपना समझता है। हम उसके विषय में कुछ जानें या न जानें वो हमारे बारे में सब जानता है चूंकि वो हमें देख व पढ़ चुका होता है। अब यदि बात करें मजदूरों की तो दुनिया निर्माण में इनको रोल को देखा जाए तो यह हमारी तरक्की से सबसे अहम पिलर होते हैं। किसी भी चीज निर्मित करने के लिए मजदूर की जरुरत पडती है। यदि असल में देखा जाए तो वही दुनिया को निर्माता होता है। मजदूरो को उनके घर भेजना मुहिम के रुप में नही लेता चूंकि यह तो वैश्विक आपदा के रुप में आकस्मिक घटना है जिससे हर कोई परेशान हुआ है लेकिन जो अपनों से दूर हैं उनका दर्द बहुत बड़ा है।

प्रवासियों ने आपको महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर डाली। इस पर क्या कहेंगे आप?

मेरा राजनीति से कोई मतलब नही और यह लोगों का प्यार है जो इस तरह की बात कह रहे हैं। मेरे दिल ने जो कहा वो मैंने किया। हां लेकिन यह जरुर कहूंगा कि ऐसे समय पर सभी एकजूट होकर अपने आस-पास फसें लोगों की मदद करें। जरुरी नही मंदिर-मस्जिद बनाकर ही अपनी श्रृद्धा का प्रदर्शन किया जाए। जैसे प्यासे को पानी और भूखे का अन्न देकर सूकून पड़ता है वैसे ही मुझे प्रवासियों को उनके घर पहुंचाने में सूकून पड़ रहा है।

देश में संकट के समय बॉलीवुड सितारे व क्रिकेट खिलाडी हमेशा आगे आते रहे हैं। लेकिन इतनी बडी विपधा में ज्यादा सेलेब्रिटी आगे नही आई।

देखिए…निस्वार्थ मदद करना हर किसी का निजी मामला होता है। इसमें किसी का दबाव नही माना जा सकता चूंकि यह स्वेछा का खेल है। कोई, क्यों मदद के लिए आगे नही आ रहा है वो उसका अपना फैसला है लेकिन बस एक बात जरुर कहूंगा कि जिन लोगों को की वजह से हमारा वजूद है या जिनकी वजह से हम हीरो हैं उनकी मदद करनी चाहिए चूंकि लोग हमसे उम्मीद करते हैं। कई लोगों ने बडे स्तर पर मदद भी की है। यदि भगवान ने आपको इतना दिया है कि आप किसी की सहायता कर सकते हैं तो जरुर कीजिए। आपके ऐसे कार्यों से लाखों-करोडों लोगों की दुआएं मिलेंगी साथ ही लोग आपको और ज्यादा प्यार करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *