Thursday, March 4, 2021
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Tandav Web Series Controversy: ह्यूमर और आस्था के बीच फंस गई सैफ और जीशान की अदाकारी

Webvarta Desk: Tandav Web Series Controversy: आस्था पर चोट पहुंच जाए तो सीन क्या फिल्मों का नाम बदलना पड़ता है। सलमान खान की लवरात्रि अचानक लवयात्री हो जाती है क्योंकि इसे नवरात्रि से जोड़ दिया गया।

सनातन धर्म और 84 करोड़ देवी देवताओं की पौराणिक कथाओं में परशुराम, अहिल्या, भीष्म पितामह, ऋषि गौतम की भूमिकाओं पर गौर करें तो शायद आज के आस्थाप्रेमी उन्हें भी नहीं छोड़ते। खैर, जानबूझ कर हिंदुओं या मुसलमानों या किसी भी धर्म का परिहास अक्षम्य है। अब तांडव (Tandav Web Series Controversy) में ऐसा हुआ है या नहीं ये बहस का विषय है।

तांडव (Tandav Web Series) के डायरेक्टर अली अब्बास ज़फर (ali abbas zafar) ने बिना शर्त माफी मांग ली है। उन्होंने कहा है कि उनका इरादा किसी भी धर्म या समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं है। सैफ अली खान (Saif Ali Khan) और मोहम्मद जीशान अयूब (Mohd Zeeshan ayyub) के किरदार वाली वेब सीरीज एक काल्पनिक कहानी है।

इस तरह का डिस्क्लेमर अमूमन हर काल्पनिक फिल्मों में होता है। लेकिन तांडव को लेकर बात आगे बढ़ चुकी है। लखनऊ में एफआईआर दर्ज है। पुलिस की टीम मुंबई रवाना हो गई है। देश के कई शहरों में तांडव के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। बीजेपी नेता राम कदम ने तो सैफ अली खान को भी निशाने पर लिया है। उनके मंसूबों पर सवाल उठाए हैं।

राम-सीता और रावण पर बुरे फंसे सैफ

तांडव के रिलीज होने से ठीक पहले सैफ अली खान विवादों में आ गए। वो हिंदू संगठनों के निशाने पर हैं। अपनी अगली फिल्म आदिपुरुष में अपने रोल के बारे में उनकी टिप्पणी की आलोचना हुई है। इस फिल्म में वो रावण की भूमिका निभा रहे हैं। मुंबई मिरर से इंटरव्यू में उन्होंने रावण को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी।

सैफ ने कहा, ‘एक राक्षस राजा का किरदार निभाना काफी दिलचस्प है, लेकिन ये इतना भी क्रूर नहीं है। हम इसे काफी मनोरंजक बनाने वाले हैं। सीता का अपहरण और राम के साथ हुए युद्ध को हम उसकी बहन के लिए बदले की भावना से जोड़कर दिखाने वाले हैं जिसकी नाक लक्ष्मण ने काट दी थी।’

इसके बाद सोशल मीडिया पर निशाने पर आए और फिर हिंदू संगठनों ने उन पर जानबूझ कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया। अंत में सैफ अली खान को माफी मांगनी पड़ी।

पहले एपिसोड के 17वें मिनट में क्या हुआ

पर क्या तांडव में वाकई जानबूझ कर हिंदुओं की धार्मिक भावना पर ठेस किया गया। ये कहना जल्दबाजी होगी। हां सीन पर सवाल उठ सकते हैं। इसमें मोहम्मद जीशान को स्टैंड अप कॉमीडियन के तौर पर दिखाया गया है। वो शिव के रुप में नारद से वार्तालाप करते हुए भगवान राम पर कुछ टिप्पणी करते हैं। हालांकि ये ह्यूमर से आगे निकलकर आस्था पर चोट की तरह बताया जा रहा है।

क्या कर्मकांड पर प्रहार आस्था पर प्रहार है?

फिल्में समाज का आईना भी होती हैं। इसके जरिए समाज और धर्म को लेकर तार्किक सोच भी विकसित की जा सकती है। कर्मकांडों पर प्रहार अगर फिल्मों से हो तो उस पर बैन लगाने की मांग जायज नहीं ठहराई जा सकती। कुछ इसी तरह की फिल्म थी आमिर खान की पीके। इसमें वो एलियन की तरह रिसर्च करने धरती पर आए हैं। फिल्म में अंधविश्वास पर भी प्रहार किया गया है। कुछ धार्मिक रीति रिवाजों पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि रिलीज के बाद विश्व हिंदू परिषद ने फिल्म पर ही सवाल उठा दिए।

जब भगवान पर ही केस ठोक दिया

2012 में रिलीज हुई ओह माय गॉड ब्लॉक ब्लस्टर साबित हुई। पर कुछ संत संगठनों ने इसे भी निशाने पर लिया क्योंकि कांजी लालजी मेहता ने भगवान पर हर्जाने का केस ठोक दिया था। कांजीलाल की भूमिका में परेश रावल थे। इस फिल्म में भगवान तक पहुंचने के रास्ते में कथित मददगारों की भूमिकाओं पर सवाल उठाए गए हैं। इसे यूएई में बैन कर दिया गया.

जब हिंदू को पता चला पुरखे मुसलमान थे

परेश रावल ने जो काम ओह माय गॉड में शुरू किया, उसे आगे बढ़ाया ‘धरम संकट में’। इस फिल्म में धरम पाल की भूमिका में थे रावल। धरम पाल घोर हिंदूवादी है और उसे अचानक पता चलता है कि उसके पुरखे मुसलमान थे। फिर वो दोनों धर्मों के रीति रिवाजों को मानने लगता है। सभी अंधविश्वासों को अपना लेता है। अंत में उसे लगता है कि दोनों ही धर्मों में कुरीतिया हैं।

ऐसी और अनेक फिल्में हैं जिनें धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाए गए हैं। और सवाल उठाना तार्किक वैज्ञानिक दुनिया में कोई नई शुरुआत नहीं है। कभी दीपा मेहता की वाटर के खिलाफ सूइसाइड की धमकिया दी गईं। माय नेम इज खान और अर्थ जैसी फिल्मों ने भी पुरातनपंथी पर प्रहार किया। इसका मतलब ये भी नहीं है कि कोई डायरेक्टर, प्रोड्यूसर जानबूझ कर किसी की आस्था पर चोट करे।

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