आप भी कर रहे हैं वर्क फ्रॉम होम तो देना पड़ेगा ज्यादा टैक्स, ये है वजह

New Delhi: कोरोना काल में अधिकतर प्रोफेशनल वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) कर रहे हैं। ऐसे में हो सकता है कि कन्वेंस अलाउंस (Conveyance allowance) अब टैक्स फ्री ना रह जाए। कोरोना के चलते वैकेशन और लीव ट्रैवल अलाउंस (Leave travel allowance) भी क्लेम नहीं किया जा सकेगा, जो एक 4 साल में दो बार क्लेम होता है।

कन्वेंस अलाउंस (Conveyance allowance) जब रीइंबर्समेंट की तरह ऑफर किया जाता है तो वह पूरी तरह से टैक्स फ्री (Tax free allowance) होता है अगर वाकई वो खर्चा हुआ है और उसके सबूत भी हैं। ऑफिशियल रूप से कहीं ना आ-जा पाने की सूरत में ये आय अब टैक्सेबल इनकम (Taxable income) के दायरे में आ सकती है।

HRA पर भी लगेगा टैक्स

इसी तरह अगर आपने कोरोना काल में अपना किराए का घर छोड़ दिया है और अपने परिवार के साथ अपने गांव के घर या अपने स्थायी घर जा चुके हैं तो आपको हाउस रेंट अलाउंस (House Rent Allowance) पर भी टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हो सकता है कि आपको एचआरए पर टैक्स देना पड़े।

टैक्स और रेगुलेटरी सेवाएं देने वाले BDOIndia के पार्टनर प्रकाश कोटाडिया कहते हैं- ‘अगर किसी शख्स ने अपना किराए का घर खाली कर दिया है और किराया नहीं दे रहा है तो उसकी टैक्स देनदारी बढ़ जाएगी, क्योंकि उसकी सैलरी में मिलने वाला एचआरए पर टैक्सेबल होगा।’

वर्क फ्रॉम होम अलाउंस भी टैक्सेबल

ऐसे ही अगर आपकी कंपनी आपको वर्क फ्रॉम होम अलाउंस (Work from Home allowance) दे रही है और आपसे ये नहीं पूछती है कि आप उसे कहां खर्च कर रहे हैं या आपसे खर्च का कोई सबूत नहीं मांग रही, तो इस पर भी आपको टैक्स चुकाना पड़ सकता है। टैक्स और एचआर एक्सपर्ट्स ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कंपनियां ऐसे रास्तों की तलाश में जुटी हुई हैं, जिनसे कर्मचारियों की मदद की जा सके, इसलिए सैलरी रीस्ट्रक्चर कर रही हैं।

कंपनियां खोज रहीं कर्मचारियों की मदद के तरीके

क्लीयरटैक्स के फाउंर और सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं- तमाम कंपनियों के एचआर हमसे ये पूछ रहे हैं कि कर्मचारियों का टैक्स का बोझ कम करने का तरीका क्या हो सकता है। सरकार भी इसे ध्यान में रख रही है कि नौकरीपेशा लोगों पर वर्क फ्रॉम होम की वजह से अधिक बोझ ना पड़े। रैंडस्टैंड इंडिया की अंजलि रघुवंशी कहती हैं कि सैलरी को रीस्ट्रक्चर करने से इस वक्त कर्मचारियों को फायदा नहीं होगा, जब तक कि टैक्स कानून के स्ट्रक्चर में बदलाव ना किया जाए। अभी कंपनियां रीइंबर्समेंट की तरह वर्क फ्रॉम होम अलाउंस दे रही हैं।

पर्सनल टैक्स कानून में करना होगा बदलाव

वकील और टैक्स सलाहकार वैथीस्वर्ण के ने कहा- ‘पर्सनल टैक्स कानून में बदलाव की जरूरत है, ताकि कुछ जरूरी अलाउंस कर्मचारियों को दिए जा सकें। जैसे ही कन्वेंस के पैसे कर्मचारी को ऑफिस बनाने, जिसमें आईटी और कम्युनिकेशन आदि हो, उसके लिए दिए जा सकते हैं।’ टैक्स विशेषज्ञ मानते हैं कि कई अलाउंस के बदले स्टैंडर्ड टैक्स डिडक्शन मुहैया कराना सरकार का एक अच्छा कदम है, जो वर्क फ्रॉम होम के कल्चर में भविष्य में फायदा पहुंचाएगा।

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