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मोदी सरकार की सख्ती से चीनी कंपनियों का निकल रहा दिवाला, अप्रूवल में हो रही देरी

New Delhi: पूर्वी लद्दाख में चीन की हरकतों (China aggression in Ladakh) के बाद देश में चीनी सामान के बहिष्कार (Bycott Cinese Goods) और चीन पर आयात निर्भरता कम करने की मांग उठी थी। इसके बाद भारत सरकार (Indian Govt) ने चीनी कंपनियों (Chinese Company) पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए थे। इससे भारत में कारोबार कर रहीं चीन की कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई है।

स्मार्टफोन बनाने वाली श्याओमी जैसी कंपनियों को क्वालिटी कंट्रोल एजेंसी (Quality Controll Agency) से अप्रूवल मिलने में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

भारत और चीन की इंडस्ट्री के सूत्रों में मुताबिक हाल के दिनों में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) ने मोबाइल फोन कंपोनेंट्स और टेलीविजन को मंजूरी देने में देरी की है जिससे श्याओमी और ओप्पो जैसी कंपनियों पर काफी असर पड़ा है।

सीमा पर त’नाव से दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते (India China Economic Relation) प्रभावित हुए हैं और भारतीय अधिकारियों को आशंका है कि आगे ये और बदतर हो सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा, दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बद से बदतर हुए हैं। उन्होंने कहा कि चीनी कंपनियों (Chinese Company) के कई निवेश प्रस्तावों को तुरंत मंजूरी मिलने की संभावना नहीं है।

एक नई स्टैंडर्ड पॉलिसी

एक सीनियर ऑफिसर ने कहा कि सरकार एक (Indian Govt) नई स्टैंडर्ड पॉलिसी पर काम कर रही है जिसकी घोषणा इस महीने के अंत में की जा सकती है। इसका मकसद चीन और दूसरे देशों से आने वाले घटिया सामान का आयात रोकना है। इंडियन इंडस्ट्री (Indian Industry) के एक सूत्र ने कहा कि सरकार में चल रहे मंथन से ब्रांडेड चीनी कंपनियों का अप्रूवल भी रुक गया है जो त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ने की उम्मीद कर रही थीं।

अधिकारी ने कहा कि चीनी उत्पादों (Chinese Products) को क्लीयरेंस नहीं मिल रही है क्योंकि क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को अपग्रेड किया जा रहा है। इससे कई प्रोडक्ट लाइंस प्रभावित हो सकते हैं। भारत में बिकने वाले हर 10 स्मार्टफोन में से 8 ओप्पो और श्याओमी के होते हैं। ये दोनों कंपनियां अपने अधिकांश मॉडल भारत में असेंबल करती हैं लेकिन कई कंपोनेंट चीन से आयात किए जाते हैं।

अप्रूवल में देरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। बीआईएस की रजिस्ट्रेशन स्कीम के तहत आयात किए जाने वाले या देश में बनने वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए भारत के मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।

कंपनियों के प्रोडक्ट को सर्टिफाइड लेबोरेटरी में टेस्ट किया जाता है और फिर बीआईएस उनकी एप्लिकेशन को अप्रूव करता है। स्मार्टफोन बनाने वाली चीन की एक कंपनी के सूत्र ने कहा कि पहले बीआईएस 15 दिन में एप्लिकेशन को प्रोसेस कर देता था लेकिन अब उन्हें लटकाकर रखा गया है।

643 एप्लिकेशंन रजिस्ट्रेशन के लिए पेंडिंग

BIS की वेबसाइट के मुताबिक शुक्रवार तक 643 एप्लिकेशंन रजिस्ट्रेशन के लिए पेंडिंग थीं। इनमें से 394 आवेदन 20 दिन से भी अधिक समय से लंबित हैं। इसमें यह नहीं बताया गया है कि इनमें से कितनी चीन की हैं।

चीन के ग्वांगझू स्थित एजेंसी सीपी-यूपी सर्टिफिकेशन टेक्नॉलजी सर्विस कंपनी कंपनियों को इस तरह के क्लीयरेंस दिलाने में मदद करती है। उसने 4 अगस्त को अपने कस्टमर्स को बताया कि BIS ने 23 जुलाई से नॉन इंडियन मैन्युफैक्चरर्स के एप्लिकेशंस को प्रोसेस करना बंद कर दिया है। उसका कहना है कि भारत और चीन के बीच ट्रेड वॉर के कारण ऐसा किया गया है।

BIS के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी एप्लिकेशन को क्लीयर करने से पहले कई मंत्रालयों के साथ सलाह मशविरा किया जा रहा है। इस बारे में BIS के डायरेक्टर जनरल प्रमोद कुमार तिवारी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। चीन की कॉमर्स मिनिस्ट्री और विदेश मंत्रालय ने भी तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। श्याओमी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जबकि ओप्पो ने जवाब नहीं दिया।

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