जिस लद्दाख के लिए भारत-चीन के चल रहा तनाव.. उससे जुड़े इन 5 रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

New Delhi: लद्दाख भारत के प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। यहां की संस्कृति भारत की सतरंगी संस्कृति में एक रंग भरती है। आज यहां चीन की महत्वाकांक्षा ने तनाव का माहौल बनाया हुआ है। भारत और चीन दोनों ओर से यहां लगातार सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा रही है। जिससे लोगों को 1962 जैसी स्थिति का अहसास होने लगा है।

दोनों ओर से बढ़ रही गतिविधियों के कारण लोगों के मन में हलचल की स्थिति है। बौद्ध धर्म में आस्था और शांति एवं प्रेम में विश्वास रखने वाले यहां के लोगों के बीच कई रहस्य (Mysteries Related To Indochina Border) भी हैं जिनके बारे में जानकर पूरी दुनिया के लोग हैरान रह जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 रहस्‍य…

रहस्‍यमयी हवाई अड्डा

भारत-चीन सीमा (Mysteries Related To Indochina Border) एक ऐसा हवाई अड्डा होने की बात कही जाती है जहां अक्‍सर एलियंस आया करते हैं। सीमा का यह हिस्‍सा एलियंस का हॉट-स्‍पॉट माना जाता है। यहां अक्‍सर एलियंस और यूएफओ के दिखने की बात कही जाती है। सीमा पर कोंग्‍का ला दर्रा एक रहस्‍यमयी स्‍थान है, जहां पर एलियंस देखे जाने का दावा किया जाता है।

भारत इसे लद्दाख का हिस्‍सा मानता है तो वहीं चीन इसे हिमालय के अक्‍साई का क्षेत्र मानकर इस पर अपना हक जमाता है। बहरहाल यहां किसी भी देश की सेना की मौजूदगी नहीं है। इस कारण यह क्षेत्र अक्‍सर ही विवाद का विषय बना रहता है। लेकिन यहां एलियंस के आने-जाने का सिलसिला बना रहता है।

जीसस का भी लद्दाख से नाता

हिंदू धर्म से जुड़े महापुराण में जीसस के भारत से रिश्‍ते के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि जीसस ने अपने जीवन का काफी समय लद्दाख में बिताया था। एक फ्रांसीसी यात्री की पुस्‍तक में बताया गया है कि सूली पर चढ़ाने जाने से पूर्व के वक्‍त में जीसस लद्दाख समेत पूर्व के कई देशों में रहे थे। पैदल-पैदल व‍ह बर्फीली चोटियों को पार करके कश्‍मीर के पहलगाम तक पहुंच गए थे।

जीसस के इस गांव में प्रवास के कारण ही इसका नाम पहलगाम पड़ा। जिसका अर्थ है गड़रियों का गांव। यहां पर रहकर उन्‍होंने भारतीय सभ्‍यता से जुड़ी तंत्र-मंत्र की शिक्षा अर्जित की। ऐसा माना जाता है कि सूली पर चढ़ाए जाने के बाद जीसस जब जिंदा हुए थे तो उन्‍होंने इस तंत्र मंत्र का ही सहारा लिया था।

मैग्‍नेटिक हिल

इसे जादू वाली पहाड़ी कही जाए तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। जी हां लद्दाख क्षेत्र में लेह के पास एक पहाड़ी है, जो ‘मैग्नेटिक हिल’ के नाम से मशहूर है। यहां के बारे में कहा जाता है कि ऐसी गजब शक्ति मौजूद है जो कि चीजों को अपनी ओर खींचती है। यहां पर गाड़ी 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ऊपर की ओर जाती हैं और नीचे भी आती है।

और तो और मैग्‍नेटिक हिल के ऊपर से गुजरते वक्‍त विमान भी इस चुंबकीय शक्ति के कारण झटका खा जाते हैं। कई पायलट्स ऐसा बता चुके हैं। गर आप इस पहाड़ी पर गाड़ी न्यूट्रल में खड़ी कर दें तब भी वह जस का तस खड़ी रहेगी। जबकि किसी दूसरी पहाड़ी पर ऐसा किया तो आपकी गाड़ी तेजी से नीचे उतरने लगेगी।

यहां के रक्षक हैं ‘ओपी बाबा’

यहां भारत-चीन सीमा पर ओपी बाबा काफी समय से भारतीय सैनिकों की रक्षा कर रहे हैं। ओम प्रकाश नामक एक सैनिक ने 19 80 के दशक के अंत में सियाचिन में मालाउन पोस्ट पर अकेले दुश्मनों को हराया, जब कि अन्य सैनिकों को हैडक्वाटर बुला लिया गया था। अब वह सैनिक कौन था और उसके साथ क्या हुआ, यह एक रहस्य है। आर्मी को इस सैनिक के बारे में कुछ नहीं पता। यहां पर ओपी बाबा का मंदिर है और सैनिका लड़ाई पर जाने से पहले उनका आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ते हैं।

पैंगोंग झील

लद्दाख में फैली यह झील 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 135 किमी लंबी यह झील 604 स्‍क्‍वायर किमी में फैली है। खारे पानी की यह झील सर्दियों में पूरी तरह से जमकर एकदम पत्‍थर जैसी हो जाती है। माना जाता है कि इस विशाल झील का 45 किमी हिस्‍सा भारत यानी लद्दाख में स्थित है। जबकि इसका 90 किमी हिस्‍सा तिब्‍बत में पड़ता है।

माना जाता है कि यह झील दिन में कई बार अपना रंग बदलती है, जिसके पीछे की वजह पानी में आयरन की मौजूदगी बताई जाती है। वहीं पौराणिक मान्‍यताएं यह कहती हैं कि यह झील यक्ष राज कुबेर का मुख्‍य स्‍थान है। भगवान कुबेर की दिव्‍य नगरी इसी झील के आसपास कहीं स्थित है। इसके बारे में रामायण और महाभारत में भी बताया गया है।

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