देशद्रोही, बेईमान…मुंबई आ रहीं कंगना पर शिवसेना का बड़ा अटैक, मोदी सरकार पर भी साधा निशाना

New Delhi: शिवसेना (Shivsena) ने अपने मुखपत्र सामना (Saamana) के जरिए कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को एक बार फिर से निशा’ने पर लिया गया है। सामना के संपादकीय (Saamana Editorial) में कंगना को बेईमान बताया गया है। यहां तक कि कंगना को देशद्रो’ही, बेईमान और मानसिक वि’कृत बताया गया है।

इतना ही नहीं, सामना (Saamana) में मोदी सरकार (Modi Govt) को देशद्रो’ही को सुरक्षा देने की बात कही गई है। वहीं पत्रकारों को देशद्रोही बताकर हरामखोर भी कहा है। सामना के इस संपादकीय (Saamana Editorial) को लेकर कंगना ने भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह मुंबा देवी के आशीर्वाद से ही मुंबई में हैं और महाराष्ट्र की अस्मिता के लिए अपना खू’न भी दे सकती हैं।

सामना (Saamana) में लिखा है कि मुंबई की तुलना ‘पाक अधिकृत’ कश्मीर से करना और मुंबई पुलिस को मा’फिया आदि बोलकर खाकी वर्दी का अ’पमान करना बिगड़ी हुई मानसिकता के लक्षण हैं। महाराष्ट्र की 11 करोड़ मराठी जनता और मुंबई का अप’मान मतलब देशद्रो’ह जैसा अप’राध प्रतीत होता है। लेकिन जब ऐसा अप’राध करनेवाले लोगों के साथ राष्ट्रभक्त मोदी सरकार का गृह मंत्रालय सुरक्षा कवच देकर खड़ा होता है, तब हमारे 106 शही’द स्वर्ग में आंसू बहा रहे होंगे।

‘राजद्रोह का समर्थन करना हरामखोरी’

सामना (Saamana) ने कहा कि राजनीतिक एजेंडे को सामने लाने के लिए देशद्रो’ही पत्रकार और सुपारीबाज कलाकारों के राजद्रोह का समर्थन करना भी ‘हरामखोरी’ ही है। मतलब माटी से बेईमानी ही है। जो लोग महाराष्ट्र के बेईमानों के साथ खड़े हैं, उन्हें 106 शही’दों की बद्दुआ तो लगेगी ही, लेकिन राज्य की 11 करोड़ जनता भी उन्हें माफ नहीं करेगी! ‘मुंबाई’ माता का अप’मान करने वालों के नाम महाराष्ट्र के इतिहास में डामर से लिखे जाएंगे। बेईमान कहीं के! ये लोग अब राष्ट्रभक्ति का तुनतुना न बजाएं, बस इतनी ही अपेक्षा है!

इशारों में कंगना को बताया बेईमान और मानसिक विकृत

मराठी लोगों से बेईमानी करने वाले मानसिक विकृत लोगों से मराठी मानुष हमेशा लड़ता रहा है। कोई भी आए और महाराष्ट्र की मराठी राजधानी पर टपली मारे, कोई ऐरा-गैरा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अरे-तुरे करके चुनौती दे, तो इसके विरोध में पूरे महाराष्ट्र को एक होना चाहिए। महाराष्ट्र संतप्त है लेकिन भारतीय जनता पार्टी मुंबई और राज्य के मुख्यमंत्री का अपमान करनेवालों का सीधे-सीधे समर्थन कर रही है।

‘मुंबई देवी का अप’मान’

मुंबई पर अपना हक जतानेवाले बहुत सारे लोग आगे आए हैं। लेकिन मुंबई ‘मुंबाई’ देवी का ही प्रसाद है। देवी स्वरूप मुंबई मां की तुलना पाक अधिकृत क्षेत्र से करके हमारी देवी का ही अप’मान किया गया। हिंदुत्व और संस्कृति का, धर्म और 106 शही’दों के त्याग का अप’मान किया गया तथा ऐसा अपमान करके छत्रपति शिवराय के महाराष्ट्र पर न’शे की पिचकारी फेंकने वाले व्यक्ति को केंद्र सरकार विशेष सुरक्षा की पालकी का सम्मान दे रही है।

‘मुंबई को बद’नाम और खोखला करने की साजिश’

मराठीजनों, मुंबादेवी का यह अप’मान जिसे प्रिय है, ऐसे लोग दिल्ली में और महाराष्ट्र के विधिमंडल में बैठे हैं इसलिए मुंबई पर खत’रा बना हुआ है। मुंबई को पहले बदनाम करो, फिर उसे खोखला करो। मुंबई को पूरी तरह से कं’गाल करके एक दिन इसे महाराष्ट्र से तोड़ने की करतूत नए सिरे से रची जा रही है।

सामना में लिखा है कि अमदाबाद, गुड़गांव, लखनऊ, वाराणसी, रांची, हैदराबाद, बेंगलुरु और भोपाल जैसे शहरों के बारे में अगर कोई अपमा’नजनक बयान देता तो केंद्र ने उसे वाइ श्रेणी सुरक्षा की पालकी दी होती क्या? यह महाराष्ट्र के भाजपाई स्पष्ट करें। देवेंद्र फडणवीस, प्रधानमंत्री मोदी या गृहमंत्री शाह का नाम ‘अरे-तुरे’ से उच्चार करनेवाले टीनपाट चैनलों के मालिकों को भाजपा वालों ने ऐसा समर्थन दिया होता क्या?

‘सीमा पर हिम्मत दिखाई होती तो बेइज्जती न होती’

मोदी सरकार को निशा’ने पर लेते हुए सामना में लिखा गया कि आज जिस प्रकार से सारे भाजपा वाले महाराष्ट्रद्रोहियों के साथ खड़े हैं, उसी विश्वास से हमारी सीमा में घुसे चीनी बंदरों के बारे में हिम्मत दिखाई होती तो लद्दाख तथा अरुणाचल की सीमा पर देश की बेइज्जती ना हुई होती। देश की इज्जत तार-तार न हो, इसके लिए राष्ट्रभक्तों ने संयम रखा हुआ है, बस इतना ही।

‘महाराष्ट्र की अस्मिता और सम्मान के लिए दे सकती हूं खू’न’

कंगना ने लगातार तीन ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, ‘मैं मानती हूं महाराष्ट्र ने मुझे सब कुछ दिया है, मगर मैंने भी महाराष्ट्र को अपनी भक्ति और प्रेम से एक ऐसी बेटी की भेंट दी है जो महाराष्ट्र शिवाजी महाराज की जन्मभूमि में स्त्री सम्मान और अस्मिता केलिए अपना ख़ू’न भी दे सकती है।

मैं बारह साल की उम्र में हिमांचल छोड़ चंडीगढ़ हॉस्टल गई। फिर दिल्ली में रही और सोलह साल की थी जब मुंबई आई, कुछ दोस्तों ने कहा मुंबई में वही रहता है जिसे मुम्बादेवी चाहती हैं, हम सब मुम्बादेवी देवी के दर्शन करने गए, सब दोस्त वापस चले गए और मुम्बादेवी ने मुझे अपने पास ही रख लिया।

रानी लक्ष्मीबाई के साहस, शौर्य और बलिदान को मैंने फ़िल्म के जरिए जिया है। दुख की बात यह है मुझे मेरे ही महाराष्ट्र में आने से रोका जा रहा है मैं रानी लक्ष्मीबाई के पद चिन्हों पर चलूगी ना डरूंगी, ना झुकूंगी। गलत के ख़िलाफ़ मुख़र होकर आवाज़ उठाती रहूंगी।

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