वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खराब अर्थव्यवस्था को बताया ‘ईश्वर की देन’, ट्विटर पर हुईं ट्रोल!

New Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने गुरुवार को कहा कि कोरोना महामारी ने जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) पर काफी बुरा असर डाला है। 41वीं जीएसटी काउंसिल की मीटिंग (14th GST Counsil Meeting) के बाद मीडिया के सामने निर्मला सीतारमण ने ये बात कही।

उन्होंने (FM Nirmala Sitharaman) ये भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था (Economy) कोरोना के रूप में सामने आए असाधारण ‘एक्ट ऑफ गॉड’ (Act of God) का सामना कर रही है, जिसकी वजह से इस साल अर्थव्यवस्था के विकास की दर सिकुड़ सकती है।

वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015 में जीएसटी क्षतिपूर्ति अंतर 2.35 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। यह इसलिए है क्योंकि केंद्र को कोरोना द्वारा प्रभावित आर्थिक गतिविधियों के कारण जीएसटी उपकर से केवल 65,000 करोड़ रुपये एकत्र करने की उम्मीद है। बता दें कि 3 लाख रुपये जीएसटी कलेक्शन की उम्मीद थी।

ट्विटर पर ट्रेंड हुआ ‘एक्ट ऑफ गॉड’

निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने ‘एक्ट ऑफ गॉड’ (Act of God) का जिक्र किया ही था कि वह ट्विटर पर ट्रेंड भी होने लगा। लोग उस पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं शेयर करने लगे। कोई आलोचना करने लगा, तो किसी ने भगवान की तस्वीरें भी शेयर करनी शुरू कर दीं।

कुछ यूजर निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) की ओर से एक्ट ऑफ गॉड (Act of God) कहे जाने को पल्ला झाड़ने जैसा कह रहे हैं। वह कह रहे हैं कि मोदी सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए ऐसा कह रही है। उनका कहना है कि ऐसी बातें दिखाती हैं कि मोदी सरकार फेल साबित हुई है।

स्वीडन की अपसला यूनिवर्सिटी में पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिसर्च के प्रोफेसर अशोक स्वैन लिखते हैं कि यह आपको गॉड मोदी का एक्ट है। यानी वह कहना चाह रहे हैं कि यह मोदी सरकार की वजह से हुआ है, ना कि भगवान की वजह से।

कुछ यूजर्स ने तो निर्मला सीतारमण की तुलना ओह माय गॉड फिल्म के किरदारों से कर दी है और लिखा है कि इन सभी लोगों ने भक्तों को भगवान के नाम पर बेवकूफ बनाया है।

एक यूजर तो ऐसा भी है, जिसने निर्मला सीतारमण को मां दुर्गा का रूप दे दिया है और लिखा है- भगवान (God).

सीतारमण ने दिए दो विकल्प

बैठक में जीएसटी के मुआवजे पर मंथन हुआ और इसके बाद वित्त मंत्री ने राज्यों को दो विकल्प प्रदान किए हैं। राज्यों को केंद्र ने सूचीबद्ध विकल्पों पर अपने विचारों के साथ आने के लिए सात दिनों का समय दिया है।

केंद्र का दिया गया पहला विकल्प, आरबीआई के परामर्श से राज्यों को एक विशेष उधारी मार्ग प्रदान करना है, जो उचित ब्याज दर पर 97,000 करोड़ रुपये प्रदान करेगा। पैसा उपकर के संग्रह से पांच साल बाद चुकाया जा सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र पहले विकल्प के दूसरे चरण के रूप में एफआरबीएम अधिनियम के तहत राज्यों की उधार सीमा में 0.5 प्रतिशत की और छूट देगा। इससे राज्यों को अपनी क्षतिपूर्ति कमी को कवर करने के लिए बिना शर्त अधिक उधार लेने की अनुमति मिलेगी। महामारी के कारण पनपे विपरीत हालातों के कारण राज्य अपेक्षित मुआवजे से परे, अधिक उधार लेने का विकल्प चुन सकते हैं।

दूसरा विकल्प ये है कि इस साल पूरे जीएसटी मुआवजे के अंतर को आरबीआई से सलाह लेने के बाद उधार के जरिए पूरा किया जाए। यानी दोनों विकल्पों की बात करें तो पहले विकल्प के तौर पर केंद्र खुद उधार लेकर राज्यों को मुआवजा देने की बात कर रहा है और दूसरे विकल्प के तौर पर आरबीआई से सीधे उधार लेने की बात कही गई है।

राज्य के वित्त सचिवों से 7 दिन में मांगे सुझाव

सीतारमण ने बताया कि राज्य के वित्त सचिवों को एक नोट में सुझाव भेजने के लिए कहा गया है और इसके लिए उन्हें सात दिनों का समय दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी की कमी को पूरा करने के लिए जिन विकल्पों पर चर्चा की गई है, वे केवल चालू वित्त वर्ष के लिए हैं।

जीएसटी परिषद अगले साल अप्रैल में इस मुद्दे पर फिर से विचार करेगी। वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि मौजूदा वर्ष में कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था की गति धीमी रही है, जिसके कारण जीएसटी संग्रह कम रहा है।

उन्होंने बताया कि कोविड द्वारा उत्पन्न हुई अभूतपूर्व स्थिति के कारण अप्रैल-मई और जून-जुलाई की दो द्विमासिक अवधि के लिए राज्यों की क्षतिपूर्ति उपकर की आवश्यकता 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

केंद्र जीएसटी कानून के तहत हर दो महीने में जीएसटी संग्रह की कमी के कारण राजस्व नुकसान की भरपाई करता है, लेकिन पिछले साल की दूसरी छमाही के बाद से राज्यों को मुआवजे के भुगतान में देरी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप राज्यों विशेषकर विपक्षी राज्य सरकारों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *