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कोरोना काल में मोदी युधिष्ठिर का रोल निभा रहे हैं  : गजेन्द्र चौहान

महाभारत व रामायण के अलावा अन्य बाकी सभी पुराने क्रार्यक्रमों को दर्शक पहली की तरह प्यार कर रहेYogesh Kumar Soni हैं। इन कार्यक्रमों में काम करने वाले सभी पात्रों में कुछ फिल्मी दुनिया में चले गए तो कुछ राजनीति में तो बाकी टीवी की दुनिया से अलविदा ले गए थे। इन कार्यक्रमों में जिन लोगों ने रोल किए हैं, दर्शकों को उनके बारे में जानने की जिज्ञासा बनी हुई है  कि वो क्या कर रहे हैं। हर किरदार अमर भी हो गया। महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेन्द्र चौहान ने उस समय अपने किरदार में जलवे बिखरते हुए वाह-वाही लूटी थी और आज हर मंच पर आक्रामक तरीके से अपनी बात रखते हैं। फिल्म और टेलीविजन संस्थान के पूर्व अध्यक्ष और अभिनेता गजेन्द्र चौहान से योगेश कुमार सोनी की एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश…

लॉकडाउन की वजह से लोग पुराने दौर में चले आए। पहले की तरह आप लोगों को प्यार मिल रहा है। कैसा लग रहा है आपको?

(हंसते हुए)…पहले महाभारत की वजह से लॉकडाउन हुआ था और अब लॉकडाउन की वजह से महाभारत। …एक बार फिर पुराने दौर में लौट आई दुनिया। हम कोरोना को शकुनी के रुप में देख रहे हैं। उसने महाभारत काल में परेशान किया और कोरोना कलयुग में क्योंकि शकुनी में हस्तिनापुर का नाश करने का सोचा था और कोरोना नें पूरी दुनिया का। कौरवों और पांडवों की आपस में बहुत लड़ाई होती थी लेकिन जब किसी बाहर वाले से झगडा होता था तो हम मिलकर लड़ते थे। इस ही तर्ज पर सभी राजनीतिक दलों व नेताओं को मिलकर काम करने की जरुरत है क्योंकि यहां मानव जाति की रक्षा ओर सुरक्षा का सवाल है। इसके अलावा पिछले तीन दशकों में दुनिया पूरी तरह बदल चुकी थी। लोगों के पास सब कुछ था बस समय नही था और अब समय ही समय है और कुछ नही।

कोरोना वायरस से बढ़ती परेशानी को कैसे देख रहे हैं आप?

कोरोना एक अज्ञात व अदृश्य राक्षस की तरह है। महाभारत व रामायण काल में भी ऐसे शत्रु थे और ऐसे शत्रु की चाल समझने के लिए खुद को गायब होना पडता है। कोरोना को हम कलयुग का सबसे बड़ा शत्रु मान रहे हैं क्योंकि यह भी अज्ञात शत्रु की तरह नही दिख रहा। और इससे बचने के लिए हमें भी गायब होने अर्थात घर में रहने की जरुरत है जिससे हम इसकी चाल समझकर इससे लड सकें। साथ ही यह भी समझना होगा कि जान है तो जहान है। यदि कुछ दिनों तक घर में रहकर आपकी जिंदगी बचती है तो कोई बुराई नही है। प्रधानमंत्री बहुत अच्छे से इससे लड़ रहे हैं और उनके कहने पर देशवासियों ने अमल भी किया है।

लॉकडाउन के बाद फिल्म और टीवी जगत की स्थिति कैसी होगी। इस विषय में आप क्या सोचते हैं?

चुनौती सबके के लिए समान होगी। इस बात में कोई दोराय नही हैं कि देश के हालात एकदम पहले जैसे नही हो पाएंगे। मुझे लगता है कि बॉलीवुड और टीवी जगत एक बडा व्यवसाय है और देश की जनता हमेशा से प्यार करती रही है। जल्दी ही गाडी पटरी पर लौटेगी। बाकी ऐसे समय को सभी कलाकार अपने परिवार के साथ गुजार रहे हैं। समय के अभाव के चलते जो कलाकार घर पर समय नही देते थे अब उन्हें यह एक अच्छा मौका मिल रहा है। साथ ही इस दौरान हम एक बात यह समझ चुके हैं कि कम पैसों में भी अच्छा जीवन-यापन हो सकता है। जिन लोगों को यह लगता था कि मैं वो खाये या वहां जाए बिना जिंदा नही रह सकता,अब उनको सब समझ में आ गया होगा कि सादा जीवन भी काटा जा सकता है। इसके अलावा एक बात यह भी कहना चाहूंगा कि जब भी देश पर संकट आया है तो बॉलीवुड ने हमेशा आर्थिक तौर पर देशवावासियों की मदद की है।

रामायण व महाभारत के पात्रो को लोग उसके किरदार के रुप में मानने लग गए थे। अरुण गोविल को राम,आप को युधिष्ठिर व अन्य सभी को वो ही सब। इस छवि को कैसे जीते थे आप?

दरअसल उस दौर में टीवी का दुनिया का भी निर्माण हो रहा था। पूरे मौहल्ले या एरिया में मात्र एक या दो घरों में ही टीवी होता था तो सब लोग बेहद चाहत के साथ कार्यक्रम देखते थे। ज्यादा टीवी देखने को मिलता नही था तो रामायण,महाभारत या फिल्मों के किरदार लोगों के दिल और दिमाग पर छप जाते थे। जो किरदार पोजेटिव रोल करते थे उनकों बहुत इज्जत मिलती और और जो नेगेटिव रोल करते थे उन्हें लोग अच्छी निगाह से नही देखते थे चूंकि वो उनमें वो ही रुप देखने लगे थे जो टीवी में आते थे ।कुछ लोग तो भगवान तक मानने लगते थे। एक समय ऐसा आया था लोग हमें काल्पनिक नाम से ही बुलाते थे और हम भी अपना असली नाम भूल गए थे। यदि कोई हमें असली नाम से पुकारता भी तो एक बार को तो बेहद अजीब लगता था। लोग हमारी नही निभाए हुए पात्रो की इज्जत करते हैं।

आप ने लगभग तीन वर्षों तक फिल्म और टेलीविजन संस्थान(एफटीआईआई) बतौर अध्यक्ष पद कार्यभार संभाला था। कैसा अनुभव रहा?

जब मैंने वहां काम संभाला तो कुछ लोगो को यह लगा कि यह टीवी में करने वाला आदमी कैसे फिल्म के लोगों को कैसे संभालेगा। और जब मैंने वहां काम करना शुरु किया तो सबको अपने काम से जबाव दिया। जो बच्चे पिछले सात-आठ वर्षों से वहीं अटके हुए थे उनको अपने कार्यकाल में कामयाब करने मुकाम तक पहुंचाया। मैंने वहां टीचर्स की नियुक्ति करके स्टॉफ पूरा किया। मेरे पदभार संभालने से पहले वहां मात्र 40 प्रतिशत ही स्टाफ था। जब से लेकर आज वहां का बेहतर रिजल्ट सामने आ रहा है।

बी.आर.चोपडा के बाद भी नए पात्रों को लेकर महाभारत बनी हैं लेकिन आप लोगों की नई पीढ़ी भी आपको उतना ही पसंद कर रही है जितना उस समय के लोग।

बदलते दौर में सब बदला। पहले ज्यादा तकनीक न होने के कारण शब्दों और वाक्यों की गंभीरता का महत्व समझा जाता था लेकिन अब तकनीकियां ज्यादा बढ़ने के कारण म्यूजिक,एफेक्ट अन्य तमाम ऐसी चीजों का प्रयोग किया जाने लगा जिससे मुद्दे उभर नही पाता। दूसरा कारण यह भी है कि लोगों ने पुराने कार्यक्रमों को इतना दिल से देखा था कि वो आज भी हमें पहले की तरह प्यार कर रहे हैं। बाकी तो बदलते दौर में हर चीज बदल ही रही है। हर कोई बेहतर ही करता है।

आपकी ओर से कोई संदेश?

मैं यह बात हाथ जोडकर कहना चाहता हूं कि कृप्या करके कोरोना वॉरियर्स की इज्जत करें। पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, डॉक्टर, मीडियाकर्मी के अलावा वो सभी जो धरातल पर अपनी जिंदगी खतरे में डालकर हमारी सुरक्षा कर रहे हैं सख्त कानून की वजह से नही उनकी मेहनत की वजह से उनकी इज्जत करें। जब कोई डॉक्टर पीपीई किट पहन लेता है तो लगातार कई घंटे, खाना या चाय तो छोडो पानी तक भी नही पी सकता और न ही बाथरुम जा सकते। यदि हम इनका सम्मान नही कर सकते तो हमें अपमान करने का भी कोई हक नही है। इसके अलावा मैं यह भी कहना चाहता हूं और हमेशा से इस बात की मांग करता आया हूं कि स्कूलों में भी रामायण और महाभारत दिखाने का एक अलग से पीरियड  होना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुडी रहे। दिल्ली के हौज खास में भी एक स्कूल हैं मैं वहा बतौर मुख्य अतिथि के रुप में गया था,वहां रामायण व महाराभारत को एक विषय में रुप दिखाया जाता है बाद में अन्य विषयों की तरह इसकी भी परीक्षा होती है। यह कॉनसेप्ट मुझे बहुत अच्छा लगा था।

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