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Sunday, December 4, 2022

नौकरी गई तो बना दी 6 करोड़ की कंपनी, काम अमिताभ-टाटा बिड़ला के घर में हवा दुरुस्त करना

2008 का साल था। अमेरिकी एयर प्यूरीफाई मशीन बनाने वाली कंपनी फेडर्स में काम करता था, लेकिन अचानक कंपनी ने भारत से अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया। नौकरी चली गई। तब तक मुझे इस सेक्टर में काम करने का करीब 8 साल का अनुभव हो चुका था।

उस वक्त इंडिया में एयर प्यूरीफाई मशीन बनाने वाली वैसी कोई अच्छी कंपनी नहीं थी। मैंने सोचा कि पूरी जिंदगी तो नौकरी में लगा दी, कब तक दफ्तरों के चक्कर काटता रहूंगा, क्यों न अपना काम शुरू करूं।

भारत में इसके बारे में लोग अवेयर भी नहीं थे, लेकिन मुझे पता था कि देश की हवा लगातार खराब हो रही है। लोग प्योर एयर के लिए लाखों रुपए खर्च कर देंगे। मैंने 2008 में 50 लाख रुपए इन्वेस्ट कर कंपनी शुरू की और आज सालाना टर्नओवर 6 करोड़ है।

अमिताभ बच्चन से लेकर बिजनेसमैन राकेश झुनझुनवाला, टाटा, बिड़ला समेत तमाम बड़े कॉरपोरेट्स घराने मेरे कस्टमर हैं। इनके घरों की हवा को दुरुस्त रखने का काम मेरा है।

ये बातें एम्फा इंडिया के फाउंडर मंसूर अली मुंबई स्थित अपने ऑफिस में जब हमसे शेयर कर रहे थे, तब उनके ऑफिस की रिलेटिव ह्यूमिडिटी इंडेक्स यानी RH 40-60 थी। हवा का ये पैमाना हम सभी लोगों के लिए भी जरूरी है, लेकिन बदकिस्मती कि हमें प्योर हवा न घर के भीतर नसीब होती है और ना बाहर।

मंसूर कहते हैं- बाहर की हवा को तो हम ठीक नहीं कर सकते हैं, लेकिन चारदीवारी यानी घर के अंदर की हवा को एयर प्यूरीफाई मशीन इंस्टॉल कर प्योर कर सकते हैं।’

मंसूर कहते हैं- बाहर की हवा को तो हम ठीक नहीं कर सकते हैं, लेकिन चारदीवारी यानी घर के अंदर की हवा को एयर प्यूरीफाई मशीन इंस्टॉल कर प्योर कर सकते हैं।’

मंसूर अली ओडिशा के राउरकेला के रहने वाले हैं। हालांकि उनकी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई संबलपुर से हुई है। उन दिनों को याद करते हुए वो कहते हैं- दिल्ली में बड़े भाई रहते थे। बिहार और ओडिशा के बच्चे IAS बनने का सपना लेकर ही बड़े शहरों में आते हैं। मैं भी दिल्ली आ गया, लेकिन मुझे IAS नहीं बनना था। शुरू से लग रहा था कि कुछ अलग करूंगा।

ओडिशा से B.Com करने के बाद दिल्ली स्थित भारतीय विद्या भवन से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की और फिर BPL कंपनी में जॉब शुरू कर दी। उन दिनों BPL कंपनी का बहुत बोलबाला था। मुझे मैनेजमेंट ट्रेनी की जिम्मेदारी मिल गई।

ये बात 1992-93 की है। उन दिनों यह कंपनी भारत में पांव पसार रही थी। माइक्रोवेव से लेकर वाशिंग मशीन तक प्रोडक्ट लॉन्च कर रही थी। मुझे इस दौरान जापानी इंजीनियर्स के साथ काम करने का भी मौका मिला। कंपनी ने ही इंजीनियरिंग के कोर्स करवाए। ट्रेनिंग के लिए सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, चीन जैसे देश विजिट किए।

 

जब BPL कंपनी सिमटने लगी तो 2001 में एयर फिल्ट्रेशन कंपनी ओ जनरल जॉइन कर लिया। मुझे अमेरिकी कंपनी ने अफ्रीका और मिडिल ईस्ट का कंपनी हेड बना दिया। कंपनी का काम कई देशों, वहां के शहरों की हवा की शुद्धता को लेकर डेटा इकट्ठा करना भी था।

कंपनी इनडोर एयर क्वालिटी, एयर पॉल्यूशन का सॉल्यूशन देने का काम करती थी। मुझे बहुत कुछ सिखने को मिला, लेकिन साल 2008 में कंपनी ने भारत में काम बंद कर दिया।

 

हम, हमारी सरकार प्योर एयर को लेकर कितनी लापरवाह है। इस बात को लेकर मंसूर अली एक किस्सा बताते हैं। कहते हैं, 2014 का साल था। एनवायरनमेंट मिनिस्ट्री में सीनियर मिनिस्टर्स और अधिकारियों के सामने एक प्रेजेंटेशन दे रहा था। उनलोगों से मैंने कहा, ऐसा समय आएगा कि आप घर से नहीं निकल पाएंगे, बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे। शुद्ध हवा के लिए तरसेंगे।

मेरी बातों को सुनते ही वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे। उन्होंने कहा, कभी भी ऐसा समय नहीं आएगा, लेकिन जब कंपनी शुरू की थी तभी मेरे पास पूरा डेटा था। पता था कि भारत की हवा कितनी खराब हो रही?

मंसूर कहते हैं कि सबसे पहले दिल्ली और मुंबई में रेंट पर रूम लिया और 9 स्टाफ के साथ काम करना शुरू किया। 2008 में कंपनी सेट करने में करीब 50 लाख रुपए की लागत आई। जिसके लिए 15 लाख रुपए रिश्तेदारों से कर्ज लिए और बाकी के 35 लाख रुपए बैंक से प्रॉपर्टी लोन लिया।

वे बताते हैं कि एयर प्यूरीफाई मशीनों की मैन्यूफैक्चरिंग भारत में नहीं होती है। जिसके चलते मैंने इटली और अमेरिका से प्रोडक्ट को इंपोर्ट करना शुरू किया।

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