Vidya Balan

बायोपिक करने से बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं : विद्या बालन

बीत दशकभर में बॉलीवुड में बॉयोपिक का प्रचलन बडे स्तर कामयाब रहा है। इस मामले को लेकर अच्छी बात यह है कि दर्शक भी बायोपिक बहुत पसंद कर रहे हैं। देश की जानी मानी मैथेमैटिशियन शकुंतला देवी को पूरी दुनिया ने इंसान के रुप में एक कंप्यूटर माना है। गणित ही नही उन्होनें कुकरी से लेकर इतिहास के अलावा तमाम अहम व गंभीर विषय पर पुस्तकें लिखी हैं। शकुंतला देवी का गिनिज ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है। ऐसे गंभीर मुद्दों पर एक्टिंग करना किसी भी बॉलीवुड कलाकार लिए बडी चुनौती होती है। शकुंतला देवी की बॉयोपिक में करने करने वाली बॉलीवुड अदाकारा विद्या बालन से योगेश कुमार सोनी की एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश…

आपने हर तरह का किरदार निभाया है। बायोपिक में काम करना कैसा समझती हैं आप?

किसी भी कलाकार के लिए हर रोल को करना चुनौती होती है लेकिन बायोपिक में थोडा अधिक गंभीरता दिखानी होती हैं चूंकि जिसकी जिंदगी के संघर्ष की कहानी को आप दुनिया को आप अपने चेहरे व एक्टिगं से बताना चाहते हो, जिसको दुनिया पहले से ही जानती है। उसके जिंदगी से जुडे हर पहलू को हूबहू दिखाने के लिए आपको उस शख्सियत को जीना पड़ता है। दिखने में वैसा लुक बनाना तो आसान है लेकिन उसके हौसले,रुतबे और संघर्ष को समझ के समझाना थोडा कठिन होता है।

शकुंतला देवी को आप कैसे समझती हैं। उनको अपने अंदर कैसी समाया आपने?

इस फिल्म की निर्देशिका अनु मेनन ने मुझे शकुंतला जी जिंदगी की हर छोटी से बडी बात को बेहद गंभीरता से समझाया। आश्रचर्य है कि शकुंतला देवी स्कूल नही गई लेकिन इंग्लैंड में बेहद आम तरह से वह अपना जीवन ऐसे जीती हैं जैसे कि वह वहीं की रहने वाली हैं। ऐसे लोगों पर वाकई भगवान की अद्भूत कृपा होती है जो कठिन माहौल में भी अपनी हिम्मत नही छोडते।

कोरोना की वजह से अब तक सिनेमा हाल नही खुले। आपकी इतनी बडी अमेजॉन प्राइम पर रिलीज हुई। आपको कैसा लग रहा है?

आपको बहुत ईमानदारी से बताउं तो मुझे बेहद अफसोस है कि फिल्म सिनेमा हाल में नही दिखाई जा रही चूंकि इस फिल्म को थिएटर ऑडियंस के लिए ही बनाया गया था लेकिन यह अमेजॉन प्राइम रिलीज हुई। अभी यह भी नही पता कि कब तक हाल खुलेंगे। दर्शकों और कलाकारों को फिल्म रिलीज का इंतजार होता है। 

हाल में कुछ छोटे बड़े कलाकारों का आत्महत्या कर रहे हैं। सुशांत सिंह के बाद भी यह सिससिला जारी है। आप इन घटनाओं को कैसें देखती हैं।

हर किसी की जिंदगी में अपनी समस्याएं होती हैं। किसी की छोटी तो किसी की बड़ी लेकिन दोनो ही परिस्थिति में आत्महत्या किसी भी प्रकार का हल नही हैं। नई पीढ़ी के कलकारों के साथ विडंबना यह है कि उनको बहुत कम समय में सुपर स्टार बनना होता है। यदि आज हम अपनी तुलना अपने सीनियरों करेंगे तो ठीक नही माना जाएगा। मैं यह नही कहती कि बडे सपने मत देखो,जरुर देखने चाहिए लेकिन उसको हकीकत में बदलने के लिए मेहतन भी बहुत ज्यादा करो।

आज कल डिप्रेशन हर किसी को घेर रहा है। क्या कहेंगी?

जब किसी भी चीज को हम जरुरत से ज्यादा अपने पर हावी कर लेते हैं तो डिप्रेशन का रुप ले लेती है। आजकल युवाओं में इसका बढ़ना बेहद चिंताजनक हैं। मैं आपके अखबार से यही अपील करुंगी कि सबका समय आता है। मेहनत करते रहिए और आगे बढिए। और एक दिन या कुछ समय में कोई भी सुपर स्टार नही बन जाता है। इसके अलावा जितना मिला है उसमें खुश रहना सीखिये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *