फ्रीडम ऑफ स्पीच पर कंगना रनौत ने कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो से पूछा सवाल

New Delhi: बॉलिवुड ऐक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) अपनी फिल्मों से ज्यादा अपने बयानों के कारण आजकल चर्चा में ज्यादा हैं। कंगना राजनीति और धार्मिक मुद्दों पर बेबाकी से सोशल मीडिया पर अपनी राय रख रही हैं।

हाल में फ्रांस (France News) में हुई घटनाओं पर भी कंगना (Kangana Ranaut) का रिऐक्शन आया है जिसमें हजरत मोहम्मद का कार्टून स्कूल में दिखाए जाने के बाद एक टीचर की गला रे’तक’र ह’त्या कर दी गई थी। इसी मुद्दे पर कंगना ने कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो (Canada PM Justin Trudeau) से भी सवाल किया है।

क्या कहा था ट्रूडो ने?

दरअसल जस्टिन ट्रूडो (Canada PM Justin Trudeau) ने हाल में हजरत मोहम्मद का कार्टून बनाए जाने के मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि हम सभी को बोलने का अधिकार है लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच का यह अधिकार असीमित नहीं है और इसकी कुछ सीमाएं हैं। ट्रूडो ने कहा था कि किसी को भी कहीं भी आ’ग लगाने का अधिकार नहीं है। हालांकि कंगना रनौत (Kangana Ranaut) जस्टिन ट्रूडो के इस बयान से सहमत नजर नहीं आ रही हैं।

ट्रूडो से पूछा सवाल

कंगना (Kangana Ranaut) ने कनाडाई पीएम (Canada PM Justin Trudeau) को टैग करते हुए और उनके बयान को शेयर करते हुए लिखा, ‘प्रिय जस्टिन, हम एक आदर्श दुनिया में नहीं रहते हैं। लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए लेकिन वह अपनी सीमाएं लांघते हैं, ड्र;ग्स लेते हैं, दूसरों का शो;षण करते हैं, भावनाएं आहत करते हैं। अगर हर छोटे क्रा;इम की सजा हर एक का सिर कलम करना हो जाए तो हमें एक प्रधानमंत्री की या किसी कानून की जरूरत ही क्या है?’

कंगना बोलीं- 6 महीने के लिए जेल भेज दो

कंगना (Kangana Ranaut) ने इस मुद्दे पर आगे ट्वीट करते हुए लिखा, ‘अगर कोई भी राम, कृष्ण, मां दुर्गा या किसी अन्य भगवान चाहे वह अल्लाह हों या ईसा का कार्टून बनाए तो उसे सजा मिलनी चाहिए। अगर वह ऐसा वर्क प्लेस या सोशल मीडिया पर करता है तो उन्हें सस्पेंड कर देना चाहिए। अगर कोई इस तरह बेइज्जती करता है तो उन्हें खुलेआम 6 महीने के लिए जेल भेज देना चाहिए।’

‘नास्तिक होने का अधिकार है तो…’

कंगना (Kangana Ranaut) ने आगे लिखा, ‘लोगों को नास्तिक होने का अधिकार है। मैंने आपके भगवान में विश्वास नहीं करने का रास्ता चुना है। यह ठीक है और यह कोई जुर्म नहीं है। मैं अपने विचार रख सकती हूं और बता सकती हूं कि मैं आपके धर्म में विश्वास नहीं रखती हूं। यही फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन है, मेरी आवाज के साथ जीना सीखिए। आपने मेरा गला का;टने के बारे में सीखा है क्योंकि आपके पास मेरे सवालों का जवाब नहीं है, खुद से पूछिए।’

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