सुप्रीम कोर्ट की वकील खुशबू जैन बोलीं- ज्यादा एक्सपोजर आर्यन की छवि बर्बाद कर सकता है

सुप्रीम कोर्ट की वकील खुशबू जैन बोलीं- ज्यादा एक्सपोजर आर्यन की छवि बर्बाद कर सकता है

क्रूज ड्रग्स पार्टी मामले में आर्यन खान (Aryan Khan bail) की जमानत पर 13 अक्टूबर को सुनवाई हुई। लेकिन जिरह पूरी न हो पाने के कारण सेशंस कोर्ट ने सुनवाई 14 अक्टूबर तक के लिए टाल दी। आज 12 बजे आर्यन के केस पर सुनवाई शुरू होगी, जिसमें उनकी पैरवी वकील अमित देसाई (Amit Desai) करेंगे। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की वकील खुशबू जैन (Khushboo Jain) ने आर्यन ड्रग्स केस पर कहा है कि अधिकारियों को नशीले पदार्थ की तस्करी के लिए असल में जिम्मेदार लोगों पर ध्यान देना चाहिए।

हमारे सहयोगी ईटाइम्स के साथ खास बातचीत में खुशबू जैन ने इस केस पर विस्तार से बात की और यह भी बताया कि उनका इस पर क्या मानना है। उन्होंने कहा, ‘आर्यन खान का मामला विचाराधीन है। हर रोज कुछ न कुछ ऐसे नए घटनाक्रम हो रहे हैं, जिसमें नई गुत्थी निकलकर सामने आ रही हैं। लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ड्रग्स के इस अवैध व्यापार में शामिल हैं।

उन लोगों पर ज्यादा ध्यान दें जो खरीद-फरोख्त में शामिल

खुशबू जैन ने कहा कि जो भी संबंधित अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं, उन्हें असल में उन लोगों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए जो ड्रग्स की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘अब समय आ गया है कि एजेंसियां ड्रग्स के सोर्सिंग में शामिल कार्टल पर फोकस करें। यह बेहद जरूरी है कि फाइनेंसर्स और एक्सपोर्टर्स को गिरफ्तार करके ड्रग्स की सप्लाई लाइन को ही खत्म कर दिया जाए।’

NDPS Act (1985) के तहत सजा

खुशबू जैन ने आगे आर्यन मामले में एनडीपीएस ऐक्ट 1985 पर बात करते हुए कहा, ‘जहां तक एनडीपीएस अधिनियम (1985) का संबंध है, तो अपराधों के लिए सजा बेहद लचीली है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपराध में कितनी मात्रा शामिल है। ‘छोटी मात्रा’ से जुड़े उल्लंघनों के लिए जेल की कठोर सजा हो सकती है, जिसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माना जो 10,000 रुपये तक हो सकता है या फिर ये दोनों भी हो सकते हैं।

‘आर्यन को मिलनी चाहिए बेल’

खुशबू जैन ने अपनी कानूनी राय देते हुए कहा कि आर्यन खान को बेल मिलनी चाहिए। वह बोलीं, ‘अगर हम यह स्वीकार कर भी लें कि आर्यन ने ड्रग्स का सेवन किया था तब भी एनडीपीएस ऐक्ट (नशे की लत के रूप में वर्गीकृत होने पर) अभियोजन से प्रतिरक्षा देता है। खुशबू जैन ने आगे कहा कि कस्टडी और न्यायिक प्रक्रिया में अत्यधिक एक्सपोजर एक निर्दोष व्यक्ति की छवि को खराब कर सकता है।