मिनिमम बैलेंस के झंझट से चाहिए मुक्ति.. तो खुलवांए जीरो बैलेंस अकाउंट, जानें सबकुछ

New Delhi: 1 अगस्त से देश के कुछ प्राइवेट और सरकारी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) को लेकर नया नियम लागू किया है। इसके मुताबिक अगर आपने अकाउंट में मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance Maintane) मेंटेन नहीं किया तो आपको फाइन देना होगा।

ऐक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance) को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके मुताबिक मिनिमम बैलेंस (Minimum Balance Maintane) मेंटेन नहीं रहने पर चार्ज लगेगा और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका अकाउंट किस तरह का है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने मिनिमम बैलेंस की सीमा बढ़ा दी है। पहले यह 1500 रुपये थी जिसे बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है।

मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने की जरूरत नहीं

अभी भी एक अकाउंट ऐसा है जिसमें बैलेंस (Minimum Balance) मेंटेन करने की कोई जरूरत नहीं होती है। इसे जीरो बैलेंस अकाउंट कहते हैं। अगर आप सैलरीड एंप्लॉयी हैं तो अमूमन आपका अकाउंट जीरो बैलेंस अकाउंट (Zero Balance Account) होगा और आपको मिनिमम बैलेंस मेंटेन करने की जरूरत नहीं होती है।

ज्यादातर बैंक सैलरीड एंप्लॉयी को जीरो अकाउंट (Zero Balance Account) खोलकर देते हैं। हालांकि नौकरी बदलने के बाद 90 दिनों का समय होता है। उसके बाद यह अकाउंट सेविंग में कंवर्ट हो जाता है। दूसरी नौकरी में भी अगर आप सेम अकाउंट को जारी रखते हैं तो जीरो अकाउंट का स्टेटस जारी रहता है।

ज्यादातर बैंक जीरो बैलेंस अकाउंट की सुविधा देते हैं

अगर आप अपने लिए अलग से किसी भी बैंक में अकाउंट खुलवाते हैं तो यह बेसिक सेविंग्स अकाउंट ( Basic savings bank deposits (BSBDs) कहलाता है। मिनिमम बैलेंस का नियम ऐसे अकाउंट पर लागू होता है। आप चाहें तो अपने लिए जीरो बैलेंस अकाउंट भी खुलवा सकते हैं। इसके लिए KYC (know your customer) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

ज्यादातर बैंक जीरो बैलेंस अकाउंट (Zero Balance Account) की सुविधा देते हैं। हालांकि जीरो बैलेंस अकाउंट को लेकर अलग-अलग बैंकों की अपनी पॉलिसी हो सकती है। सैलरी अकाउंट के कंडिशन में बैंक खुद यह सुविधा ऑफर करते हैं। सेविंग्स अकाउंट जीरो अकाउंट होगा या नहीं यह बैंक फैसला करता है।

एकसाथ दोनों अकाउंट की सुविधा नहीं

स्टेट बैंक एकसाथ सेविंग और जीरो बैलेंस (Zero Balance Account) की सुविधा नहीं देता है। अगर आप एसबीआई में जीरो बैलेंस अकाउंट खुलवाना चाहते हैं और आपका बैंक में पुराना अकाउंट है तो 30 दिनों के भीतर पुराने अकाउंट को सरेंडर करना होगा, तब जीरो बैलेंस अकाउंट की सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है।

फीचर्स में थोड़ा अंतर

जीरो बैलेंस और सेविंग्स अकाउंट एक जैसे ही होते हैं। इनके फीचर्स में कुछ अंतर हो सकता है। जैसे कि जीरो बैलेंस अकाउंट में मंथली फ्री ट्रांजैक्शन, ट्रांजैक्शन लिमिट, विदड्रॉल लिमिट हो सकती है। सेविंग अकाउंट के साथ आजादी होती है। इसके अलावा सेविंग अकाउंट के साथ डीमैट में कंवर्ट करने, नेट बैंकिंग की सुविधा, फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सुविधा होती है। वैसे यह बैंक टू बैंक निर्भर करता है कि वे अपने कस्टमर्स को क्या-क्या सुविधा दे रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *