Repo Rate Reduction By Rbi

RBI ने रीपो रेट घटाकर की 4%, EMI पर होगा फायदा और FD पर घाटा!

हाइलाइट्स

  • -RBI ने रीपो रेट में 0.40 फीसदी कमी कर दी है, जिससे EMI का बोझ घट सकता है
  • -जब बैंकों की लागत कम होती है तो वे सस्ता कर्ज देते हैं और लोन पर ब्याज घटाकर EMI पर फायदा देते हैं
  • -FD पर ब्याज कम हो सकता है, ऐसे में सीनियर सिटिजन्स को नुकसान हो सकता है
  • -लोन के नए ग्राहकों के लिए ब्‍याज दर में कटौती का तुरंत फायदा मिलेगा

New Delhi: कोरोना के लॉकडाउन से पस्त हुई इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए सरकार और RBI लगातार कदम उठा रहे हैं। लॉकडाउन में तीसरी बार RBI ने कुछ राहतों का ऐलान किया, जिसमें EMI का बोझ कम करने की कोशिशें अहम रहीं।

RBI ने रीपो रेट में 0.40 फीसदी कमी कर दी है, जिससे EMI का बोझ घटेगा। दुनिया के अन्‍य केंद्रीय बैंक भी कोरोना से जुड़ी मंदी से निपटने के लिए ब्‍याज दरों में कटौती का ऐलान कर चुके हैं। आरबीआई के इस कदम से लोन लेने वालों को राहत मिलेगी लेकिन FD पर फायदा घट सकता है।

रीपो रेट घटने से कैसे सस्ता होता है कर्ज?

रीपो रेट में 0.40% की कटौती कर इसे 4 पर्सेंट कर दिया गया है। यानी बैंकों को आरबीआई से अब पहले के मुकाबले सस्ता कर्ज मिलेगा, जिसका फायदा वे ग्राहकों तक सस्ते कर्ज के रूप में पहुंचा सकते हैं। जब किसी देश का केंद्रीय बैंक रीपो रेट घटाता है तो इसका सीधा मतलब है कि बैंकों को सस्ती दर पर फंड मिलेगा। बैंक इसका फायदा अपने ग्राहकों को देते हैं। जब बैंकों की लागत कम होती है तो वे सस्ता कर्ज देते हैं और लोन पर ब्याज घटाकर EMI घटाकर ग्राहकों को फायदा पहुंचाते हैं।

दूसरी तरफ FD पर वे कम ब्याज देंगे। ऐसे में सीनियर सिटिजन्स को नुकसान हो सकता है जो खासतौर पर ब्याज से होने वाली आय के सहारे खर्च चलाते हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि ब्याज दर घटने से नए, मौजूदा लोनधारकों और और फिक्स्ड डिपॉजिट करने वालों पर क्या असर पड़ सकता है।

लोन की EMI पर असर?

आरबीआई ने ब्याज दरें घटा दी हैं तो ईएमआई भी घटने के चांस बनते हैं। नया लोन लेना भी सस्ता होगा। रीपो रेट से जुड़े लोन की नई व्यवस्था में कैसे आपकी EMI कैसे घटेगी, यहां समझिए…

मौजूदा ग्राहक

अगर लोन एक्‍सटर्नल बेंचमार्क (रीपो रेट, ट्रेजरी बिल) से लिंक है, तो आपकी ईएमआई में अगले तीन महीनों में कमी दिख सकती है।

अगर लोन MCLR से जुड़ा है तो ईएमआई का बोझ तभी कम होगा जब बैंक लोन की दरें घटाएंगे क्योंकि एमसीएलआर केवल रेट कट जैसे एक्‍सटर्नल फैक्‍टर पर निर्भर नहीं करता है। बैंक के अंदरूनी कारकों पर भी इसका असर पड़ता है। रीसेट की तारीख आती है तब बदलता है MCLR लोन।

अगर लोन बेस रेट या बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर) से जुड़े हैं, तो अपने होम लोन को नई व्यवस्था में स्विच कराने पर विचार करना चाहिए। तभी पॉलिसी रेट में कटौती का असर तुरंत दिखाई देगा।

नए ग्राहक

नए ग्राहकों के लिए ब्‍याज दर में कटौती का तुरंत फायदा मिलेगा। एक्‍सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े लोन में यह देख लेना जरूरी है कि बैंक एक्‍सटर्नल बेंचमार्क के ऊपर कितना मार्जिन ले रहे हैं और रिस्‍क प्रीमियम कितना है।

FD पर असर

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वालों खासतौर से सीनियर सिटिजन्स की आय और घट सकती है। मार्च के महीने में RBI ने जब रेट कट किया था, उसके बाद कई बैंकों ने फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर ब्‍याज दरें घटा दी थीं। ऐसे में फिक्‍स्‍ड इनकम के लिए पीपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम और पीएम वय वंदना योजना में पैसा लगाया जा सकता है।

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