Wednesday , 29 January 2020
Kent RO launches 'zero water-wastage' purifier

हेमा मालिनी ने पेश की केंट आरओ की उन्नत प्रौद्योगिकी

-केंट आरओ का अगले वित्त वर्ष में एक हजार करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य

नई दिल्ली, 18 दिसंबर (शिवानी सोनी)। वाटर प्यूरिफायर तथा अन्य घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनी केंट आरओ सिस्टम्स लिमिटेड को नए उत्पादों के साथ अगले वित्त वर्ष में अपना कारोबार एक हजार करोड़ रुपये के स्तर पर तक पहुंचने की उम्मीद है। भाजपा की मथुरा से सांसद व फ़िल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने बुधवार को ‘जीरो वॉटर वेस्टेज आरओ प्यूरीफायर’ की उन्नत प्रौद्योगिकी पेश की। कंपनी का दावा है कि इस प्रौद्योगिकी से आरओ के इस्तेमाल में पानी की बर्बादी नहीं होती है।

इस मौके पर हेमा मालिनी ने कहा कि परिवारों में एक स्वस्थ जीवन शैली जीने और दूषित पानी के कारण संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यही कारण है कि भारत में पानी शुद्धता यंत्रों का बाजार एक उल्लेखनीय दर के साथ बढ़ रहा है। हेमामालिनी ने आगे कहा कि मौजूदा परिवेश में पानी की शुद्धता को लेकर काफी प्रयास किए जाने के बावजूद समस्या विकराल है। पेयजल की आपूर्ति गुणात्मक रूप से बढ़ती जा रही है और संसाधन घट रहे हैं, ऐसे में पानी की शुद्धता बनाये रखना बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को सरकारी और सामाजिक प्रयासों के जरिए ही पूरा किया जा सकता है।

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कंपनी के चेयरमैन महेश गुप्ता ने इस मौके पर संवाददाताओं से कहा कि कंपनी ने अगले वित्त वर्ष में एक हजार करोड़ रुपये का कारोबार करने का लक्ष्य ले कर चल रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक आरओ चार गिलास पानी से एक गिलास पीने योग्य पानी अलग करता है, लेकिन नयी प्रौद्योगिकी से लैस आरओ चार गिलास से पीने योग्य दो गिलास पानी शुद्ध करता है। यह शेष बचे पानी को टंकी में वापस भेज कर पुनर्चक्रित करता है, जिससे पानी की बर्बादी शून्य हो जाती है।

उन्होंने कहा कि शेष बचे पानी को यह आरओ प्रौद्योगिकी वापस छत पर लगी टंकी में भेज देती है। यह प्रौद्योगिकी 10 मंजिल तक के भवनों में काम करने में सक्षम है। कंपनी के मौजूदा ग्राहक पुराने आरओ में यह प्रौद्योगिकी लगवा सकते हैं। कंपनी ने इस मौके पर नयी प्रौद्योगिकी से लैस पहला आरओ प्यूरिफायर ग्रैंड प्लस को प्रदर्शित भी किया। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा आरओ पर रोक लगाने के संबंध में पूछे जाने पर गुप्ता ने कहा कि एनजीटी आरओ के कारण पानी की बर्बादी तथा पेयजल में खनिजों के कम हो जाने को लेकर चिंतित है। हमने नयी प्रौद्योगिकी के साथ इन दोनों चिंताओं को दूर किया है।

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