कुशाग्र बजाज की बेटी आनंदमयी ने थामी बजाज समूह की बागडोर, पांचवीं पीढ़ी से आगे बढ़ेगी सौ वर्ष पुरानी विरासत

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ललितपुर, (वेब वार्ता)। भारतीय कॉर्पोरेट जगत में एक नया और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया है। बजाज समूह के चेयरमैन कुशाग्र बजाज की 22 वर्षीय बेटी आनंदमयी बजाज ने इस महीने की शुरुआत में 2.5 अरब डॉलर के पारिवारिक व्यवसाय में महाप्रबंधक (रणनीति) के रूप में आधिकारिक कार्यभार संभाल लिया है। इस नियुक्ति के साथ ही आनंदमयी देश के प्रमुख कारोबारी घरानों की उन चुनिंदा महिलाओं में शामिल हो गई हैं, जो युवा उम्र में ही उच्च प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

आनंदमयी, जो वासवदत्ता बजाज और आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला की भांजी हैं, ने हाल ही में कोलंबिया विश्वविद्यालय से वित्तीय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री हासिल की है। अर्थशास्त्र और गणित में दक्षता रखने वाली आनंदमयी फिलहाल समूह के विभिन्न व्यवसायिक क्षेत्रों—चीनी, इथेनॉल, बिजली और पर्सनल केयर—में नेतृत्व टीमों के साथ कार्य करते हुए अनुभव अर्जित करेंगी। आगे चलकर वह कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल होंगी।

उनके दो छोटे भाई हैं—युगादिकृत बजाज (20) और विश्वरूपी बजाज (17)। युगादिकृत अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अगले दो साल में समूह में शामिल होंगे, जबकि विश्वरूपी एचआर कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं और एक पोलो चैंपियन भी हैं।

कुशाग्र बजाज ने अपनी बेटी की नियुक्ति पर कहा,

“वह युवा जिज्ञासा और जमीनी जिम्मेदारी का अनूठा संगम लेकर आई हैं। उनकी यात्रा सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक कहानी का विस्तार है।”

अपनी नई भूमिका को लेकर आनंदमयी ने कहा,

“बजाज समूह से औपचारिक रूप से जुड़ना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं सीखने, बढ़ने और समूह की परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हूं। यह एक जिम्मेदारी है जिसे मैं पूरे समर्पण के साथ निभाऊंगी।”

सामाजिक सरोकार और नई सोच

व्यवसायिक दृष्टि के साथ-साथ आनंदमयी की रुचि पशु देखभाल और महिला सशक्तिकरण में भी गहरी है। वह भविष्य में इन क्षेत्रों में समूह की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहलों को और मज़बूत करने का लक्ष्य रखती हैं। उनका मानना है कि किसी भी बड़े संगठन की सफलता केवल मुनाफे से नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण में किए गए सकारात्मक योगदान से भी मापी जाती है।

बजाज समूह, जिसकी स्थापना स्वर्गीय जमनालाल बजाज ने की थी—जो महात्मा गांधी के दत्तक पुत्र माने जाते थे—पिछले सौ वर्षों से औद्योगिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सामाजिक कल्याण में भी अग्रणी रहा है। समूह वर्तमान में 12,000 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है और शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला उत्थान और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में लगातार काम कर रहा है।

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