सना खान अकेली नहीं, धर्म-अध्यात्म के लिए ग्लैमर की दुनिया छोड़ चुकी हैं 5 ऐक्ट्रेसस

New Delhi: ऐक्ट्रेस सना खान (Sana Khan) के फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने के फैसले से हर कोई हैरान है। हालांकि उनके साथी उनका सपोर्ट भी कर रहे हैं। सना ‘सलमान खान’ के साथ ‘जय हो’ फिल्म में दिखाई दे चुकी हैं साथ ही ‘बिग बॉस’ का हिस्सा भी रही हैं।

सना खान (Sana Khan) पहली ऐक्ट्रेस नहीं हैं जिन्होंने धर्म और अध्यात्म के लिए शो बिजनस छोड़ा। उनसे पहले जायरा वसीम, सोफिया हयात, ममता कुलकर्णी, अनु अग्रवाल और बरखा मदन भी ये कदम उठा चुकी हैं।

ममता कुलकर्णी

90 के दशक की पॉप्युलर ऐक्ट्रेस ममता कुलकर्णी का नाम ड्रग रैकेट में शामिल लोगों से जुड़ने के बाद उनका फिल्मी करियर खत्म हो गया। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि वह संत चैतन्या गगनगिरि नाथ के मार्गदर्शन में हैं और संन्यासिन बन चुकी हैं। 1 दशक से ज्यादा वक्त बीत गया है, न उन्होंने मेकअप किया है, न ब्यूटी पार्लर जाती हैं।

बरखा मदन

मॉडल, ऐक्ट्रेस रह चुकीं बरखा मदन ग्लैमर वर्ल्ड को छोड़कर बुद्धिष्ट मॉन्क बन गई हैं। बरखा फिल्म ‘भूत’ में अजय देवगन के साथ काम कर चुकी हैं। अब उनकी नन गैलटन सैमसन नाम से जाना जाता है।

अनु अग्रवाल

राहुल रॉय के साथ फिल्म ‘आशिकी’ करने के बाद अनु अग्रवाल को इंडस्ट्री में अच्छी पहचान मिल गई थी। एक एक्सिडेंट के बाद उनकी जिंदगी एकदम बदल गई। रिपोर्ट्स की मानें तो वह अपनी यादाश्त तक खो चुकी थीं। ठीक होने के बाद वह अपना ज्यादातर वक्त योगाश्रम में बिताने लगीं। उन्होंने सारी संपत्ति दान कर दी और संन्यासिन बन गई।

सोफिया हयात

सोफिया हयात भी ‘बिग बॉस’ का हिस्सा रह चुकी हैं। उनके संन्यास लेनी की खबर भी काफी चौंकाने वाली थी। वह आध्यात्म से जुड़े कई पोस्ट डालती रहती हैं। हालांकि उनकी कॉन्ट्रोवर्शल तस्वीरें और पोस्ट ट्रोल्स का निशाना बनते हैं।

जायरा वसीम

फिल्म ‘दंगल’ से बॉलिवुड में अपनी जगह बनाने वाली जायरा वसीम भी फिल्मी दुनिया को अलविदा कह चुकी हैं। उन्होंने लंबे-चौड़े पोस्ट में लिखा था कि उनका इमान उन्हें ये सब करने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने लिखा था कि वह इस्लाम से दूर हो रही हैं इसलिए ग्लैमर वर्ल्ड से नाता तोड़ने का फैसला है।

सना खान

‘बिग बॉस’ का हिस्सा रह चुकीं सना खान ने सोशल मीडिया पर फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने की घोषणा की है। उन्हें पोस्ट में लिखा है कि उन्हें अपने मजहब में देखा कि ये जिंदगी असल में बाद की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए होती है। ऐसा तब होगा जब बंदा अपने पैदा करने वाले के मुताबिक जिंदगी गुजारे। उन्होंने लिखा कि अब वह इंसानियत की खिदमत और अपने पैदा करने वाले के हुकुम पर चलने का पक्का करती हैं।

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