Anushka-Sharma

महिलाओं को कमतर न आका जाए : अनुष्का शर्मा

कोरोना काल में हर काम-धंधे पर फर्क पडा है। आम से लेकर खास तक इसकी चपेट में आया है। कुछ क्षेत्रों Yogesh Kumar Soniमें पूरे दिन या 24 घंटे काम होता है जिनमें से बॉलीवुड बेहद प्रमुख माना जाता है। चंकाचौंध  वाली इस मायानगरी में जो काम करने पर ही व्यक्ति अपने पहचान बनाकर अपना करियर बनाता है। इसके अलावा हर किसी को सोचने का नजरिया अलग होता है। बॉलीवुड में एक्टिंग से अपने लोहा मनवाने वाली अनुष्का शर्मा का कई मामलों में योगेश कुमार सोनी से कई मुद्दे पर बातचीत की। पेश है कुछ मुख्य अंश…

नागालैंड में कुत्ते के मांस की बिक्री को प्रतिबंधित पर आपने खुशी जाहिर की है। क्या कारण है?

जो लोग मांसाहारी हैं मुझे उनसे कोई दिक्कत नही हैं लेकिन हर चीज का मांस खाना बेहद अजीब लगता है। मैं जानवरों से लगाव रखती हूं और मैं डॉग लवर हूं। दुनिया कहती और मानती है डॉग से वफादार कोई जानवर नही होता और लोग इसका मांस क्यों खाते हैं। मैं इस मामले पर नागालैंड की राज्य सरकार की तारीफ करुंगी जिसने लोगों की भावनाओं को समझने के लिए यह साहसी कदम उठाया।

कोरोना से बॉलीवुड जगत थम गया है और यदि फिल्म नगरी मुंबई की बात करें तो हालात अभी भी बहुत अस्थिर हैं। ऐसी स्थिति में आप कैसे समय व्यतीत कर रही हैं।

कोरोना से आई समस्या से हर कोई परेशान है। बॉलीवुड ही पर क्षेत्र पर प्रभाव पडा है और यदि हम ऐसे समय पर आर्थिक नुकसान या अन्य किसी परेशानी के बार में सोचकर परेशान हो रहे हैं तो यह हमारी मूर्खता होगी। कम से कम हम अपने घर पर तो हैं और सरकार अनलॉक करते हुए सभी को रोजी-रोटी की भी व्यवस्था कर रही है।लेकिन साथ-साथ हमें सुरक्षा की भी जरुरत हैं। जरुरी नही कि हम कानून के डर की वजह से कानून का पालन करें।अब हमें अपनी सुरक्षा स्वंय उठानी पडेगी।

पिछले दिनों आपने एक ब्यान में यह कहा था कि सिनेमा जगत में महिलाओं कमतर आंका जाता है। लेकिन आपने स्वयं एक शानदार सफर तय किया है उसके बाद इस बात का क्या अर्थ है?

अपने अनुभव के आधार पर मुझे ऐसा लगा कि फिल्मी जगत में महिलाओं को पुरुषों को कम समझा जाता है। जब मैं अभिनेत्री बनी तभी सोच लिया था कि मैं इस मामले को लेकर बडा बदलाव लाऊंगी। पिछले दिनों मेरी और मेरे भाई कर्णेश की इस टॉपिक पर वेब सीरिज इस ही तरह के मुद्दे पर आधारित है। मैं और कर्णेश ऐसा कंटेंट लाना चाहते थे जिसमें महिलाओं की शक्ति और उनकी ऊर्जा को सेलिब्रेट किया जा सके। किसी भी क्षेत्र में सफल होने पर महिला को दोगुनी मेहनत होती है। नौकरी करने या अन्य किसी प्रोफेशन में काम करने के साथ-साथ घर को संभालना बडी चुनौती मानी जाती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी आप भी अपने बैनर (क्लीन स्लेट फिल्म्स) तले काम काम रही हैं। कैसा अनुभव है आपका यहां पर?

पाताल लोक की सफलता के बाद ‘बुलबुल’ से भी अच्छा रिसपोंस मिल रहा है। इस वेब सीरीज की कहानी अंधविश्वासों और टोटकों से प्रेरित हैं। इस वेब सीरीज में अविनाश तिवारी, तृप्ति डिमरी, राहुल बोस, परमब्रता और पाओली डैम ने अहम भूमिका निभाई है। इसमें बाल विवाह से होने वाले कू-प्रभाव बताए गए हैं। कहानी एक छोटी बच्ची बुलबुल और सत्या की है। बुलबुल की शादी बचपन में ही अपने से कई ज्यादा बड़े उम्र वाले आदमी महेंद्र से होती है। मैंने समाज की को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बडी बजट का फिल्में बनने लगी। कहीं इससे सिनेमा जगत को खतरा तो नहीं?

बढ़ती लोकप्रियता को देखकर बॉलीवुड की तर्ज पर इन ऐपों के लिए बनने वाली फिल्मे या सिरियलों के लिए अब बडा बजट प्रयोग होने लगा। प्रारंभिकता मे ऐसा नही था लेकिन अब बडे कलाकार व सेटअप की वजह से बजट बढ़ने लगा। जब सैफ बडे कलाकार इसमें उतर चुके है तो यह बात स्वाभाविक है कि जो फिल्मे बन चुकी या बन रही है या बनेगीं तो निश्चित तौर पर ही उच्च स्तरीय फिल्मे ही बनेंगी। जैसे कि परमाणु, सक्रेड गेम्स, लस्ट स्टोरी, घाउल, लव पर स्केयरफीट, ब्रजमोहन अमर रहे व ब्रहामण नमन जैसी फिल्मे बन चुकी इसके तमाम फिल्मों व वेब सिरिज पर काम चल रहा है। इसके अलावा बात करें सिनेमा जगत को तो उसको कोई खतरा नही हैं। हमारे देश में हर तरह के दर्शक हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म एक वर्ग तक ही सीमित है और पर्दे पर फिल्म का मजा अलग ही होता है जिसके दर्शक बडी संख्या में हैं।

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